डीएनए की संरचना (Structure of DNA) की खोज के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स ड्वाइट वॉटसन का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 20वीं सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक के रूप में याद किया जाता है।
वॉटसन ने 1953 में ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की पहचान की थी। इस खोज ने आधुनिक जैवविज्ञान और जेनेटिक्स के क्षेत्र में क्रांति ला दी और उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
- जेम्स वॉटसन को डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना खोजने के लिए जाना जाता है।
- उनकी खोज ने जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और चिकित्सा विज्ञान में नए युग की शुरुआत की।
- नोबेल पुरस्कार विजेता वॉटसन का योगदान आधुनिक विज्ञान के इतिहास में अमूल्य माना जाता है।
विवादास्पद बयानों ने दी चुनौती
हालांकि, वॉटसन का करियर विवादों से भी जुड़ा रहा। उन्होंने नस्ल और लिंग के मुद्दों पर कई विवादास्पद बयान दिए, जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा। उदाहरण के लिए, उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में यह टिप्पणी की थी कि जीन (genes) काले और गोरे लोगों के आईक्यू परीक्षणों में अंतर का कारण हो सकते हैं। इन बयानों के बाद वैज्ञानिक समुदाय ने उनसे दूरी बना ली, और उन्होंने अपने नोबेल पदक को भी बेच दिया था।
जेम्स वॉटसन का योगदान विज्ञान के क्षेत्र में अनमोल है, विशेषकर डीएनए की संरचना की खोज के लिए। हालांकि उनके विवादास्पद विचारों ने उनकी प्रतिष्ठा पर छाया डाली, लेकिन उनकी खोज ने दुनिया को आधुनिक जेनेटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी की दिशा में नई राह दिखाई।
