इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रोस्टेट कैंसर से संक्रमित होने की खबर ने पुरुषों के लिए इस बीमारी की गंभीरता को उजागर किया है। प्रोस्टेट कैंसर अक्सर शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता, इसलिए 50 वर्ष से ऊपर के पुरुषों के लिए नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। समय पर PSA ब्लड टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जाम कराने से कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचानकर इलाज आसान और प्रभावी बन सकता है। इसके साथ ही स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और धूम्रपान न करने जैसी सावधानियां जोखिम को कम करने में मदद करती हैं।
एक वैश्विक खबर और एक बड़ा सबक
हाल ही में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित होने की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। दुनिया के सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली नेताओं में से एक का इस बीमारी की चपेट में आना यह साबित करता है कि कैंसर किसी पद या कद को नहीं देखता। यह बीमारी एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह शरीर में पनपती है और अक्सर तब सामने आती है जब मामला गंभीर हो चुका होता है। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है; आंकड़े बताते हैं कि अगले 15-20 वर्षों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले दोगुने हो सकते हैं। आज के इस लेख में हम समझेंगे कि आखिर यह बीमारी क्या है और इससे बचाव के रास्ते क्या हैं।
क्या है प्रोस्टेट कैंसर और यह क्यों है पुरुषों के लिए खतरा?
प्रोस्टेट केवल पुरुषों में पाई जाने वाली अखरोट के आकार की एक छोटी ग्रंथि है, जो ब्लैडर (मूत्राशय) के ठीक नीचे होती है। इसका मुख्य कार्य प्रजनन के लिए जरूरी तरल पदार्थ बनाना है। जब इस ग्रंथि की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह कैंसर का रूप ले लेती हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य यूरिन इन्फेक्शन जैसे लगते हैं, जिसके कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। बढ़ती उम्र, खराब जीवनशैली और आनुवंशिक कारण इसके जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।

शुरुआती संकेतों को पहचानें: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे नजरअंदाज?
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं। यदि आपको रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या हो रही है, या पेशाब की धार कमजोर महसूस होती है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। इसके अलावा, पेशाब शुरू करने में कठिनाई होना, जलन महसूस होना या ऐसा लगना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, प्रोस्टेट ग्रंथि में बढ़ते दबाव के संकेत हैं। यदि स्थिति एडवांस स्टेज पर पहुँच जाए, तो वीर्य या पेशाब में खून आना और हड्डियों (खासकर कमर और कूल्हे) में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसे समय में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
बचाव का सबसे मजबूत हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि 50 साल की उम्र पार करने के बाद हर पुरुष को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसके लिए मुख्य रूप से दो टेस्ट होते हैं: PSA ब्लड टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE)। एक शोध के अनुसार, जो लोग समय पर स्क्रीनिंग नहीं कराते, उनमें मृत्यु का जोखिम 45% तक बढ़ जाता है। शुरुआती पहचान का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कैंसर को शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से पहले ही रोका जा सकता है, जिससे इलाज की सफलता दर काफी बढ़ जाती है।
सतर्कता और जीवनशैली में बदलाव: 7 जरूरी सावधानियांmenshealth
हालांकि कैंसर को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन सही आदतों से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। अपनी डाइट में फल, सब्जियां और साबुत अनाज को शामिल करें और रेड मीट व प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। वजन को नियंत्रित रखना और रोजाना कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज करना प्रोस्टेट हेल्थ के लिए अनिवार्य है। साथ ही, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद कर दें। याद रखें, जागरूकता ही इस बीमारी के खिलाफ आपका सबसे बड़ा कवच है। यदि आपके परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही है, तो आपको और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।










