पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। सोमवार को बाजार खुलते ही जोरदार बिकवाली हुई और निवेशकों की करीब आठ लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई।
प्री-ओपन में बड़ी गिरावट
प्री-ट्रेडिंग के दौरान BSE Sensex 2,743 अंक गिरकर 78,543 पर आ गया, जबकि NIFTY 50 533 अंक टूटकर 24,645 पर पहुंच गया।
हालांकि बाजार खुलने के बाद कुछ रिकवरी हुई, लेकिन फिर भी सेंसेक्स 1,072 अंक (1.32%) गिरकर 80,214 पर और निफ्टी 333 अंक (1.33%) गिरकर 24,844 पर बंद हुआ।

रुपये पर भी दबाव
शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 24 पैसे कमजोर होकर 91.32 पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।
गिरावट की वजह क्या है?
1. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है।
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि देश Strait of Hormuz को बंद नहीं करेगा और अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है। इससे एशियाई बाजारों में थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन अनिश्चितता बरकरार है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
Brent Crude 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्च स्तर है।
वहीं West Texas Intermediate (WTI) भी 71 डॉलर के पार चला गया।
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई, चालू खाता घाटा और कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।सोने की कीमत 3% बढ़कर 1,67,329 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) हो गई।चांदी 3.89% बढ़कर 2,85,700 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट
अन्य एशियाई बाजारों में भी दबाव दिखा:
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Nikkei 225 1.55% गिरा
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Straits Times Index 1.86% टूटा
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Hang Seng Index 2% से ज्यादा गिरा
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Taiwan Weighted Index 0.33% कमजोर रहा
अमेरिका में भी कमजोरी के संकेत मिले:
S&P 500 0.43% गिरा,
Nasdaq Composite 0.94% टूटा।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस तनाव का भारत पर तीन बड़ा असर हो सकता है:
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तेल महंगा होगा – इससे महंगाई बढ़ सकती है।
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खाड़ी देशों के साथ व्यापार प्रभावित हो सकता है – शिपिंग और सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है।
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मध्य पूर्व में काम कर रहे 90 लाख भारतीयों पर असर – उनकी नौकरी और भारत आने वाले रेमिटेंस प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।