रूसी राष्ट्रपति ने कहा- ईरान अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा है; ट्रम्प अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से विचार-विमर्श किया। बैठक में रूस ने ईरान के प्रति अपनी समर्थन की पुष्टि की। रूसी मीडिया के अनुसार, पुतिन ने कहा कि ईरानी लोग साहस और वीरता के साथ अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का संदेश प्राप्त हुआ है। अराघची की यात्रा उस समय हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया वार्ताएँ किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकी हैं। इसी कारण ईरान अपने लिए रूस का समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें ईरान के साथ बढ़ते तनाव, रुक गई बातचीत और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।
बैठक में ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने के संभावित विकल्प पर विचार किया जा सकता है। ट्रम्प ने रविवार को ईरान को चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उसके पास युद्ध समाप्त करने के लिए सीजफायर पर सहमत होने के लिए केवल तीन दिन बचे हैं, अन्यथा उसकी तेल पाइपलाइन में विस्फोट हो जाएगा। फॉक्स न्यूज को दिए गए साक्षात्कार में ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान तेल का निर्यात नहीं कर पाता है, तो उससे पाइपलाइन में दबाव बढ़ेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तेल भेजने के रास्ते बंद हो गए हैं और उस पर नाकेबंदी लगी हुई है। उनका कहना था कि जब तेल का प्रवाह अचानक रुकता है, तो पाइपलाइन के भीतर दबाव बढ़ता है और तकनीकी तथा प्राकृतिक कारणों से वह फट सकती है। ट्रम्प के मुताबिक, यदि ऐसा होता है तो पाइपलाइन को पहले जैसी स्थिति में फिर से बनाना लगभग असंभव होगा और इसकी क्षमता भी बहुत कम हो जाएगी। मध्य पूर्व में जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस का दौरा कर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस बैठक ने साफ संकेत दिया कि मौजूदा संकट में रूस, ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है। रूसी नेतृत्व ने खुले तौर पर ईरान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि ईरानी जनता अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। पुतिन का यह बयान न केवल कूटनीतिक संदेश था, बल्कि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी माना जा रहा है।
इस मुलाकात का समय बेहद अहम है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में पहुंच चुकी है। ऐसे में तेहरान अब अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत करने में जुटा है। रूस के साथ यह नजदीकी भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा कर सकती है, खासकर ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय राजनीति के मामलों में। दूसरी ओर, अमेरिका भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें ईरान के साथ बढ़ते तनाव और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई, यहां तक कि बमबारी शुरू करने जैसे विकल्पों पर भी विचार हो सकता है। ट्रम्प ने हाल ही में ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास युद्ध समाप्त करने और संघर्षविराम (सीजफायर) पर सहमत होने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर ईरान तेल निर्यात नहीं कर पाएगा, तो उसकी तेल पाइपलाइनों में दबाव बढ़ सकता है, जिससे गंभीर तकनीकी और आर्थिक नुकसान हो सकता है। ट्रम्प के इस बयान को कई विशेषज्ञ एक प्रकार की रणनीतिक दबाव नीति के रूप में देख रहे हैं, जिसका उद्देश्य ईरान को जल्दी समझौते के लिए मजबूर करना है।
वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और फ्रांस जैसे देशों के नेताओं से मुलाकात और बातचीत कर संकट को कम करने की कोशिश की है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, इस संघर्ष का केंद्र बन चुका है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाता है और युद्ध समाप्त होता है, तो वह इस मार्ग को फिर से खोल सकता है। हालांकि, स्थिति अभी भी बेहद जटिल बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा के दौरान भी अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बहस देखने को मिली। यह विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है, जिसे लेकर पश्चिमी देश लगातार चिंता जताते रहे हैं।
हालिया हमलों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसके आर्थिक और राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें अमेरिका की आगामी रणनीति और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह संकट केवल दो देशों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक नए संघर्ष की ओर बढ़ेगी या फिर कूटनीति इस संकट को टालने में सफल होगी।
