Ram Mandir ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड पर प्रक्रिया जारी

Ayodhya में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मामला ट्रस्ट के दान, आय-व्यय और संपत्ति से संबंधित जानकारी के अनुरोध से जुड़ा बताया जा रहा है। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन और दान संग्रह से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इसके बाद PMO की ओर से प्राप्त पत्र को जिला प्रशासन को भेजा गया, जिसके तहत प्रशासन ने संबंधित ट्रस्ट से संपर्क कर आवश्यक विवरण मांगा। यह जानकारी बैंक खातों, दान, जमीन के लेन-देन और अन्य वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी थी। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि वर्तमान में इस विषय से जुड़ी एक जांच प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण विस्तृत वित्तीय जानकारी साझा करना संभव नहीं है। यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया और जांच से जुड़ा हुआ है, जिसमें संबंधित पक्षों से दस्तावेज और रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर तय की जाएगी।

बीजेपी नेता ने पीएमओ से की शिकायत

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर स्थानीय स्तर पर एक मामला सामने आया है। इसमें ट्रस्ट के दान और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र भेजा था। पहला पत्र उन्होंने 9 जून को लिखा, जिसमें मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति विवरण को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इसके बाद 12 जून को उन्होंने एक और पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने दोबारा चढ़ावे और दान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का अनुरोध किया। दोनों पत्रों में ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन पत्रों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई और संबंधित मामले की जांच के लिए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। यह पूरा मामला जांच प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है और संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों और सूचनाओं की समीक्षा की जा रही है।

पीएमओ ने मांगा ट्रस्ट के चंदे का हिसाब

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर प्राप्त शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचने के बाद संबंधित विभागों को भेजा गया पीएमओ को मिली शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को संदर्भित किया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क साधा। इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी मांगी गई, जिसमें दान, चंदा और अन्य संबंधित रिकॉर्ड शामिल थे। 23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को एक पत्र भेजा गया। इस पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने उल्लेख किया कि उन्होंने इस मामले में ट्रस्ट के प्रतिनिधि चंपत राय से संपर्क किया था। यह पूरा मामला प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है और संबंधित विभागों द्वारा आगे की आवश्यक औपचारिकताओं और दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।

चंपत राय ने नहीं दिया चंदे का हिसाब

अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी के अनुसार, चंपत राय ने यह कहते हुए किसी भी जानकारी को देने से इनकार कर दिया कि वर्तमान में एसआईटी जांच चल रही है और जांच पैनल सभी जरूरी रिकॉर्ड और जानकारी जमा कर रहा है। इसलिए अभी मांगी गई जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती. बीजेपी के नेता रजनीश सिंह द्वारा पीएमओ को भेजी गई शिकायत में कई जानकारियों को उजागर करने की मांग की गई थी। इनमें ‘समर्पण निधि’ अभियान से एकत्रित धन, विभिन्न तरीकों से प्राप्त दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में योगदान, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन, संपत्ति की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन के खर्च, तथा ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं। शिकायत को ध्यान में रखकर PMO ने संबंधित पत्र जिला प्रशासन को भेजा था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने ट्रस्ट से संपर्क कर आवश्यक जानकारी मांगी थी। ट्रस्ट के प्रतिनिधियों से दान, चंदा, बैंक खातों और संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड के बारे में जानकारी साझा करने का अनुरोध किया गया था। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि वर्तमान में इस विषय पर जांच प्रक्रिया चल रही है, जिससे विस्तृत जानकारी साझा करना संभव नहीं है।
ट्रस्ट से जुड़े एक प्रतिनिधि ने प्रशासन को सूचित किया कि संबंधित जांच पैनल के स्तर पर रिकॉर्ड और दस्तावेजों की समीक्षा जांच पूरी होने तक की जा रही है। इस मामले में वित्तीय गतिविधियों से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए विशेष जांच प्रक्रिया पहले से चल रही है। प्रशासन का कहना है कि आगे की प्रक्रिया संबंधित विभागों से प्राप्त रिपोर्ट और पत्राचार के आधार पर निर्धारित की जाएगी। वित्तीय विवरणों में समर्पण निधि अभियान, दान स्वरूप प्राप्त धन, सोना-चांदी और अन्य वस्तुएं, बैंक खातों का रिकॉर्ड और जमीन से जुड़ी लेन-देन शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा, मंदिर निर्माण कार्यों पर हुए खर्च और अन्य प्रशासनिक व्यय से संबंधित जानकारी भी मांगी गई थी। यह मामला जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है और संबंधित पक्षों से आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।
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