कांग्रेस से निष्कासित पंजाब की वरिष्ठ नेता नवजोत कौर सिद्धू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कार्यशैली और नेतृत्व पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की लीडरशिप को समझना उनके लिए मुश्किल है और वह अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं जहां सबके साथ समान व्यवहार और खुला संवाद संभव हो सके।
नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अभी भी गांधी परिवार की सोच से बंधे हुए दिखाई देते हैं और उन्हें उन सच्चे शुभचिंतकों की बात सुनने का समय नहीं मिलता जो पार्टी और राज्य के हित में मार्गदर्शन देना चाहते हैं।
“आठ महीने तक नहीं मिला समय”
उन्होंने दावा किया कि वह पिछले आठ महीनों से राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रही थीं, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं मिला। उनके मुताबिक, एक नेता को सभी से मिलना चाहिए, खासकर उनसे जो ईमानदारी से रचनात्मक सलाह दे रहे हों।
उन्होंने कहा,“अगर किसी से मिलने में आठ महीने लगें तो यह ठीक नहीं है। एक नेता को सबकी बात सुननी चाहिए। अगर कोई सलाह लेने को तैयार नहीं है, तो यह उसकी मर्ज़ी है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में पार्टी नेतृत्व सही तरीके से काम नहीं कर रहा और टिकट पहले ही “बिक” चुके हैं। उनका कहना था कि अगर राहुल गांधी को अपने आसपास हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं है, तो इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की है।

पीएम मोदी की जमकर तारीफ
नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे बेहद आध्यात्मिक (स्पिरिचुअल) व्यक्ति हैं और यह उनकी शख्सियत में झलकता है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या सिद्धू परिवार की बीजेपी से नजदीकियां बढ़ रही हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले सिद्धू परिवार भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ था।
कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप
नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पंजाब के लिए सब कुछ छोड़ने के बदले सात विभागों और डिप्टी चीफ मिनिस्टर पद का आश्वासन दिया गया था। इसके अलावा सांसद पद का भी वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि उन्हें लोकल बॉडीज़ और टूरिज़्म विभाग दिए गए और यह कहा गया कि इन्हें मुख्यमंत्री के अनुसार चलाया जाएगा।
राजनीतिक मायने
नवजोत कौर सिद्धू के इन बयानों से पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। एक तरफ उन्होंने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ कर राजनीतिक संकेत दिए हैं। आने वाले समय में उनके अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।