पिछले 24 घंटों के 5 प्रमुख समाचार अपडेट्स
ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से मुलाकात की- अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत की। अराघची ने ओमान के सुल्तान से मुलाकात की- मस्कट में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ युद्ध और शांति की बहाली पर चर्चा की गई। ईरान और फ्रांस के विदेश मंत्रियों ने फोन पर चर्चा की- दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने सीजफायर और कूटनीतिक प्रयासों पर विचार-विमर्श किया। ट्रम्प और ब्रिटिश पीएम के बीच फोन पर बातचीत- डोनाल्ड ट्रम्प और कीर स्टार्मर ने होर्मुज में शिपिंग पुनः स्थापित करने पर चर्चा की। जापान को अमेरिका से पहला तेल टैंकर प्राप्त हुआ- होर्मुज संकट के बीच जापान को अमेरिका से कच्चे तेल का टैंकर प्राप्त हुआ, जो पनामा नहर के माध्यम से पहुंचा। इज़राइल और अमेरिकी हमलों में ईरान के 3375 लोग हताहत हुए हैं। ईरान की हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार यूएस-इज़राइल के हमलों में 27 अप्रैल तक 3375 लोग मारे गए। जबकि 26 हजार 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। साथ ही, हिज़्बुल्लाह और ईरान के प्रतिशोधी हमलों में इज़राइल में 26 लोग मारे गए और 7791 लोग घायल हुए हैं।
UN में परमाणु संधि पर US-ईरान टकराव
संयुक्त राष्ट्र में परमाणु संधि की समीक्षा शुरू, अमेरिका-ईरान के बीच कार्यक्रम को लेकर टकराव सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनी संधि की समीक्षा आरंभ हुई। इसी समय अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। विवाद का मुख्य कारण ईरान का इस सम्मेलन के 34 उपाध्यक्षों में से एक के रूप में चयन होना था। इस सम्मेलन में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के 191 सदस्य इसकी समीक्षा कर रहे हैं कि इसे कैसे लागू किया जा रहा है, जैसा कि वे 1970 में इसके लागू होने के बाद हर पाँच साल में करते आए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे। भारतीय समयानुसार मंगलवार को रूस यात्रा खत्म करके इस्लामाबाद पहुंचे अराघची का यह दौरा अमेरिका के साथ चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए की जा रही कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा है। प्रेस टीवी के अनुसार, पाकिस्तान में उनका यह तीसरा दौरा है। इससे पहले, अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाओं पर चर्चा की गई।
लेबनान में इजरायली हमला, 4 की मौत
दक्षिणी लेबनान में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं, जहां लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली हमलों में कम से कम चार लोगों की जान चली गई, जिनमें एक महिला भी शामिल है, जबकि 51 अन्य लोग घायल हुए हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही संघर्ष और अस्थिरता बनी हुई है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन लगातार हो रही हिंसा के कारण हालात संभालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित बड़े संघर्ष की आशंकाओं को तेज कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की जा रही है।ईरान की शर्त- होर्मुज को खोला जाएगा, लेकिन अमेरिका प्रतिबंध हटाए और युद्ध खत्म करे, दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका देश पर से प्रतिबंध हटा ले और युद्ध समाप्त कर दे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ छोड़ देगा। इस प्रस्ताव के कारण इस्लामिक रिपब्लिक के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर बातचीत में देरी होगी।
फ्रांस का सख्त संदेश ईरान बदले रुख
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण फ्रांस ने ईरान के प्रति एक कठोर रुख अपनाया है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि क्षेत्रीय युद्ध को समाप्त करना है, तो ईरान को बड़े और ठोस समझौतों पर पहुंचना होगा और अपनी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव लाना होगा। