मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक आर्थिक खबर सामने आई है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस समझौते पर सोमवार 27 अप्रैल को औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह समझौता नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में संपन्न होगा, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति बनने की संभावना है। इसे भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में कमी आने की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। विशेष रूप से कृषि उत्पादों, डेयरी आइटम्स और कुछ अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ता विकल्प भी बढ़ेंगे।
भारत और न्यूजीलैंड एफटीए: वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कई स्थानों पर युद्ध के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पिछले 4 साल से अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच टकराव जारी है। इन सभी तनावों के बीच भारत के लिए एक सुखद समाचार प्राप्त हुआ है। वास्तव में, भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत सफल हो गई है. दोनों देश इस एफटीए पर सोमवार, 27 अप्रैल को साइन करेंगे। यह उम्मीद की जा रही है कि इससे दोनों राष्ट्रों के बीच व्यापार को मजबूती मिलेगी और नए अवसर बनेंगे।
FTA से होगा बड़ा निवेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर कल औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह समझौता नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न होगा, जहां दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति बनने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, इस एफटीए को लेकर बातचीत पिछले वर्ष दिसंबर में पूरी हो चुकी थी। उसके बाद से दोनों देशों के बीच तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा था, जो अब लगभग पूरा हो चुका है।

इस समझौते का क्या लाभ होगा
सूचना मिल रही है कि इस से लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। इसके अतिरिक्त भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के निर्यात में भी सहायता प्राप्त होगी। नए समझौते के बाद न्यूज़ीलैंड भारत के करीब 95 प्रतिशत उत्पादों पर लागू टैरिफ को घटाएगा, जबकि कुछ पर पूर्ण रूप से समाप्त भी करेगा। इससे ऊन, कोयला, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। हालांकि, भारत ने किसानों के हित को देखते हुए डेयरी, खाद्य तेल, सब्जियों जैसी चीजों को इस समझौते से बाहर रखा है. दोनों देशों ने इस संधि के तहत अपने व्यापार को अगले पांच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
किसे सबसे ज्यादा लाभ होगा
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट देश के निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर लेकर आएगा। उन्होंने विशेष रूप से आगरा के चमड़ा उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समझौते से वहां के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि एफटीए के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे चमड़ा, जूते और अन्य संबंधित उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी। पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता केवल एक व्यापारिक डील नहीं है बल्कि यह भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।