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पारंपरिक परिधानों में सजीं महिलाएं, गिद्धे और लोकगीतों से गुलजार हुआ जीरकपुर का तीज समारोह

मॉनसून के आते ही पंजाब की धरती पर बहुत से त्योहार और उत्सव देखने को मिलते हैं। पंजाब की धरती पहले से ही अपने त्योहारों, उत्सवों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती है। भारत एक विविधता वाला देश है, जहां विभिन्न धर्मों और आस्थाओं को मानने वाले लोग रहते हैं। यहां मनाए जाने वाले कई त्योहार सदियों से चली आ रही परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा हैं।

इन्हीं त्योहारों में से एक है तीज का त्योहार जिसे पंजाबी में तीयां भी कहा जाता है। पंजाब में यह त्योहार बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, नए कपड़े पहनती हैं और अपनी सहेलियों के साथ मिलकर इस त्योहार का आनंद लेती हैं। विवाहित महिलाएं भी अपने मायके आती हैं और अपनी सहेलियों व परिवार के साथ तीज का त्योहार मनाती हैं।

खास बात यह है कि तीज का त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं को समर्पित होता है। महिलाओं की मौजूदगी से इस त्योहार की रौनक और भी बढ़ जाती है। कई जगहों पर स्थानीय प्रशासन की ओर से भी तीज के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में महिलाओं के लिए विभिन्न गतिविधियां, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं और पंजाबी लोकगीतों व गिद्धे के माध्यम से अपनी संस्कृति की झलक पेश करती हैं।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जीरकपुर में भी सावन के महीने में तीज का त्योहार धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक गीतों, गिद्धे तथा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से तीज की खुशियां मनाईं। इस दौरान पूरे कार्यक्रम में पंजाबी संस्कृति और परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन एमसी बबीता सागवान और नवीन सागवान द्वारा किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता सरदार गुरदर्शन सिंह सैनी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और पंजाबी विरासत से जुड़े गीतों, गिद्धा तथा पारंपरिक परिधानों के माध्यम से तीज की खुशियां मनाईं। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

मुख्य अतिथि सरदार गुरदर्शन सिंह सैनी ने सभी महिलाओं और क्षेत्रवासियों को तीज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीज हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी लोक परंपराओं और त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाना चाहिए, ताकि समाज में भाईचारे और आपसी प्रेम की भावना मजबूत हो।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों की ओर से मुख्य अतिथि गुरदर्शन सिंह सैनी, जिला ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सैनी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। समारोह में इलाके के कई गणमान्य लोग और भाजपा नेता भी मौजूद रहे।

इस तरह के त्योहारों का आज के दौर में मनाया जाना और आयोजित होना बहुत जरूरी है। इससे हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं को जानने-समझने का अवसर मिलता है। उन्हें यह पता चलता है कि हमारे पूर्वज किस तरह रहते थे और अपनी खुशियों को किस तरह त्योहारों और उत्सवों के माध्यम से मनाया करते थे।

हमारी संस्कृति बहुत समृद्ध है, जो हमें हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली है। इस विरासत को संजोकर रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी के लिए गर्व की बात होनी चाहिए। ऐसे त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम करते हैं।

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