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान उन्होंने जोर दिया कि छोटे या प्रतीकात्मक प्रयासों से इस संकट का समाधान नहीं होगा, बल्कि व्यापक और निर्णायक कदम जरूरी हैं। बैरो ने यह भी संकेत किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ईरान से ठोस रियायतों की अपेक्षा कर रहा है, विशेषकर उन मुद्दों पर जो क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से संबंधित हैं। इससे पहले उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत करके युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान के विकल्पों पर चर्चा की थी, लेकिन फ्रांस का मानना है कि स्थायी शांति के लिए ईरान को अपने रुख में गंभीर बदलाव दिखाना अनिवार्य है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को किसी भी स्थिति में बंधक नहीं बनने देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी एक देश को यह अधिकार नहीं हो सकता कि वह वहां से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण, शुल्क या अनुमति जैसी शर्तें लगाए। रुबियो ने कहा कि यदि ईरान यह दावा करता है कि मार्ग खुला है लेकिन जहाजों को उसकी अनुमति या दबाव के तहत गुजरना पड़े, तो इसे स्वतंत्र आवाजाही नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका ऐसे किसी भी ढांचे को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश करे, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
रुबियो बोले ईरान समझौते को लेकर गंभीर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान मौजूदा हालात में अमेरिका के साथ समझौते को लेकर गंभीर नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान इस समय आर्थिक दबावों से जूझ रहा है, जिसमें बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत और लगातार लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं। उनके अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले जो आर्थिक और सामाजिक समस्याएं ईरान के सामने थीं, वे अब और भी गंभीर हो चुकी हैं, जिससे तेहरान बातचीत की ओर झुकता दिखाई दे रहा है। ईरान के अधिकारियों के साथ होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर चर्चा करेंगे, ऐसा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य होते देखना चाहती है। इसके अलावा, एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन भी स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थिति को स्थिर करना है। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले दिनों में सभी पक्षों को मनाकर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकेगा। मैक्रों ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस मार्ग में जहाजों की बाधारहित आवाजाही बहाल होना चाहिए। इसी बीच, फ्रांस की ऊर्जा कंपनी टोटलएनर्जीज के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान का युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो यह ऊर्जा संकट का कारण बन सकता है।
रूस की चेतावनी ईरान पर हमले से वैश्विक तनाव बढ़ेगा
ईरान पर संभावित हमलों का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा, रूस ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रूस का कहना है कि इस कार्रवाई के व्यापक परिणाम होंगे, जो अंतरराष्ट्रीय रिश्तों और परमाणु अप्रसार ढांचे को प्रभावित करेंगे। रूस के विशेष दूत आंद्रेई बेलोउसॉव ने कहा कि ईरान पर हमला एक गंभीर और असाधारण कदम है। इससे वैश्विक तनाव में वृद्धि हो सकती है और अनेक देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चेताया कि यह कार्रवाई परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के ढांचे और सदस्य देशों के सहयोग को नुकसान पहुंचा सकती है। रूस ने यह भी बताया कि ईरान के परमाणु स्थलों पर हमलों से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। बेलोउसॉव ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनदेखी करते हुए की गई। रूस इस मुद्दे को न्यूयॉर्क में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि सम्मेलन में उठाएगा। सऊदी अरब में इस बार ईरानी हज यात्रियों का विशेष और सौहार्दपूर्ण तरीके से स्वागत किया गया, जहां उन्हें फूलों के मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया और पूरे गर्मजोशी भरे माहौल में उनका अभिनंदन किया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में स्थानीय लोग ईरान से आए हज यात्रियों का मुस्कुराते हुए स्वागत करते नजर आए, जिससे धार्मिक यात्रा के दौरान एक सकारात्मक और शांतिपूर्ण संदेश देखने को मिला। यह दृश्य ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनावों के बीच दोनों देशों के बीच मानवीय और धार्मिक स्तर पर सौहार्द की झलक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका बोला मीडिया से नहीं होगी ईरान वार्ता
