पंजाबी और बॉलीवुड गायक दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ऑरा वर्ल्ड टूर के तहत अमेरिका में परफॉर्म कर रहे हैं। इसी दौरान कैलगरी में आयोजित एक शो में एक विवादित स्थिति देखने को मिली, जब कुछ दर्शकों द्वारा खालिस्तान समर्थित पोस्टर दिखाए जाने पर माहौल गरमा गया। इस घटना के बाद दिलजीत ने मंच से कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे यह शो चर्चा में आ गया। शो के दौरान जब कुछ लोगों ने खालिस्तानी समर्थन वाले पोस्टर दिखाए, तो दिलजीत दोसांझ ने मंच से उन्हें सख्त शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की हरकत कर रहे हैं, वे या तो शो छोड़ दें या फिर बाहर जाने के लिए तैयार रहें। उनके इस बयान के बाद वहां मौजूद दर्शकों में भी हलचल देखने को मिली। दिलजीत ने अपनी प्रतिक्रिया में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के अंदाज की झलक दिखाते हुए मंच पर भावनात्मक और आक्रामक अंदाज में बात की। उन्होंने कहा कि जो लोग केवल विरोध करने आते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि असली काम क्या होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आलोचना कर रहे हैं, उन्होंने पंजाब के लिए क्या योगदान दिया है, यह भी देखना चाहिए। गायक ने आगे अपने सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में आई बाढ़ के समय लोगों की मदद की और जरूरतमंदों के घर बनाने में योगदान दिया। दिलजीत ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल संगीत या मनोरंजन नहीं है, बल्कि समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना भी है।
इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए एक टीवी शो का उल्लेख किया और कहा कि उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त पहचान नहीं मिली थी। इसी कारण उन्होंने उस मंच का उपयोग पंजाब के मुद्दों को उठाने और सहायता जुटाने के लिए किया, न कि किसी निजी प्रचार के लिए। दिलजीत दोसांझ ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान एक अन्य कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वहां भी केवल संगीत या फिल्म प्रचार नहीं किया, बल्कि पंजाब से जुड़े ऐतिहासिक मुद्दों जैसे कामागाटामारू घटना पर भी बात की। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य हमेशा अपने समुदाय और उसकी विरासत को दुनिया के सामने रखना रहा है। यह घटना सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां कुछ लोग दिलजीत के रुख को समर्थन दे रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे विवादित भी मान रहे हैं। यह पूरा मामला अब केवल एक संगीत कार्यक्रम तक सीमित न रहकर एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
दिलजीत ने एक लाइव इवेंट में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साझा की…
पंजाबी और बॉलीवुड गायक दिलजीत दोसांझ ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया कि वे हमेशा अपने मंच का उपयोग पंजाब के मुद्दों को उठाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय मीडिया ने उन्हें अवसर दिया, उन्होंने उस मंच का उपयोग केवल अपने काम या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि पंजाब की समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को पूरे देश तक पहुंचाने के लिए किया। उनके अनुसार, यह उनके लिए एक जिम्मेदारी है, जिसे वे गंभीरता से निभाते हैं। दिलजीत ने यह भी कहा कि वे किसी भी तरह के विरोध से डरते नहीं हैं। उनका मानना है कि अगर कोई उनके पंजाब के मुद्दे उठाने के कारण विरोध करना चाहता है, तो वह स्वतंत्र है। उन्होंने साफ कहा कि वे ऐसे विरोध का स्वागत करते हैं और इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है।


उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी को उनके विचारों या पंजाब के प्रति उनके प्रेम के कारण विरोध करना है, तो वे खुशी-खुशी ऐसा कर सकते हैं। उनका कहना था कि वे इस तरह की आलोचना या विरोध के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं। दिलजीत के अनुसार, सच्चे कलाकार को हर तरह की प्रतिक्रिया का सामना करने की क्षमता होनी चाहिए। एक अन्य बयान में उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनके विचारों के खिलाफ झंडे लहराने हैं, तो वे यह काम रोज भी कर सकते हैं। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके अनुसार, यह सब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, और वे इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा अपने काम और अपने दर्शकों के प्रति ईमानदारी है। दिलजीत दोसांझ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कॉन्सर्ट में सभी उम्र के लोग—बच्चे, युवा और बुजुर्ग—शामिल होते हैं। इसलिए वे यह सुनिश्चित करते हैं कि वहां का माहौल सुरक्षित और सकारात्मक बना रहे। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शो के दौरान माहौल खराब करने या हंगामा करने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर निकाल दिया जाएगा।
