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भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: 2027 से 2032 तक TEJAS Mk-1A इंजन की सप्लाई

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर शुक्रवार (7 नवंबर) को हस्ताक्षर हुए। सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) एयरोस्पेस के बीच हुए इस डील के तहत भारत को 113 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk-1A के लिए जेट इंजन मिलेंगे।

समझौते की कुल कीमत लगभग 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,870 करोड़ रुपये) है। अधिकारियों के अनुसार, इन इंजनों की आपूर्ति 2027 से शुरू होकर 2032 तक पूरी की जाएगी।

डील का महत्व

यह डील भारत के हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तेजस Mk-1A, भारतीय वायु सेना के लिए विकसित चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान है। यह सिंगल इंजन वाला एडवांस वर्जन है, जिसे हल्के वजन और उच्च फुर्ती के लिए डिजाइन किया गया है।

इस समझौते के तहत HAL F-404-GE-IN20 इंजनों को खरीद रही है। ये इंजिन तेजस के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे और विमान को हवा में अधिक गतिशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

तकनीकी और रणनीतिक पहलू

  • विमान का प्रकार: हल्का लड़ाकू विमान, चौथी पीढ़ी
  • इंजन: F-404-GE-IN20, सिंगल इंजन
  • उपयोग: तेजस Mk-1A एयरक्राफ्ट
  • डिलीवरी शेड्यूल: 2027–2032

Tejas Mk-1A का यह एडवांस वर्जन हल्के वजन के बावजूद बेहतरीन उड़ान प्रदर्शन और उच्च फुर्ती के लिए जाना जाता है। यह विमान भारतीय वायु सेना के लिए तेज, कॉम्बैट-कुशल और अत्याधुनिक तकनीक से लैस विकल्प प्रदान करता है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर असर

यह डील ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड टैरिफ समेत कई विषयों पर तनाव की खबरें थीं। बावजूद इसके, रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने मजबूत साझेदारी का संकेत दिया है।

यह समझौता भारत की स्थानीय विमानन और रक्षा उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा देगा। HAL के माध्यम से भारत अपने हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को और मजबूत कर रहा है, जिससे लंबी अवधि में रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

HAL और GE के बीच यह डील भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान करेगी। तेजस Mk-1A और इसके इंजनों की आपूर्ति से भारत अपने हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बने रहने में सक्षम होगा।

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