ईरान के साथ बातचीत मीडिया के माध्यम से नहीं करेगा अमेरिका ने स्पष्ट किया है। व्हाइट हाउस की सहायक प्रेस सचिव ओलिविया वेल्स ने बताया कि यह एक अत्यंत संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा है और अमेरिका मीडिया के माध्यम से संवाद नहीं करेगा। व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिका एक मजबूत स्थिति में है और कोई भी समझौता अमेरिकी हितों का ध्यान रखकर ही होगा। प्रशासन ने दोहराया है कि ऐसा कोई समझौता नहीं होगा, जिससे ईरान परमाणु हथियार प्राप्त कर सके। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है कि वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों में परमाणु मुद्दे पर चर्चा शामिल नहीं होगी। यूएस नेवी के रिफ्यूलिंग ड्रोन MQ-25 की पहली परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी हुई है। अमेरिकी नौसेना के लिए बनाए जा रहे MQ-25 स्टिंगरे ड्रोन ने दो घंटे की उड़ान में टेकऑफ, हवा में उड़ान, लैंडिंग और कंट्रोल सिस्टम के आदेशों का पालन करने की क्षमता प्रदर्शित की। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ड्रोन ने रनवे पर चलने, सुरक्षित उड़ान भरने, निर्धारित मार्ग पर उड़ान भरने और सुरक्षित लैंडिंग करने जैसे कार्य सफलतापूर्वक किए। MQ-25 स्टिंगरे को अमेरिकी नौसेना के फाइटर विमानों को हवा में ईंधन प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इससे फाइटर जेट लंबे मिशन और अधिक समय तक ऑपरेशन में सक्षम हो सकेंगे। यह ड्रोन विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन और उड़ान के लिए डिजाइन किया गया है। इससे अमेरिकी नौसेना की समुद्री ताकत और मजबूत होगी। अमेरिकी नौसेना ने इसे नौसैनिक विमानन के नए युग की शुरुआत कहा है।
ईरान का अमेरिका को नया प्रस्ताव होर्मुज खोलने की शर्तें तय
ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया है कि यदि पहले युद्ध समाप्त किया जाए और दोबारा हमला न करने की गारंटी मिले, तो होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता बाद में होगी। पहले युद्ध और समुद्री मार्ग का मामला सुलझाना जरूरी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस तक पहुंच चुका है। ट्रम्प सोमवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक करेंगे और आगे की योजना बनाएंगे। व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह एक संवेदनशील कूटनीतिक मामला है और अमेरिका मीडिया के माध्यम से संवाद नहीं करेगा। प्रशासन ने दोहराया है कि ऐसा कोई समझौता नहीं होगा जिससे ईरान को परमाणु हथियार मिल सकें। पुतिन ने ईरान के समर्थन में कहा है कि रूस हर वो कदम उठाएगा, जो ईरान और पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद हो। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द से जल्द शांति बहाल करने की कोशिशें की जाएंगी। रूसी सरकारी मीडिया के अनुसार, पुतिन का बयान ईरान के प्रति रूस के स्पष्ट समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। मुश्किल वक्त में रूस हमारे साथ खड़ा अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात ने दुनिया को दिखा दिया है कि ईरान के दोस्त और सहयोगी कौन हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय रूस तेहरान के साथ मजबूती से खड़ा रहा और ईरान इसके लिए आभारी है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताते हुए कहा कि रूस और ईरान के बीच सहयोग आगे भी बढ़ेगा। हालात जैसे भी ईरान-रूस के संबंध और मजबूत होंगे पुतिन से मुलाकात के दौरान अराघची ने कहा कि हालात चाहे जैसे हों, ईरान और रूस के संबंध आगे और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सबसे ऊंचे स्तर की रणनीतिक साझेदारी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा युद्ध, क्षेत्रीय तनाव या अंतरराष्ट्रीय दबाव से रूस और ईरान की नजदीकी कम नहीं होगी। रूस और ईरान पहले से ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय मामलों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों ने पिछले साल दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी समझौता भी किया था।
पुतिन से मिले अराघची होर्मुज पर ईरान का बड़ा फैसला
