जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की माननीय सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की मांग पर केंद्र सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। वांगचुक इस समय जोधपुर जेल में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत बंद हैं। सोमवार को हुई सुनवाई में माननीय शीर्ष अदालत ने मामला 15 दिसंबर तक स्थगित कर दिया।वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी “पूरी तरह अवैध, मनमानी और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन” है। आंगमो ने कहा कि वांगचुक पिछले 30 वर्षों से शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में काम कर रहे हैं, ऐसे व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाना अविश्वसनीय है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर केंद्र का विरोध
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने माननीय अदालत को बताया कि वांगचुक जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होना चाहते हैं।लेकिन केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यदि इस याचिका को मंजूरी दी गई, तो देशभर में सभी बंदियों को ऐसी सुविधा देनी पड़ेगी।माननीय अदालत केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांग चुकी है।24 नवंबर को केंद्र ने अतिरिक्त समय मांगा था।29 अक्टूबर को माननीय कोर्ट ने संशोधित याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था।अब माननीय कोर्ट की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
NSA के तहत हिरासत और हिंसा का मामला
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को NSA में गिरफ्तार किया गया था। दो दिन पहले लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे।जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए थे।सरकार ने वांगचुक पर माहौल को भड़काने आरोप लगाया था।जबकि वांगचुक के परिवार का दावा है कि उनका हिंसा से कोई संबंध नहीं है।वांगचुक ने खुद 24 सितंबर की हिंसा की कड़ी निंदा की थी और इसे लद्दाख के लिए “सबसे दुखद दिन” बताया था।NSA के तहत किसी भी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, हालांकि आदेश वापस भी लिया जा सकता है।










