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Canada में सिख बुजुर्ग से बदसलूकी पर बवाल, पंजाबी समुदाय में आक्रोश

Canada में एक बुजुर्ग सिख व्यक्ति के साथ हुई कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद स्थानीय समुदाय में भारी रोष देखने को मिला। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति ने बुजुर्ग सिख के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की, जिसके बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ पंजाबी युवकों ने आरोपी व्यक्ति को पकड़ लिया और उससे सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाई। इस दौरान उसे घुटनों के बल बैठाकर अपनी गलती स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया। घटना का यह हिस्सा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब आरोपी ने बुजुर्ग सिख को कथित रूप से अपमानित करते हुए धक्का देकर “इंडिया जाने” जैसी आपत्तिजनक बातें कही थीं। इस व्यवहार से स्थानीय सिख समुदाय में आक्रोश फैल गया और उन्होंने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया। फिलहाल स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों से बयान दर्ज किए जा रहे हैं। समुदाय के लोगों ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है, साथ ही ऐसे मामलों में कानून को अपना काम करने देने की बात कही है।

Canada में बुजुर्ग पंजाबी को धक्का मारने और देश से निकलने की बात कहने वाले युवक ने अब घुटनों के बल बैठकर माफी मांगी है। 25 अप्रैल को बुजुर्ग को पीटा गया था, जिसका पता जैसे ही इंडियन कम्युनिटी के युवकों को चला तो वो उसे ढूंढते हुए उसके घर जा पहुंचे। 26 अप्रैल शाम को युवक को ढूंढने के बाद उसे माफी मांगने के लिए कहा गया। कनाडाई युवक ने कहा कि वह घटना के लिए माफी मांगता है। उसे दुख है कि उसने एक बुजुर्ग के साथ इस तरह का व्यवहार किया है। जैसे ही भारतीय मूल के युवा आरोपी के घर पहुंचे तो उसने हाथ उठाकर माफ करने के लिए कहा। दरअसल, बुडस्टाक एरिया में 25 अप्रैल को मास्क कनाडाई युवक ने बुजुर्ग पर नस्लीय टिप्पणियां की थी। इस घटना को देख वहां मौजूद दूसरे लोगों ने तुरंत पुलिस को कॉल कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को जमीन पर गिराकर अरेस्ट कर लिया है।

पहले जानिए कैसे माफी मांगने को मजबूर किया..

घटना के बाद भारतीय पंजाबी समुदाय के युवाओं ने सोशल मीडिया पर एकजुटता बनाए रखने और शांति की अपील की। युवकों ने कहा कि ये सही नहीं है। हम कनाडा के अब नागरिक बन चुके हैं। यहां पर मूल रूप से रहने वाले लोग उनके साथ और उनके बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यावहार नहीं कर सकते। हमारी एकता ही इनको रोक सकती है। नहीं तो ये एक के बाद एक ऐसी घटना को अंजाम देंगे। एकता की अपील के बाद करीब 10 कनाडा में जन्मे भारतीय मूल के युवकों ने आरोपी की पहचान कर उसके घर तक पहुंचकर स्थिति को समझा। आरोप को 2 दिन के अंदर खोज निकाला और एड्रेस पता कर उसके घर पर जा पहुंचे। यहां पहले एक युवक ने उसे बाहर बुलाया। उसके साथ बात की और कहा कि तुमने जो किया है उसके लिए माफी मांग लो। इसके बाद आरोपी युवक ने कहा कि उसे खेल है कि उसने बुजुर्ग को गलत बोला। आरोपी युवक ने माफी मांगी ली।

युवक ने अपने घर के बाहर मास्क और ब्लैक हुडी पहने करीब 10 लोगों को आते देख तनाव बढ़ने से पहले ही हाथ खड़े कर दिया और स्थिति शांत कर दी। भारतीय मूल के युवकों ने पूछा कि क्या तुम माफी मांगोगे, तो इस पर आरोपी ने कहा कि वह माफी मांगता है। इसके बाद युवकों ने कहा कि घुटनों के बल बैठकर माफी मांगों। इसके बाद आरोपी युवक घुटनों के बल बैठता है और कहता है कि मुझे माफी कर दो।

