भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य Assam की विधान सभा ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए Assam Prohibition of Polygamy Bill, 2025 पारित कर दिया। इस नए कानून का उद्देश्य राज्य में बहुविवाह (एक व्यक्ति द्वारा एक से अधिक वैध विवाह करना) को प्रतिबंधित करना है। इसके तहत पहली पत्नी के जीवन में दूसरी या आगे की शादी करने को दंडनीय अपराध माना जाएगा।यदि कोई व्यक्ति पहली शादी के दौरान दूसरी शादी करता है यानी पहली पत्नी जीवित है और वैवाहिक बंधन कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ है तो उस व्यक्ति को सात साल तक imprisonment की सज़ा हो सकती है। यदि पहली शादी को छिपाकर दूसरी शादी की जाती है अर्थात जान-बूझकर पहले विवाह को छुपाकर विवाह सम्पन्न किया जाए तो सज़ा और भी कड़ी होगीइस धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के लिए समान रूप से बहुविवाह निषिद्ध होगा।

कानून सिर्फ विवाह करने वालों पर नहीं, बल्कि उन सब पर लागू होगा जो बहुविवाह कराने या उसमें मदद करेंगे चाहे वे काजी हों, गांव के मुखिया हों या माता-पिता/गॉर्डियन। यदि वे जान-बूझकर किसी अवैध विवाह को सही ठहराते या छिपाते हैं, तो उन्हें भी दो साल तक जेल व जुर्माना का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा दंडित व्यक्ति सरकारी नौकरी, सार्वजनिक नियुक्ति, चुनाव लडऩा आदि के लिए योग्य नहीं होगा।
किन पर लागू नहीं
लेकिन हर किसी पर यह कानून लागू नहीं होगा इसे राज्य की कुछ विशिष्ट सामाजिक व क्षेत्रीय परिस्थितियों का सम्मान करते हुए बनाया गया है। जिनका संबंध अनुसूचित जनजाति से है, उन्हें इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। जिन क्षेत्रों को संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत रखा गया है जैसे कुछ स्वायत्त या जनजातीय इलाके वहाँ यह कानून लागू नहीं होगा। कानून की यह असमानता (जातीय/क्षेत्रीय छूट) बड़ी बहस का विषय बनी है।
सरकार का तर्क
इस कानून को पेश व पास करते समय, HIMANTA BISWA SARMA जो असम के मुख्यमंत्री हैं ने बार-बार कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि“यह कानून धर्मनिरपेक्ष है — हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सभी को इसमें शामिल किया गया है। बहुविवाह सिर्फ किसी एक धर्म की समस्या नहीं है।उनका यह भी कहना रहा कि यह कानून महिलाओं को “न्याय” और “समान अधिकार” दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कई मुस्लिम-इलाकों में बहुविवाह की प्रथा है, लेकिन हिंदुओं और अन्य धर्मों में भी ये प्रथा होती है, लिहाजा इस कानून को सब-समुदायों पर लागू किया गया है। साथ ही सीएम सरमा ने यह कहा कि यदि उनकी सरकार 2026 के चुनावों के बाद फिर बनेगी, तो राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की पूरी कोशिश की जाएगी और बहुविवाह प्रतिबंध को इस दिशा में पहला कदम बताया गया।
सीएम सरमा ने इस बिल को “महिला सशक्तिकरण” की दिशा में पहला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि फरवरी सत्र (2026) में एक अन्य विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें धोखाधड़ी-पूर्वक की गई विवाहों पर कानून लाया जाएगा। अगर यह कानून लागू होता है, तो असम में विवाह, तलाक, पुनर्विवाह आदि मामलों में नए नियम सामने आएंगे और कुल मिलाकर, निजी व धार्मिक कानूनों के बजाय राज्य द्वारा निर्धारित समान नागरिक कानून की ओर पहला कदम होगा।