ईरानी विदेश मंत्री और पुतिन की बैठक की तस्वीरें… मॉस्को में बैठक के दौरान अराघची और पुतिन ने एक-दूसरे का हाथ मिलाया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय चर्चा हुई। इस बैठक में पुतिन के साथ रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी उपस्थित रहे। ईरान होर्मुज की जिम्मेदारी सेना को सौंपने की योजना बना रहा है, इसके लिए नया कानून लाने के लिए तैयारी की जा रही है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सरकारी टीवी पर कहा कि इस प्रस्तावित कानून के अंतर्गत होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सेना के हाथ में होगा। अजीजी ने बताया कि इस कानून में इस मार्ग से होने वाली आय को ईरानी रियाल में प्राप्त करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना पहले से इस जलमार्ग पर निगरानी कर रही है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, साथ ही दुश्मन जहाजों की आवाजाही रोकने की तैयारी भी की जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट का महत्व वैश्विक समुद्री मार्गों में है। खाड़ी देशों से निकलने वाले अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी रास्ते से किया जाता है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार के तनाव से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर असर हो सकता है।
ईरान-रूस वार्ता और लेबनान में इजराइली हमले तेज
रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करने वाले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से चर्चा की। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की। मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस को विश्वास है कि ईरानी जनता मौजूदा कठिनाइयों का सामना करेगी और देश में स्थिरता आएगी। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA के अनुसार, पुतिन ने कहा कि रूस ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के हित में हर संभव प्रयास करेगा। सीजफायर के दौरान इजराइल ने लेबनान पर फिर से हमले शुरू किए। सीजफायर लागू होने के बावजूद, इजराइल ने लेबनान पर हमले जारी रखे हैं। इजरायली सेना ने सोमवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की है। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, हमले बेक्का वैली और दक्षिणी लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे हैं। इससे पहले रविवार को भी लेबनान में इजराइली बमबारी में 14 व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी। लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में दो बच्चे भी शामिल थे। यह 16 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद सबसे अधिक जानलेवा दिन था। अमेरिका की मध्यस्थता से एक 10 दिन का सीजफायर लागू हुआ, जिसे बाद में तीन सप्ताह के लिए बढ़ाया गया। जर्मन चांसलर ने कहा– ईरान के सामने अमेरिका बेइज्जत हो रहा है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि ईरान के सामने अमेरिका अपमानित हो रहा है और उसके पास स्पष्ट रणनीति नहीं है। मर्ज ने कहा कि ईरान बातचीत करने के बजाय बातचीत से बचने में माहिर है। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि इस्लामाबाद गए और बिना किसी परिणाम के लौटे। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस संकट से बाहर कैसे निकलेगा।
हिजबुल्ला की धमकी और ट्रम्प की ईरान बैठक
हिजबुल्ला ने इजराइल को आत्मघाती हमलों की फिर से शुरुआत करने की चेतावनी दी है। अलजजीरा को दिए गए बयान में संगठन के एक सैन्य नेता ने कहा कि हिजबुल्ला 1980 के दशक की रणनीति पर लौटकर आत्मघाती दस्तों को सक्रिय करेगा। उसने बताया कि इसका उद्देश्य इजराइल को कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों में स्थान स्थापित करने से रोकना है। नेता ने यह भी दावा किया कि पहले से तैयार योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावर तैनात किए गए हैं। उनके अनुसार, इन इकाइयों का लक्ष्य कब्जे वाले लेबनानी गांवों में इजराइली अधिकारी और सैनिक होंगे। ट्रम्प आज ईरान के मुद्दे पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। यह बैठक उस समय हो रही है जब ईरान के साथ वार्ता ठप है। ट्रम्प ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की पाकिस्तान यात्रा को रद्द कर दिया, जबकि दोनों को ईरान मुद्दे पर नई बातचीत के लिए भेजा जाना था। अब ट्रम्प अपनी टीम के साथ आगे का दिशा तय करेंगे। CNN के अनुसार, इसमें ईरान पर फिर से बमबारी शुरू करने का विकल्प भी शामिल हो सकता है। पिछले हफ्ते युद्धविराम के विस्तार के बाद हमले रोक दिए गए थे। हालांकि, ट्रम्प इस समय सचेत बने हुए हैं और वे सार्वजनिक रूप से युद्ध फिर से शुरू करने के संकेत नहीं दे रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान की तरफ से कोई संतोषजनक प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण बातचीत का अगला दौर टाल दिया गया। बाद में ईरान ने नया प्रस्ताव भेजा। अमेरिका अब भी यह नहीं जानता कि ईरान में वास्तविक निर्णय कौन ले रहा है और किस शर्त पर समझौता हो सकता है। इसी वजह से स्थिति अब भी जटिल बनी हुई है।
