शीतल देवी ने गोल्ड पर साधा निशाना ,वर्ल्ड पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में रचा इतिहास ,तुर्की की खिलाड़ी ओजनूर क्यूर गिर्दी को हराया

शीतल देवी जोकि 18 वर्ष की वो लड़की जिसने हाथ ना होते हुए भी पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। शीतल देवी प्रेरणा है उन लोगो के लिए जो कि हाथ की लकीरों के भरोसे बैठे रहते हैं। क्योंकि शीतल देवी ने ये साबित किया है कि हाथ की लकीरों से ही सब कुछ नहीं होता क्योंकि किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते।

 

भारत की तीरंदाज शीतल देवी ने शनिवार, 27 सितंबर को इतिहास रच दिया। बिना हाथों के ही उन्होंने अपने क्षेत्र का सबसे बड़ा खिताब जीत लिया। ग्वांग्जू में आयोजित पैरा वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीतल ने महिलाओं की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। शीतल ने तुर्किये की नंबर एक पैरा तीरंदाज ओजनूर क्यूर गिर्डी को 146-143 से पराजित कर गोल्ड जीता। शीतल स्पर्धा में बिना हाथों वाली एकमात्र पैरा तीरंदाज हैं और निशाना लगाने के लिए अपने पैरों और ठुड्डी का उपयोग करती हैं। यह शीतल का इस प्रतियोगिता में तीसरा पदक है। शीतल देवी की यह उपलब्धि एक मील का पत्थर है, क्योंकि वह बिना हाथों के पैरा आर्चरी में स्वर्ण जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी जीत ने न केवल भारत का गौरव बढ़ाती है, बल्कि यह पैरा खेलों में महिलाओं की भागीदारी और सफलता को भी प्रोत्साहित करती है।

शीतल देवी ने बिना हाथों के होने के बावजूद इंटरनेशनल लेवल पर तीरंदाजी में सफलता हासिल की। उनका जन्म जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। जन्म से ही वह फोकॉमीलिया बीमारी से जूझ रही हैं, जिसके कारण उनके हाथ विकसित नहीं हो पाए। साल 2022 में पैरा आर्चरी में अपना सफर शुरू किया। तब भारतीय सेना की ओर से आयोजित एक युवा कार्यक्रम में कोच अभिलाषा चौधरी और कुलदीप वधवान ने उनकी आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता को देखा। उन्होंने शीतल को तीरंदाजी की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया। शीतल को डॉक्टरों ने प्रोस्थेटिक का उपयोग करने की सलाह नहीं दी, लेकिन शीतल ने अपने पैरों और मुंह की मदद से तीरंदाजी सीखी। उन्होंने अमेरिकी पैरा आर्चर मैट स्टट्जमैन की तकनीक को अपनाया, जिसमें वह अपने दाहिने पैर की अंगुली से धनुष को पकड़ती हैं, उसे उठाती हैं और बाएं कंधे से तीर छोड़ती हैं। शीतल देवी ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से 2023 एशियाई पैरा खेलों में दो गोल्ड और एक रजत पदक जीते, जिससे वह महिला कंपाउंड ओपन वर्ग में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 स्थान पर पहुंच गईं।साल 2024 पेरिस पैरालंपिक खेलों में उन्होंने टीम इवेंट में कांस्य पदक जीता और व्यक्तिगत स्पर्धा में भी शानदार प्रदर्शन किया। शीतल को भारत सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया है।

हार के डर से कोशिश करना मत छोड़ो, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो हार नहीं मानते हैं।

 

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