पंजाबी और बॉलीवुड गायक दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में अपने सरे (Canada) में हुए शो के दौरान हुए एक विवाद का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कहा कि वे अपने मंच पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या रुकावट को बिल्कुल भी सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को खुश करना नहीं, बल्कि अपने दर्शकों और अनुयायियों को एक सकारात्मक और सुरक्षित अनुभव देना है। दिलजीत ने मंच से यह भी कहा कि उनके कॉन्सर्ट का माहौल हमेशा अनुशासन और शांति पर आधारित होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति शो के दौरान हंगामा करता है या कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर किया जाएगा। उनके अनुसार, लाइव शो में आने वाले सभी दर्शक एक परिवार की तरह होते हैं, और उनकी सुरक्षा और अनुभव सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका काम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने दर्शकों से एक भावनात्मक जुड़ाव भी रखते हैं। इसलिए वे नहीं चाहते कि किसी एक व्यक्ति की वजह से हजारों लोगों का अनुभव खराब हो। उनका कहना था कि वे अपने शो में अनुशासन बनाए रखने के लिए हमेशा सख्त कदम उठाने के लिए तैयार हैं। दिलजीत दोसांझ पहले भी कई विवादों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। 2025 में एक बड़ा विवाद तब सामने आया जब वे टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति के सेट पर पहुंचे और उन्होंने अमिताभ बच्चन के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। इस मामले में आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस और इसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उनकी आलोचना की थी। आरोप लगाया गया कि दिलजीत ने उन व्यक्तियों का सम्मान किया, जिनका नाम 1984 के सिख दंगों से जुड़े विवादों में पहले भी सामने आता रहा है। इस घटना के बाद से पन्नू ने दिलजीत को लगातार निशाना बनाना शुरू कर दिया।
पंजाबी और बॉलीवुड गायक दिलजीत दोसांझ 2025 के अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए। उन पर कुछ चरमपंथी समूहों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाते हुए यह आरोप लगाया कि वे “भारत का पोस्टर बॉय” बनकर काम कर रहे हैं और उनकी छवि का उपयोग राजनीतिक रूप से किया जा रहा है। इन संगठनों ने दावा किया कि दिलजीत दोसांझ भारत सरकार के प्रतिनिधि की तरह काम कर रहे हैं और उन्हें “भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थक” बताया गया। आरोपों में यह भी कहा गया कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता का इस्तेमाल विदेशों में भारत सरकार की छवि को मजबूत करने और सिख समुदाय के बीच केंद्र सरकार की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। इन आरोपों के बीच कुछ कार्यक्रमों में दिलजीत दोसांझ द्वारा भारतीय तिरंगा लहराने का मुद्दा भी चर्चा में आया। उनके इस कदम को लेकर विवाद और तेज हो गया, क्योंकि कुछ खालिस्तान समर्थक समूहों ने इसे “सिख विरोधी” कार्रवाई करार दिया। उनका तर्क था कि एक कलाकार को केवल अपनी पंजाबी पहचान को बढ़ावा देना चाहिए, न कि भारतीय राष्ट्रवाद से जुड़ी भावनाओं को। दिलजीत दोसांझ ने हमेशा अपने सार्वजनिक बयानों में यह स्पष्ट किया है कि वे किसी भी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं हैं। उनका कहना रहा है कि वे एक कलाकार हैं और उनका उद्देश्य संगीत, संस्कृति और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाना है, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करना। इस पूरे विवाद के बीच उनके समर्थकों का मानना है कि एक कलाकार के रूप में उनका कर्तव्य है कि वे अपनी जड़ों के साथ-साथ उस देश का सम्मान भी करें, जहां से वे आते हैं। उनका तर्क है कि तिरंगा लहराना किसी राजनीतिक बयान से अधिक एक सम्मान और गर्व की भावना है, जिसे गलत तरीके से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।