तेल कीमतें बढ़ेंगी, ईरान ने टैंकर पर फायरिंग की
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान- साल के अंत तक कच्चा तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इस वैश्विक निवेश बैंक ने कहा है कि मध्य पूर्व से सप्लाई में कमी और ईरान युद्ध इसका मुख्य कारण है। बैंक ने चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 90 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ा दिया है, जबकि पहले यह 80 डॉलर था। अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड का अनुमान 75 डॉलर से बढ़ाकर 83 डॉलर प्रति बैरल किया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40% की वृद्धि हो चुकी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। गोल्डमैन सैक्स ने बताया कि तेल कीमतों में वृद्धि, परिष्कृत उत्पादों की महंगाई, सप्लाई की कमी और बड़े बाजार झटके से आर्थिक जोखिम बढ़ सकते हैं। बैंक का मानना है कि खाड़ी देशों से तेल निर्यात जून के अंत तक सामान्य हो जाएगा, जबकि पहले यह मई के मध्य तक का अनुमान था। उत्पादन में सुधार में अधिक समय लग सकता है। अगर स्थिति और बिगड़ती है और सप्लाई जुलाई के अंत तक सामान्य होती है, तो चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकता है। ईरान ने टोगो झंडे वाले जहाज पर फायरिंग की, 12 भारतीय क्रू सदस्य थे। ईरानी कोस्ट गार्ड ने 25 अप्रैल को ओमान के शिनास आउटर पोर्ट के पास टोगो झंडे वाले केमिकल टैंकर MT सिरोन पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। जहाज पर 12 भारतीय नाविक थे, इस बात की पुष्टि भारत सरकार ने की है। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी खतरे का सामना नहीं करना पड़ा।
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. पजशकियान की सर्जरी और प्रतिबंध पर यूरोप की राय
ईरान ने राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की सर्जरी करते हुए एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्हें अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में जाते हुए दिखाया गया है। वीडियो को शेयर करते समय हैदराबाद में स्थित ईरान के मिशन के अकाउंट ने बताया कि राष्ट्रपति पजशकियान केवल राजनेता नहीं हैं, बल्कि उनका पेशा डॉक्टर है। इस सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, पजशकियान के पास 30 साल से अधिक का मेडिकल अनुभव है। वे कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी में विशेषज्ञ रहे हैं। जानकारी दी गई है कि उन्होंने हार्ट वाल्व रिपेयर और बच्चों के दिल की सर्जरी भी की है। पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वे तबरीज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में सर्जरी के प्रोफेसर रहे हैं। वीडियो में अमेरिका को संबोधित करते हुए लिखा गया, “प्रिय अमेरिकियों, आप ऑनलाइन डॉक्टर डायरेक्टरी में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. पजशकियान के नाम देख सकते हैं... “हम अलग हैं।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ईरान पर लागू प्रतिबंध फिलहाल नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि इस समय प्रतिबंधों को हटाने का निर्णय जल्दबाजी होगी। वॉन डेर लेयेन ने यह बयान जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कंजर्वेटिव CDU पार्टी और उसकी सहयोगी CSU पार्टी की मीटिंग में दिया। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान पर ये प्रतिबंध उसकी सरकार द्वारा अपनी जनता के दमन के चलते लगाए गए थे। वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध हटाने से पहले ईरान में बदलाव दिखाई देना चाहिए।
ईरान ने अमेरिका को कठोर संदेश दिया
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका की अत्यधिक मांगों के कारण पाकिस्तान में हो रही शांति वार्ता सफल नहीं हो पाई। रूस पहुंचकर उन्होंने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और क्षेत्रीय तनाव पर रूसी सहयोगियों से चर्चा की। अराघची ने बताया कि इस्लामाबाद में बातचीत में आगे की शर्तों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई, लेकिन फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान द्वारा बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही केवल ईरान का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है और इसमें ओमान के साथ उनकी सोच मिलती है। इसी बीच, तेहरान में फ्यूल स्टोरेज टैंक नष्ट होने से लगभग 8 करोड़ लीटर ईंधन बर्बाद हो गया, जिससे पानी, बिजली, गैस और ईंधन की खपत में कटौती की