पंजाब की खडूर साहिब विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को आज पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2013 में दर्ज छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में मिली चार साल की सजा को निलंबित कराने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत का विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाएगा, मगर प्राथमिक फैसला आते ही विधायक की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।हाई कोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लालपुरा की विधायकी खत्म हो सकती है?भारतीय कानून के अनुसार-किसी भी विधायक या सांसद को यदि दो वर्ष से अधिक की सजा हो जाती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः रद्द हो सकती है।ऐसे में, लालपुरा को मिली 4 साल की सजा उनके भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत दे रही है। हाई कोर्ट से राहत न मिलने के चलते अब उनके पास सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा ही बचता है।

मिली जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “सजा पर रोक (Stay on Sentence) लगाने पर विचार नहीं किया जा सकता, सिर्फ सजा के खिलाफ दायर अपील पर ही सुनवाई होगी।”इस टिप्पणी के बाद लालपुरा द्वारा सजा निलंबित करने की मांग स्वतः खारिज हो गई।पिछली सुनवाई में अदालत ने तरनतारन की निचली अदालत से पूरा केस रिकॉर्ड भी तलब किया था। अब विस्तृत आदेश आने के बाद ही अगले कदम स्पष्ट होंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब मनजिंदर सिंह लालपुरा राजनीति में नहीं थे और टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम करते थे।एक शादी समारोह में आई महिला ने लालपुरा और अन्य टैक्सी ड्राइवरों पर मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले की जांच के बाद लालपुरा सहित 12 लोगों पर केस दर्ज किया।सितंबर 2025 में तरनतारन जिले की अदालत ने सभी 12 आरोपियों को दोषी करार दिया।अदालत ने लालपुरा को चार साल कैद की सजा सुनाई और सात अन्य को गिरफ्तारी के आदेश दिए।
राजनीतिक हलचल तेज
हाई कोर्ट के इस फैसले ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अगर मनजिंदर सिंह लालपुरा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती, तो यह फैसला AAP के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।