मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच जारी टकराव अब 11वें दिन में पहुंच गया है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने मिलकर ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़े तेल भंडार को निशाना बनाया। यह हमला तेहरान के पास किया गया। हमले के बाद इलाके में आग और धुएं के बड़े गुबार देखे गए। इजरायली सेना का दावा है कि यह हमला उन ऊर्जा ठिकानों पर किया गया था जिनका इस्तेमाल ईरानी सेना युद्ध से जुड़ी गतिविधियों के लिए कर रही थी।

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस कार्रवाई पर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ यह एक जरूरी सैन्य कार्रवाई है। उनके अनुसार दुनिया में फिलहाल तेल की कमी नहीं है और अगर कीमतें बढ़ती भी हैं तो यह असर ज्यादा समय तक नहीं रहेगा।
दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें Bahrain, Kuwait और Saudi Arabia शामिल हैं। ईरान का कहना है कि जो भी देश अमेरिका या इजरायल की मदद करेगा, उसे भी जवाब दिया जाएगा।
ईरान ने एक और बड़ी चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने Strait of Hormuz पर कब्जा करने की कोशिश की तो वह तेल के निर्यात को रोक सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इस तनाव के बीच Iraq में भी एक बड़ा हमला हुआ है। किरकुक के पास एक एयरस्ट्राइक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकाने को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में चार लड़ाके मारे गए और करीब 12 लोग घायल हुए हैं।
तनाव बढ़ने के बाद Doha में स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दूतावास ने कहा है कि जो अमेरिकी नागरिक मिडिल ईस्ट छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि जब तक ईरान पर हमले होते रहेंगे, तब तक जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह तनाव अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।