जा रही है और लोग अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग कर रहे हैं। ईरान का न्यूक्लियर और होर्मुज पर अनुबंध को अस्वीकार करना ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते को लेकर कठोर रुख अपनाया है। उसने स्पष्ट किया है कि न्यूक्लियर कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर कोई समझौता नहीं होगा। ईरान की आधिकारिक मीडिया के अनुसार, यह संदेश पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को भेजा गया है। ईरान ने इन दोनों मुद्दों को अपनी ‘रेड लाइन’ कहा है और कहा है कि इन पर किसी प्रकार का समझौता नहीं हो सकता। यह स्पष्ट किया गया कि यह कोई औपचारिक चर्चा नहीं है, बल्कि स्थिति को स्पष्ट करने की एक कूटनीतिक कोशिश है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस मामले में निर्धारित सीमाओं के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं।
ईरान प्रस्ताव से बाजार में उछाल
ईरान के होर्मुज खोलने के प्रस्ताव से बाजार में उछाल जैसे ही यह खबर आई कि ईरान ने अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलने का सुझाव दिया है, वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। एशिया की चिप निर्माण कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के शेयर लगभग 6% बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। इसके अलावा एशियाई तकनीकी कंपनियों का इंडेक्स भी अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। भारत में सेंसेक्स लगभग 500 अंकों की उछाल के साथ 77,200 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। निफ्टी में भी 150 अंकों की बढ़त है, जो 24,050 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस खबर के चलते यह चिंता कम हुई कि शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिशें बाधित हो गई हैं, जिससे बाजार में तेजी आई। इससे पहले एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए यह सुझाव दिया है। पुतिन से मिलने रूस पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने मॉस्को में एयरपोर्ट पर रूसी अधिकारियों से मुलाकात की। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं, जहां वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत करेंगे। अरागची ने कहा कि यह मौजूदा युद्ध और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा का महत्वपूर्ण मौका होगा। रूस पहुंचने से पहले अरागची पाकिस्तान गए थे, जहां उन्होंने अधिकारियों से चर्चा की कि किस स्थिति में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता आगे बढ़ सकती है। पाकिस्तान के बाद अरागची ओमान गए, जहां दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, समुद्री मार्ग और साझा हितों पर बातचीत हुई। इसके तुरंत बाद वे फिर से पाकिस्तान लौटे थे और पीएम शरीफ से मिले।
ईरान का नया प्रस्ताव और इजराइल का आयरन डोम
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका को नया प्रस्ताव दिया है। एक अमेरिकी अधिकारी और इस मामले से जुड़े दो सूत्रों के अनुसार, इस योजना में उल्लेख किया गया है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत बाद में की जाएगी। एक्सियोस ने यह जानकारी दी है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रयास ठप हो गए हैं और इस्लामाबाद में हाल में हुई बातचीत से भी कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं आया। इसके साथ ही, ईरान के भीतर भी मतभेद हैं, विशेष रूप से यह तय करने पर कि परमाणु मुद्दे पर कितनी रियायत दी जाए। नया प्रस्ताव इन मतभेदों को प्राथमिकता में रखते हुए पहले तत्काल संकट समाप्त करने पर केंद्रित है। इसका अर्थ है कि पहले युद्ध समाप्त करने और स्थिति को नियंत्रित करने पर बात होगी, जबकि परमाणु मुद्दा बाद में उठेगा। इससे जल्दी समझौता करने की कोशिश की जा रही है। इजराइल ने यूएई की सहायता के लिए आयरन डोम भेजा है। आयरन डोम इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम है। यह दुश्मन द्वारा दागे गए रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही रोककर नष्ट कर देता है। इजराइल ने हालिया ईरान संघर्ष के दौरान अपना उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम औ सैन्य कर्मियों को यूएई में तैनात किया था। यह जानकारी एक्सियोस में अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों का हवाला देते हुए दी गई है। यह तैनाती पहले सार्वजनिक रूप से बताई नहीं गई थी और युद्ध के आरंभिक चरण में की गई, जब यूएई पर ईरान की ओर से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे थे। इन हमलों का लक्ष्य खाड़ी क्षेत्र था।