दोबारा झगड़ा होते-होते बचा

इस दौरान आरोपी युवक की मां भी मौके पर पहुंच गई और स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए उसने अपने बेटे को वहां से हटाया। उसने भारतीय युवकों से भी वहां से चले जाने को कहा ताकि माहौल और न बिगड़े। इसी बीच जब आरोपी युवक और उसकी मां अपने घर के गैराज का शटर बंद कर रहे थे, तभी मौजूद एक भारतीय युवक ने आरोपी को “स्टूपिड” कह दिया, जिससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इस टिप्पणी से नाराज़ होकर आरोपी युवक बाहर आया और गुस्से में युवकों से वहां से चले जाने को कहा। दोनों पक्षों के बीच कुछ देर के लिए बहस और तनातनी की स्थिति बन गई। हालांकि बाद में आरोपी ने स्थिति को संभालते हुए सभी से अपनी प्रॉपर्टी से बाहर जाने को कहा और अपनी मां के साथ अंदर जाकर शटर बंद कर लिया, जिसके बाद मामला कुछ हद तक शांत हुआ |

अब जानिए क्या है पूरा मामला

कनाडा के वुडस्टॉक में 25 अप्रैल को एक स्थानीय युवक द्वारा एक पंजाबी बुजुर्ग को कथित तौर पर धक्का दिए जाने की घटना सामने आई। उसने बुजुर्ग को कनाडा से पंजाब जाने को कहा। उसने ये भी कहा कि तुम मेरे देश में क्या कर रहे हो। जिस समय घटना हुई, बुजुर्ग अपने घर के बाहर टहल रहे थे और उसी दौरान युवक ने उनके साथ कथित बदतमीजी की। इसका वीडियो भी सामने आया था, जिसमें आरोपी युवक ने मास्क लगा रखा था। वह बुजुर्ग पर नस्लीय टिप्पणियां करता हुआ दिख रहा।

वुडस्टॉक पुलिस ने बताया कि आरोपी युवक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है, जबकि बुजुर्ग की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोपी और पंजाबी बुजुर्ग की पुलिस ने पहचान उजागर नहीं की है। पुलिस का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, कनाडा के कानून अनुसार पहचान नहीं बताई जा सकती। बुजुर्ग के परिवार की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया। हालांकि लोगों ने पुलिस के तुरंत एक्शन पर शुक्रिया अदा किया है। घटना के बाद वुडस्टॉक पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी युवक को हिरासत में लिया, लेकिन उसे नाबालिग मानते हुए बाद में छोड़ दिया गया। उससे पूछताछ की गई और बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि अभी युवक माइनर है। इसके चलते उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता। युवक ने माना है कि उससे गलती हो गई और फ्यूचर में वह हेट स्पीच नहीं करेगा।

कनाडा में पंजाबियों के खिलाफ बढ़ रही हेट स्पीच

पंजाबियों के प्रति हेट क्राइम के मामले बढ़ रहे हैं। इसी के चलते 25 अप्रैल को वुडस्टाक एरिया में एक लोकल युवक ने पंजाबी बुजुर्ग को धक्के मार दिए थे। उसने बुजुर्ग को कनाडा से पंजाब जाने को कहा। उसने ये भी कहा कि तुम मेरे देश में क्या कर रहे हो। जिस वक्त युवक ने बुजुर्ग के साथ बदतमीजी की, वह घर के बाहर घूम रहे थे। इसका वीडियो भी सामने आया है। जिसमें आरोपी युवक ने मास्क लगा रखा है। वह बुजुर्ग पर नस्लीय टिप्पणियां करता हुआ दिख रहा है। इस घटना को देख वहां मौजूद दूसरे लोगों ने तुरंत पुलिस को कॉल कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को जमीन पर गिराकर अरेस्ट कर लिया गया था।

कनाडा में रह रहे 9 लाख के करीब पंजाबी

बता दें कि कनाडा की कुल आबादी का लगभग 2.1% हिस्सा सिखों का है। ये करीब 9 लाख बनता है। कनाडाई पंजाबियों में लगभग 81.4 फीसदी सिख, 6.9 फीसदी हिंदू और 6.8 फीसदी मुस्लिम हैं। कनाडा में अंग्रेजी और फ्रेंच के बाद पंजाबी तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। अगर बात ब्रैम्पटन की करें तो यहां पर लगभग 1 लाख 44 हजार के लगभग पंजाबी लोग हैं। यह शहर की कुल आबादी का लगभग 22 फीसदी हिस्सा है। कनाडा की जनगणना 2021 के अनुसार इस वक्त यहां 60 से 70 के करीब पंजाबी परिवार रह रहे हैं।

