हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ IPS अधिकारी ADGP वाई.पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले में स्वतंत्र और संतोषजनक जांच कर रही है, इसलिए CBI जांच की जरूरत नहीं है।इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता नवनीत कुमार के वकील वनीत कुमार शर्मा ने दलील दी कि वरिष्ठ अधिकारियों की आत्महत्याओं और कई IAS व IPS अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोपों के मद्देनजर यह मामला समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है। इसमें प्रशासनिक दबाव, भेदभाव, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न या किसी प्रकार के आपराधिक कदाचार की संभावना शामिल होनी चाहिए।

कई आरोपी अधिकारी अब भी अपने-अपने जिलों में पदस्थ हैं, जिससे राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले की जांच के लिए ADG रैंक के IPS अधिकारी के नेतृत्व में 14 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। इस दल में तीन अन्य IPS अधिकारी और तीन DSP शामिल हैं। SIT रोजाना मामले की गहन जांच कर रही है।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पूछा कि जांच में अब तक कितना काम हुआ है और क्या किसी का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है। अदालत ने कहा कि जांच की स्टेटस रिपोर्ट को देखने के बाद यह तय किया जा सकता है कि क्या और कोई आदेश जारी करने की आवश्यकता है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया कि इस मामले में कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है और अब तक 22 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा, CCTV फुटेज को सुरक्षित किया गया है और 21 साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है।मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि न तो SIT पर कोई आरोप हैं और न ही इस बात का ठोस कारण है कि जांच को CBI को सौंपा जाए। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि जांच में कोई ढिलाई या देरी हुई है, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपने का कोई औचित्य नहीं बनता।