PUNJAB में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, साल के आखिरी दिन सरकार ने अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के किए 7 अधिकारी सस्पेंड

पंजाब सरकार ने साल 2025 के आखिरी दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इस संबंध में लोकल बॉडीज विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी किए हैं।सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई 52.80 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है, हालांकि सस्पेंशन ऑर्डर में भ्रष्टाचार का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है। आदेश में केवल इतना कहा गया है कि कार्रवाई पंजाब म्यूनिसिपल नियमावली 1970 के तहत की गई है।

टेंडर घोटाले से जुड़ा मामला

यह पूरा विवाद रणजीत एवेन्यू ब्लॉक-C और 97 एकड़ स्कीम के डेवलपमेंट कार्य के लिए जारी किए गए करीब 52.40 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा है।18 दिसंबर को फाइनेंशियल बिड ओपन हुई थी।शर्मा कांट्रैक्टर ने 1.08% लेस रेट देकर H-1 बिडर बनने में सफलता हासिल की।वहीं राजिंदर इंफ्रास्ट्रक्चर ने 0.25% लेस दिया, लेकिन H-1 नहीं बन पाई।

सीगल इंडिया लिमिटेड और गणेश कार्तिकेय कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. को डॉक्यूमेंट्स अधूरे और तकनीकी खामियों का हवाला देकर फाइनेंशियल बिड से पहले ही बाहर कर दिया गया।

शिकायत से जांच तक का पूरा घटनाक्रम

सीगल इंडिया लिमिटेड ने इस मामले की शिकायत मुख्य सचिव (Chief Secretary) से की।इसके बाद डिप्टी कमिश्नर (DC) ने 4 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई।

जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी गई

रिपोर्ट के आधार पर लोकल बॉडीज विभाग ने यह सस्पेंशन कार्रवाई की।हालांकि, आदेश में सस्पेंशन के स्पष्ट कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है।

चार दिन पहले विजिलेंस SSP भी हुए थे सस्पेंड

इस कार्रवाई से पहले सरकार ने अमृतसर में तैनात विजिलेंस के SSP लखबीर सिंह और उनके रीडर संजीव कुमार को भी सस्पेंड कर दिया था।यह मामला भी 55 करोड़ रुपये के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।लखबीर सिंह को इसी साल अप्रैल 2025 में SSP विजिलेंस नियुक्त किया गया था। खास बात यह है कि 25 जून 2025 को बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी करने वाली टीम का नेतृत्व भी लखबीर सिंह ने ही किया था। महज 9 महीनों के भीतर उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में सस्पेंड कर दिया गया।

सरकार का साफ संदेश

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि पंजाब सरकार भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है और साल के आखिरी दिन की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।

 

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