उत्तर भारत के पहाड़ों पर मौसम ने करवट ले ली है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। बर्फ की सफेद चादर से पहाड़ फिर से चमक उठे हैं, जबकि मैदानी इलाकों में गुलाबी ठंडक का एहसास होने लगा है। वहीं, दक्षिण भारत में लौटते मानसून ने एक बार फिर सक्रिय होकर कई राज्यों में झमाझम बारिश कराई है।
शिमला, मनाली, केदारनाथ, बद्रीनाथ, और गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर सीजन की पहली बर्फबारी के बाद तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों — दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश — में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तक गिरावट देखी जा सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ठंड का शुरुआती असर है और आने वाले दिनों में उत्तर भारत में सर्दी की शुरुआत हो जाएगी। दिल्ली-एनसीआर में भी सुबह और रात के समय हल्की ठंडक महसूस की जा रही है, जबकि प्रदूषण स्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दक्षिण भारत में लौटता मानसून सक्रिय
उधर, दक्षिण भारत में लौटते मानसून ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू कर दिया है। चेन्नई, कोच्चि और बेंगलुरु में बीते 24 घंटों में मध्यम से तेज बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए कई तटीय जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।
आईएमडी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के चलते अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। यह लौटते मानसून की सक्रियता का संकेत है, जो अक्टूबर के मध्य तक दक्षिण भारत को भिगोता रहेगा।
बर्फबारी और बारिश दोनों ही मौसम प्रेमियों और पर्यटकों के लिए राहत लेकर आए हैं। उत्तराखंड और हिमाचल के हिल स्टेशनों पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ने लगी है, जबकि दक्षिण भारत में बारिश ने गर्मी और उमस से राहत दी है।
मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, खासकर यात्रा करने वाले पर्यटकों को फिसलन और भूस्खलन की स्थिति से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दक्षिणी राज्यों के तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई है।
उत्तर में सर्दी की आहट और दक्षिण में लौटते मानसून की बारिश — भारत के दो हिस्सों में मौसम ने एक साथ अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह बदलाव और भी स्पष्ट होगा, जब अक्टूबर के अंत तक सर्दी का असर बढ़ेगा और मानसून पूरी तरह विदाई ले लेगा।










