पंजाब के अमृतसर में तैनात विजिलेंस ब्यूरो के SSP लखबीर सिंह को सस्पेंड किए जाने की खबर से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई एक सीनियर IAS अधिकारी की शिकायत के बाद की गई है। मामला अमृतसर के पॉश इलाके रणजीत एवेन्यू में करीब 55 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी जांच को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।हालांकि, अब तक पंजाब सरकार की ओर से निलंबन को लेकर कोई औपचारिक आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।

55 करोड़ के टेंडर में घोटाले का आरोप
बताया जा रहा है कि रणजीत एवेन्यू इलाके में सीवरेज और स्ट्रीट लाइट से जुड़े विकास कार्यों के लिए 55 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि ज़मीन पर विकास कार्य नजर नहीं आया।इसके बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
ठेके चहेतों को दिलाने और राशि के बंटवारे के आरोप लगे।
इस मामले की शिकायत सरकार तक पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू की गई।SSP समेत 6 लोगों पर FIR दर्ज होने की चर्चा रही।सूत्रों के अनुसार, इस केस में SSP लखबीर सिंह के अलावा एक समाजसेवी और कुल 5 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।हालांकि, FIR को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे मामले को लेकर स्थिति और भी अस्पष्ट बनी हुई है।
मजीठिया गिरफ्तारी में निभाई थी अहम भूमिका
गौरतलब है कि लखबीर सिंह को इसी साल मार्च–अप्रैल 2025 में अमृतसर में विजिलेंस SSP नियुक्त किया गया था।25 जून 2025 को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी करने वाली टीम के वह प्रमुख रहे थे।करीब 9 महीने के भीतर ही उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने और सस्पेंशन की खबरों ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है।
पहले भी हो चुकी है सख्त कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में पंजाब सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले में लापरवाही के आरोपों के चलते निलंबित किया था।सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।










