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अमेरिका-इजरायल रक्षा सहयोग THAAD दबाव

United States और Israel के बीच सैन्य सहयोग को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान अमेरिका ने इजरायल की रक्षा के लिए अपने मिसाइल रक्षा सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। इससे अमेरिकी मिसाइल भंडार पर भारी दबाव पड़ा है और अब उसकी सैन्य तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा के लिए 200 से अधिक THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलें तैनात कीं। इसके अलावा पूर्वी भूमध्य सागर में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक जहाजों से भी बड़ी संख्या में स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 दागी गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कार्रवाइयों के बाद अमेरिका के मिसाइल स्टॉक का बड़ा हिस्सा कम हो गया है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति से अमेरिका के सहयोगी देशों की चिंता बढ़ सकती है। खासकर Japan और South Korea जैसे देश, जो क्षेत्रीय खतरों से बचाव के लिए अमेरिकी सैन्य समर्थन पर निर्भर रहते हैं, अब संभावित सुरक्षा जोखिमों को लेकर सतर्क हो गए हैं। यदि भविष्य में चीन, उत्तर कोरिया या ईरान के साथ कोई नया तनाव पैदा होता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित हो सकती है। Donald Trump प्रशासन और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन चिंताओं को कम करके दिखाने की कोशिश की है। पेंटागन का कहना है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर रक्षा अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया और दोनों देशों ने आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम का प्रभावी उपयोग किया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसे सैन्य अभियानों से अमेरिका की रणनीतिक क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है।

इजरायल के लिए अमेरिका ने खर्च किए अपने शस्त्र, ट्रंप अब बेहाल, नेतन्याहू ने सुरक्षित किया अपना भंडार।

 United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालिया संघर्ष के दौरान इजरायल की सुरक्षा का सबसे बड़ा जिम्मा अमेरिका ने उठाया। आरोप है कि अमेरिकी सेना ने बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जबकि Israel ने अपने रणनीतिक भंडार को काफी हद तक सुरक्षित रखा। ईरानी मिसाइल हमलों को रोकने के लिए अमेरिका ने THAAD और स्टैंडर्ड मिसाइल सिस्टम का व्यापक इस्तेमाल किया। अमेरिकी नौसेना और वायु रक्षा इकाइयों ने मिलकर कई इंटरसेप्टर लॉन्च किए, जिससे क्षेत्र में बड़े नुकसान को टालने में मदद मिली। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते सैन्य उपयोग के कारण अमेरिका के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ गई है। Japan और South Korea जैसे देश अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि भविष्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोई बड़ा संकट खड़ा होता है, तो क्या अमेरिका के पास पर्याप्त रक्षा संसाधन उपलब्ध होंगे। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को संतुलित तरीके से पेश करते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से रक्षा अभियान को अंजाम दिया। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और तकनीकी समन्वय के कारण बड़े खतरे को टाला जा सका। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका की सैन्य क्षमता और वैश्विक जिम्मेदारियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

United States और Israel के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग अब अमेरिका के लिए नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इजरायल की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसके बाद अमेरिकी मिसाइल भंडार में भारी कमी आने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी सेना ने इजरायल को बचाने के लिए उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली का व्यापक उपयोग किया। THAAD और स्टैंडर्ड मिसाइल सिस्टम के जरिए कई ईरानी हमलों को रोका गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते सैन्य उपयोग से अमेरिका के रणनीतिक हथियार भंडार पर दबाव बढ़ गया है और अब उसकी दीर्घकालिक तैयारी पर सवाल उठने लगे हैं। इस स्थिति ने अमेरिका के सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ा दी है। Japan और South Korea जैसे देश सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर भविष्य में चीन, उत्तर कोरिया या ईरान के साथ नया तनाव पैदा होता है, तो अमेरिका के पास पर्याप्त रक्षा संसाधन होंगे या नहीं, इसको लेकर रणनीतिक विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा क्षमता अभी भी मजबूत है और अमेरिका किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में सक्षम है। पेंटागन ने दावा किया कि इजरायल के साथ मिलकर चलाए गए रक्षा अभियानों में आधुनिक तकनीक और संयुक्त रणनीति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात अमेरिका की सैन्य नीति और वैश्विक जिम्मेदारियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।

अमेरिका-इजरायल रक्षा सहयोग मिसाइल भंडार दबाव THAAD भारी उपयोग

हालिया ईरान के साथ हुए टकराव के दौरान इजरायल की वायु सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग संभालने के कारण अमेरिका के उन्नत मिसाइल रक्षा इंटरसेप्टर का बड़ा भंडार समाप्त हो गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम छुपाने की शर्त पर बताया कि इस असंतुलन ने यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या अमेरिका वैश्विक स्तर पर अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा के लिए 200 से अधिक टर्मिनल हाई एल्टिट्यूड एरिया डिफेंस यानी THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलें भेजीं। पूर्वी भूमध्य सागर में अपने नौसैनिक जहाजों से 100 से अधिक स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 इंटरसेप्टर भी लॉन्च किए गए।इससे अमेरिका के मिसाइल भंडार का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो गया है।

अमेरिका के लिए जोखिम क्यों

स्टिमसन सेंटर की सीनियर फेलो केली ग्रीको ने बताया कि ये आंकड़े आश्चर्यजनक हैं। अमेरिका ने मिसाइल रक्षा का अधिकांश भार उठाया, जबकि इजरायल ने अपने भंडार को सुरक्षित रखा। हालांकि रणनीति सटीक थी, लेकिन अमेरिका के पास केवल लगभग 200 THAAD इंटरसेप्टर बचे हैं और उनकी उत्पादन क्षमता मांग की तुलना में बेहद धीमी है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगी इस कमी को लेकर परेशान हैं, क्योंकि दोनों देश चीन और उत्तर कोरिया के खतरे से बचने के लिए अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर करते हैं. एक और अमेरिकी अधिकारी ने द वॉशिंगटन पोस्ट को बताया, “कुल मिलाकर अमेरिका ने लगभग 120 अतिरिक्त इंटरसेप्टर फायर किए और ईरानी मिसाइलों के मुकाबले दोगुना अधिक किया।” अधिकारी ने संकेत दिया कि अमेरिका-इजरायल साझेदारी की जो चमक-दमक दिखाई जाती है, असली सैन्य दबाव उससे बहुत अलग है. अखबार ने यह भी बताया कि इजरायल की सेना कुछ मिसाइल रक्षा बैटरियों को रखरखाव हेतु अस्थायी रूप से बंद करने जा रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लेते हैं, तो अमेरिकी इंटरसेप्टर भंडार पर दबाव और बढ़ सकता है।

ट्रंप की टीम ने क्या बयान दिया?

एक बयान में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इजरायल और अमेरिका के बीच हथियारों के संतुलन की रक्षा की. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने द पोस्ट को बताया, “बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर केवल उस व्यापक नेटवर्क का एक भाग हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के सिस्टम और क्षमताएं जुड़ी हैं। यह एक साथ मिलकर एक बहु-स्तरीय और समेकित वायु सुरक्षा प्रणाली का निर्माण करते हैं। पार्नेल ने कहा, “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के समय इजरायल और अमेरिका ने समान रूप से रक्षा का भार उठाया। इस मुहिम में दोनों देशों ने लड़ाकू विमान, एंटी ड्रोन सिस्टम और कई अन्य उन्नत एयर और मिसाइल रक्षा तकनीकों का अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रयोग किया।

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