चीन के ईरान की सहायता करने में कोई समस्या नहीं है, ट्रम्प ने कहा कि ईरान से संबंधित मामले में उन्हें चीन के खिलाफ ज्यादा शिकायत नहीं है। फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि चीन थोड़ी सहायता कर सकता है, लेकिन उसकी भूमिका बड़ी नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि जैसे अमेरिका अन्य देशों, जैसे यूक्रेन, की मदद करता है, वैसे ही अगर चीन कहीं मदद करता है तो उसे गलत नहीं मानते। पुतिन से आज मिलेेंगें ईरानी विदेश मंत्री ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को मॉस्को में व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। इस बैठक में अराघची रूसी अधिकारियों के साथ चल रही बातचीत, संभावित युद्ध विराम और वर्तमान स्थिति पर चर्चा करेंगे। साथ ही वे अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध समाप्ति पर चल रही बातचीत की एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेंगे। ईरानी संसद के स्पीकर बोले- आपूर्ति और मांग समान ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तेल बाजार और क्षेत्रीय वातावरण पर एक रहस्यमय पोस्ट की। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में किसी एक पक्ष की पूर्ण बढ़त नहीं है। तेल पाइपलाइन और ऊर्जा आपूर्ति जैसे कारक अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुए हैं, जबकि दूसरी तरफ रणनीतिक तेल भंडार से रिलीज और महंगाई के चलते मांग में कमी के उपाय पहले ही उठाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी इशारा किया कि भविष्य में तेल कीमतों में और परिवर्तन संभव हैं। साथ ही ‘समर वैकेशन’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो इसका प्रभाव आम लोगों की जीवनशैली, विशेषकर यात्रा और खपत पर पड़ सकता है।
अराघची की पाकिस्तान यात्रा और तेल कीमतों में उछाल
ईरानी विदेश मंत्री 24 घंटे में दूसरी बार पाकिस्तान क्यों गए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार शाम को एक बार फिर इस्लामाबाद पहुंचे। यह उनकी 24 घंटे के भीतर पाकिस्तान की दूसरी यात्रा है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी। इस दौरान ईरान ने अपनी चिंताओं और मांगों की एक सूची पाकिस्तान को सौंपी, जिसे आगे अमेरिका तक पहुंचाना था। लेकिन मामला तब अटक गया जब डोनाल्ड ट्रम्प के हस्तक्षेप के कारण अमेरिकी डेलिगेशन इस्लामाबाद के लिए रवाना नहीं हो सका। इस पर अराघची ने कहा कि अब यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तविक रूप से बातचीत के लिए गंभीर है या नहीं। इसके बाद अराघची ओमान गए, जहां लगभग 18 घंटे बिताए। वहां से लौटने से पहले उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन वार्ताओं में युद्ध समाप्त करने का एक प्रारंभिक खाका तैयार हुआ। अब अराघची एक बार फिर इस्लामाबाद लौट आए हैं, जहां वे फिर से असीम मुनीर और शहबाज शरीफ से मिले। आज अराघची रूस जाएंगे और राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। अमेरिका-ईरान वार्ता में बाधा आने से तेल कीमतों में उछाल अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में रुकावट और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में कमी के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 96 डॉलर से ऊपर चला गया। ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर (यूरोप के निकट) से निकाला जाने वाला तेल है। इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार का मानक माना जाता है, इसलिए अधिकांश देशों का तेल इसी के आधार पर मूल्य तय किया जाता है। WTI क्रूड, अर्थात् वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, वह तेल है जो अमेरिका में निकाला जाता है। यह हल्का और अधिक शुद्ध है।
ईरान को बातचीत करनी है तो सीधे फोन करे, ट्रम्प ने कहा है कि यदि ईरान वार्ता करना चाहता है, तो उसे अमेरिका से सीधा संपर्क करना चाहिए। फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ट्रम्प ने बताया कि ईरान चाहे तो अमेरिका आ सकता है या फोन करके बात कर सकता है, और सुरक्षित संवाद के लिए माध्यम मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को इस बात की जानकारी है कि किसी समझौते में क्या शर्तें होंगी और उसे परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही लड़ाई जल्द समाप्त होगी और इसका अंत अमेरिका की जीत के साथ होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ लोग समझदारी से काम कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान सही निर्णय लेगा।