पंजाबी गायक राजवीर जवंदा की सड़क हादसे में मौत के बाद दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज 27 अक्तूबर को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस मामले में अदालत ने केंद्र सरकार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ प्रशासन और नेशनल मेडिकल कमीशन को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।यह याचिका वरिष्ठ वकील नवकिरण सिंह की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद राजवीर को जिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहाँ उचित प्राथमिक उपचार नही मिला, अगर उन्हे समय पर इलाज मिलता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। याचिका में निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ठोस और प्रभावी प्रणाली बनाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता की दलील
सीनियर वकील नवकिरण सिंह ने अदालत में प्रस्तुत दलील में कहा कि हादसे के तुरंत बाद जिस निजी अस्पताल में राजवीर को ले जाया गया, वहाँ उन्हें फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार) तक नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अगर उन्हें उचित उपचार तुरंत उपलब्ध कराया गया होता, तो शायद उनकी जान बच सकती थी।याचिका में मांग की गई है कि भविष्य में पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा के अस्पतालों में गंभीर दुर्घटनाओं के समय रोगियों को त्वरित और प्रभावी इलाज मुहैया कराने के लिए एक ठोस मैकेनिज्म तैयार किया जाए।
अदालत की कार्रवाई
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित सरकारी और मेडिकल संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं के समय रोगियों को त्वरित प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।राजवीर जवंदा की मौत ने चिकित्सा तंत्र और निजी अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं की कमी को उजागर किया है। इस PIL के माध्यम से यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं में रोगियों को तत्काल और उचित इलाज उपलब्ध हो सके, और निजी अस्पतालों में त्वरित मेडिकल प्रतिक्रिया के लिए ठोस नियम और प्रक्रियाएँ लागू हों।