5 साल में कनाडा में हेट स्पीच बढ़ी

20 अप्रैल 2026 को वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन (WSO) ने कनाडा में सिख समुदाय के खिलाफ नफरत से जुड़ी अपनी पहली रिपोर्ट जारी की, जिसमें गंभीर मामलों का उल्लेख किया गया।इसके अनुसार 80 फीसदी सिखों का मानना है कि पिछले 5 वर्षों में उनके खिलाफ नफरत बढ़ी है। 65 फीसदी सिखों ने हाल के महीनों में नस्लीय टिप्पणियों का सामना करने की बात कही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पंजाबी छात्रों और प्रवासियों के खिलाफ नस्लीय मीम्स और अपमानजनक टिप्पणियों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेष रूप से इमीग्रेशन नीतियों में बदलाव के बाद। ऑनलाइन हेट स्पीच में पंजाबियों को कनाडा के संसाधनों पर बोझ बताकर नफरत फैलाई जा रही है, जिससे समुदाय में असुरक्षा का माहौल है।

पगड़ी पहनने वाले अधिकांश सिखों को उनकी धार्मिक पहचान के कारण सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अप्रैल में ओंटारियो और ब्रिटिश कोलंबिया में ऐसी कई घटनाएं दर्ज की गईं जहां सिखों को उनके पहनावे के कारण विदेशी कहकर निशाना बनाया गया। अप्रैल 2026 में कनाडा द्वारा शरण नियम सख्त करने और डिपोर्टेशन की आशंकाओं के बीच स्थानीय स्तर पर पंजाबी समुदाय के खिलाफ नफरत भरी बयानबाजी में वृद्धि देखी गई है। सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पंजाबी छात्रों को वापस जाओ जैसे नारों और नफरत भरे भाषणों का सामना करना पड़ रहा है।

कनाडा में पंजाबियों का क्या है योगदान

 कनाडा की अर्थव्यवस्था में पंजाबी समुदाय की अहम भूमिका है, जिसमें ट्रकिंग उद्योग में उनकी लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है। वे कनाडा की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। इसके अलावा कनाडा में लगभग 2 लाख से अधिक व्यवसाय पंजाबियों के हाथ में हैं, जो स्थानीय स्तर पर हजारों नौकरियां पैदा करते हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के एबॉट्सफोर्ड जैसे क्षेत्रों में ब्लूबेरी खेती में पंजाबी समुदाय की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है।पंजाबी किसानों ने यहां की बंजर जमीनों को उपजाऊ बनाकर कनाडा को कृषि निर्यात में वैश्विक पहचान दिलाने में मदद की है।

कनाडा की राजनीति में पंजाबी समुदाय सक्रिय भूमिका निभा रहा है और हाउस ऑफ कॉमन्स में उनका प्रतिनिधित्व उनकी आबादी के अनुपात से अधिक माना जाता है। वर्तमान में लगभग 15 से 18 पंजाबी सांसद कनाडा की नीतियों को आकार दे रहे हैं। हरजीत सिंह सज्जन और अनीता आनंद जैसे नेताओं ने राष्ट्रीय रक्षा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला है। 2023–2024 के आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में पंजाबी गुरुद्वारों ने फूड बैंकों और आपातकालीन सेवाओं को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। कोविड-19 महामारी और हाल ही में आई बाढ़ के दौरान पंजाबियों ने लाखों लोगों को मुफ्त भोजन और ठहरने की जगह दी है। कनाडा के स्वास्थ्य क्षेत्र में हजारों पंजाबी डॉक्टर, नर्स और शोधकर्ता सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहे हैं। वैंकूवर और ओंटारियो के अस्पतालों में एक बड़ी संख्या में पंजाबी मूल के पेशेवर फ्रंटलाइन वारियर्स के रूप में कनाडा की सेवा कर रहे हैं।

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