असम के एक हाईवे पर विमान उतरता है — और वह भी प्रधानमंत्री का।
तस्वीरें सामने आती हैं तो लोग चौंकते हैं। सवाल उठता है — क्या यह सिर्फ एक उद्घाटन कार्यक्रम था या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीतिक सोच छिपी है?
प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने असम दौरे के दौरान एक ऐसे हाईवे स्ट्रिप पर उतरे, जिसे विशेष रूप से आपातकालीन लैंडिंग के लिए तैयार किया गया है। यह दृश्य प्रतीकात्मक भी था और रणनीतिक भी।

कैसे हुई लैंडिंग?
प्रधानमंत्री पहले Chabua Air Force Station पहुँचे। इसके बाद वे भारतीय वायुसेना के विशेष परिवहन विमान C-130J Super Hercules से डिब्रूगढ़ की ओर रवाना हुए।
यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है — कम लंबाई वाले रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन और सामरिक मिशनों के लिए उपयुक्त डिजाइन।
इसी क्षमता के चलते इसे हाईवे पर बनी Emergency Landing Facility (ELF) पर उतारा गया।
क्या होती है Emergency Landing Facility?
Emergency Landing Facility यानी ELF दरअसल हाईवे का वह हिस्सा होता है जिसे इस तरह डिजाइ
न किया जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर वह अस्थायी रनवे की तरह काम कर सके।
आम दिनों में वहां सामान्य ट्रैफिक चलता है — कारें, ट्रक, बसें।
लेकिन आपात स्थिति में:
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ट्रैफिक तुरंत रोका जा सकता है
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सड़क की मजबूत और अतिरिक्त मोटाई भारी विमान का भार सह सकती है
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सतह पूरी तरह समतल होती है
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आसपास ऊँची इमारतें या अवरोध नहीं होते
यानी यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि एक बैकअप एयरबेस की तरह काम करता है।
रणनीतिक महत्व: चीन सीमा और सुरक्षा दृष्टि
यह हाईवे स्ट्रिप चीन सीमा से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सीमावर्ती इलाकों में वैकल्पिक लैंडिंग सुविधाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
अगर किसी कारण से पारंपरिक एयरबेस अस्थायी रूप से बंद हो जाए — तकनीकी कारणों से या किसी हमले की स्थिति में — तो वायुसेना के पास वैकल्पिक विकल्प होना जरूरी है।
ऐसी स्थिति में हाईवे रनवे सामरिक ऑपरेशन जारी रखने में मदद कर सकते हैं।
आपदा प्रबंधन में भी बड़ी भूमिका
पूर्वोत्तर भारत बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से अक्सर प्रभावित होता है। कई बार सड़क और हवाई संपर्क बाधित हो जाता है।
ऐसे में ELF जैसी सुविधाएं राहत सामग्री और बचाव दल को तेजी से पहुंचाने में मददगार हो सकती हैं।
बड़े परिवहन विमान सीधे उतर सकते हैं और राहत कार्य में तेजी लाई जा सकती है।
यानी यह पहल सिर्फ सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं है — यह आपदा प्रबंधन के लिए भी अहम है।
वैश्विक मॉडल और भारत की पहल
दुनिया के कई देशों — विशेषकर यूरोप में — हाईवे को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि जरूरत पड़ने पर फाइटर जेट भी उतर सकें।
भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग राज्यों में इस तरह की परियोजनाएं शुरू की गई हैं। लेकिन पूर्वोत्तर में इसे एक बड़ी और रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
विकास और सुरक्षा साथ-साथ
अपने असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सिर्फ ELF का उद्घाटन नहीं किया, बल्कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बने भास्कर वर्मा सेतु और IIM Guwahati के अस्थायी परिसर का भी उद्घाटन किया।
संदेश स्पष्ट था —
पूर्वोत्तर में विकास और सुरक्षा को साथ लेकर चलने की नीति।
C-130J की लैंडिंग: सिर्फ प्रतीक नहीं, प्रदर्शन
C-130J Super Hercules जैसे विमान का चयन भी महज औपचारिक नहीं था।
यह विमान कठिन और सामरिक इलाकों में उतरने की क्षमता रखता है। हाईवे पर इसकी सफल लैंडिंग एक तरह से लाइव डेमो थी — यह दिखाने के लिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर और वायुसेना दोनों तैयार हैं।
बड़ी तस्वीर क्या है?
आधुनिक दौर में इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुउद्देश्यीय बनाना एक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।
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सड़क केवल यातायात का माध्यम नहीं
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वह आपातकालीन रनवे भी बन सकती है
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वह राहत कार्य का माध्यम भी बन सकती है
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और वह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम स्तंभ भी हो सकती है
असम के हाईवे पर उतरा यह विमान सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक संकेत था — सीमावर्ती इलाकों में तैयारी को मजबूत करने का संकेत।