हांगकांग के ताई पो जिले में भीषण आग लग गई जिसे शहर को दशकों बाद सबसे भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है। वांग फुक कोर्ट नाम के विशाल रिहायशी कॉम्प्लेक्स में बुधवार शाम शुरू हुई आग में अब तक 44 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 250 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में अब तक 279 से अधिक लोग घायल हैं और लगभग 900 लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया है।
कैसे लगी आग?
शुरुआती जांच में सामने आया कि आग की शुरुआत कॉम्प्लेक्स की बाहरी दीवारों पर लगे बांस के विशाल स्कैफोल्डिंग (मचान) से हुई। यह मचान इमारतों की मरम्मत के लिए लगाया गया था और इमारतें 100% बांस की पोलों व हरी नायलॉन नेटिंग से ढकी हुई थीं।सूखे बांस, तेज हवा और जलते मलबे ने आग को कुछ ही मिनटों में एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक पहुँचा दिया।इस बीच, इमारतों की खिड़कियों पर लगाए गए पॉलीस्टाइरीन बोर्ड, जो बेहद ज्वलनशील सामग्री है, ने आग को और तेज़ी से फैलाया।हादसे के बाद की जांच में पुलिस ने निर्माण कंपनी के दो निदेशकों और एक सलाहकार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया।
वांग फुक कोर्ट में कुल 8 टावर ब्लॉक हैं, जिनमें से हर एक 31 से 35 मंज़िला ऊँचा है। कुल 1,984 अपार्टमेंट वाले इस विशाल कॉम्प्लेक्स में कई परिवार रह रहे थे।आग की शुरुआत शाम को हुई, लेकिन तेज़ी से फैलते फैलते देखते ही देखते 8 में से 7 टावर पूरी तरह आग की चपेट में आ गए।कई अपार्टमेंट कुछ ही मिनटों में राख में बदल गए।तापमान इतना अधिक था कि जली हुई सामग्री हवा में उड़कर दूर-दूर तक गिर रही थी।
अग्निशमन विभाग की सबसे बड़ी तैनाती
हांगकांग फायर सर्विस ने इस घटना को लेवल-5 कैटेगरी की आग घोषित किया, जो गंभीरता के पैमाने पर दूसरा सबसे ऊँचा स्तर है।मौके पर 140 से ज्यादा फायर ट्रक,60 से अधिक एम्बुलेंस और सैकड़ों फायरफाइटर और पुलिसकर्मी लगातार तैनात हैं।आग बुझाने में लगी टीम के अनुसार, एक अग्निशमन जवान भी आग की लपटों में फंसकर अपनी जान गंवा बैठा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दर्जनों वीडियो में आग की लपटें 30–35 मंजिल तक उठती दिख रही हैं।कई वीडियोस में फायर ब्रिगेड की लंबी कतारें,इमारतों से धुआं और चिंगारियां व लोगों की चीख-पुकार और आग का फैलाव कुछ ही सेकंडों में कई मंजिलों तक पहुंचता दिख रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ऐसे लगा जैसे पूरा आसमान जल रहा हो… बांस की मचान चिंगारी की तरह भड़क उठी और पल भर में सब खत्म हो गया।
हांगकांग की पहचान बना बांस का मचान अब क्यों बन रहा है खतरा?
बांस की स्कैफोल्डिंग सदियों से हांगकांग के निर्माण कार्यों की पहचान रही है।इसके अनेक फायदे भी है यह हल्का,मजबूत व सस्ता होता है और आसानी से उपलब्ध हो जाता है पर अब वही खासियत एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।बांस के जहां फायदे है वहीं इसकी कुछ कमजोरियाँ भी हैं बांस बेहद जल्दी जल जाता है,तूफान/तेज हवा में टूटने का डर बना रहता है।बांस की मैकेनिकल स्ट्रेंथ लगातार बदलती रहती है।इसीलिए हांगकांग सरकार का डेवलपमेंट ब्यूरो पिछले कुछ वर्षों से स्टील स्कैफोल्डिंग की ओर बढ़ रहा है और बांस के इस्तेमाल को सीमित करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
जांच समिति गठित
सरकार ने इस त्रासदी की उच्च-स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन किया है।जांच में अनेक बिंदु भी शामिल किए गए हैं जैसे कि आग का वास्तविक कारण क्या है।ज्वलनशील सामग्री की अनुमति किसने दी,बांस की मचान का सुरक्षा अनुपालन और बचाव कार्य में हुई देरी क्यो हुई।क्या आग अलार्म और स्प्रिंकलर व्यवस्था सही काम नहीं कर रहे थे।
सरकार पर लोगों का दबाव बढ़ता जा रहा है कि बांस आधारित निर्माण को पूरी तरह बंद किया जाए।ताई पो में दशकों बाद इसे सबसे बड़ा हादसा माना जा रहा है।इस तरह की भीषण आग हांगकांग में बहुत कम देखने को मिली है।1962 की आग में 44 लोगों की मौत हुई थी और 2008 में लगी आग में भी 4 लोगों की मौत हुई थी।लेकिन इस बार संपत्ति और जनहानि दोनों ही मामलों में यह आधुनिक हांगकांग के इतिहास का सबसे बड़ा हादसा बनता जा रहा है।
फिलहाल के लिए आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।लेकिन मलबे में कईं लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।दर्जनों परिवारों के लोग अब भी लापता हैं।हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।कई इमारतें अब रहने लायक नहीं बचीं हैं।फायर डिपार्टमेंट ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे तापमान कम होगा और इमारत ठंडी होगी, मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
