इजरायल के लिए अमेरिका ने खर्च किए अपने शस्त्र, ट्रंप अब बेहाल, नेतन्याहू ने सुरक्षित किया अपना भंडार।
United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालिया संघर्ष के दौरान इजरायल की सुरक्षा का सबसे बड़ा जिम्मा अमेरिका ने उठाया। आरोप है कि अमेरिकी सेना ने बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जबकि Israel ने अपने रणनीतिक भंडार को काफी हद तक सुरक्षित रखा। ईरानी मिसाइल हमलों को रोकने के लिए अमेरिका ने THAAD और स्टैंडर्ड मिसाइल सिस्टम का व्यापक इस्तेमाल किया। अमेरिकी नौसेना और वायु रक्षा इकाइयों ने मिलकर कई इंटरसेप्टर लॉन्च किए, जिससे क्षेत्र में बड़े नुकसान को टालने में मदद मिली। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते सैन्य उपयोग के कारण अमेरिका के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ गई है। Japan और South Korea जैसे देश अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि भविष्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोई बड़ा संकट खड़ा होता है, तो क्या अमेरिका के पास पर्याप्त रक्षा संसाधन उपलब्ध होंगे। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को संतुलित तरीके से पेश करते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से रक्षा अभियान को अंजाम दिया। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और तकनीकी समन्वय के कारण बड़े खतरे को टाला जा सका। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका की सैन्य क्षमता और वैश्विक जिम्मेदारियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।


अमेरिका के लिए जोखिम क्यों
स्टिमसन सेंटर की सीनियर फेलो केली ग्रीको ने बताया कि ये आंकड़े आश्चर्यजनक हैं। अमेरिका ने मिसाइल रक्षा का अधिकांश भार उठाया, जबकि इजरायल ने अपने भंडार को सुरक्षित रखा। हालांकि रणनीति सटीक थी, लेकिन अमेरिका के पास केवल लगभग 200 THAAD इंटरसेप्टर बचे हैं और उनकी उत्पादन क्षमता मांग की तुलना में बेहद धीमी है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगी इस कमी को लेकर परेशान हैं, क्योंकि दोनों देश चीन और उत्तर कोरिया के खतरे से बचने के लिए अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर करते हैं. एक और अमेरिकी अधिकारी ने द वॉशिंगटन पोस्ट को बताया, “कुल मिलाकर अमेरिका ने लगभग 120 अतिरिक्त इंटरसेप्टर फायर किए और ईरानी मिसाइलों के मुकाबले दोगुना अधिक किया।” अधिकारी ने संकेत दिया कि अमेरिका-इजरायल साझेदारी की जो चमक-दमक दिखाई जाती है, असली सैन्य दबाव उससे बहुत अलग है. अखबार ने यह भी बताया कि इजरायल की सेना कुछ मिसाइल रक्षा बैटरियों को रखरखाव हेतु अस्थायी रूप से बंद करने जा रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लेते हैं, तो अमेरिकी इंटरसेप्टर भंडार पर दबाव और बढ़ सकता है।
ट्रंप की टीम ने क्या बयान दिया?
एक बयान में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इजरायल और अमेरिका के बीच हथियारों के संतुलन की रक्षा की. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने द पोस्ट को बताया, “बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर केवल उस व्यापक नेटवर्क का एक भाग हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के सिस्टम और क्षमताएं जुड़ी हैं। यह एक साथ मिलकर एक बहु-स्तरीय और समेकित वायु सुरक्षा प्रणाली का निर्माण करते हैं। पार्नेल ने कहा, “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के समय इजरायल और अमेरिका ने समान रूप से रक्षा का भार उठाया। इस मुहिम में दोनों देशों ने लड़ाकू विमान, एंटी ड्रोन सिस्टम और कई अन्य उन्नत एयर और मिसाइल रक्षा तकनीकों का अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रयोग किया।










