बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे साफ हो गए हैं। जनता ने एनडीए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है। महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी इस बार अपेक्षित सफलता नहीं पाई।
नीतीश की जीत के पीछे पांच मुख्य कारण रहे हैं:
1. नेतृत्व और अनुभव पर भरोसा
नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति में हैं। जनता उन्हें भरोसेमंद नेता मानती है। कई सवालों और विपक्ष के हमलों के बावजूद, लोग उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करते हैं। इस बार जदयू 101 सीटों पर चुनाव में उतरी और उनके अनुभव ने चुनाव में जीत दिलाई।

2. उच्च मतदान प्रतिशत
इस बार बिहार में कुल 67.13% मतदान हुआ, जो पहले से अधिक है। जदयू को पिछली बार 15.39% वोट मिले थे, इस बार यह बढ़कर 18% से ऊपर पहुंचा। ज्यादा मतदान का असर नीतीश के पक्ष में रहा और जदयू को राजद से आगे निकालने में मदद मिली।
3. महिलाओं के लिए योजनाएं
नीतीश कुमार की योजनाएं खासकर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण रही। साइकिल योजना और महिलाओं के बैंक खाते में सीधे 10 हजार रुपये भेजना चुनाव से पहले बड़ा कारण बना। मतदान में महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक सक्रिय रहीं, जिससे नीतीश को फायदा मिला।
4. विभाजित विपक्ष
महागठबंधन में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा में देरी रही। कई सीटों पर गठबंधन के भीतर ही उम्मीदवार आमने-सामने थे। इसके उलट, एनडीए ने समय से सीट शेयरिंग और उम्मीदवार तय कर रखे थे।
5. प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश की छवि
एनडीए ने इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि को आगे रखा। जनता को भरोसा था कि डबल इंजन सरकार बिहार के विकास को तेजी से आगे बढ़ा सकती है। इसके अलावा, लालू-राबड़ी की पुरानी सरकार के दौरान ‘जंगलराज’ का डर भी एनडीए के पक्ष में गया।
मुख्य चेहरे और विपक्ष
- तेजस्वी यादव – राजद के प्रमुख चेहरा, हालांकि उनके प्रचार का असर सीमित रहा।
- प्रशांत किशोर – जनसुराज पार्टी से चुनाव में उतरे, लेकिन किसी विशेष जीत की स्थिति नहीं बन पाई।
बिहार की जनता ने फिर से नीतीश कुमार पर भरोसा जताया। इस बार उनकी जीत में उनका नेतृत्व, महिलाओं की योजनाएं, विपक्ष का कमजोर होना, और एनडीए की छवि प्रमुख कारण रहे।