केरल के प्रसिद्ध अष्टमुडी झील क्षेत्र में रविवार तड़के एक बड़े हादसे ने स्थानीय मछुआरा समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया। कोल्लम जिले के अय्यनकोविल मंदिर के पास कुरीपुझा चर्च के समीप स्थित नावों के लंगर स्थान पर लगी भीषण आग में दस से अधिक मछली पकड़ने वाली नावें और एक फाइबर बोट पूरी तरह जलकर राख हो गईं।यह हादसा सुबह हुआ, लेकिन राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
आग कैसे लगी?
अग्निकांड की सही वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती जानकारी और स्थानीय लोगों के अनुसार आग की शुरुआत एक नाव पर लगे कुकिंग गैस सिलेंडर में विस्फोट होने के बाद हुई।अधिकारियों ने पुष्टि की कि आग लगते ही आसपास खड़ी अन्य नावों पर मौजूद गैस सिलेंडर भी फटने लगे, जिससे आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते एक ही कतार में बंधी लगभग 14 नावें इसकी चपेट में आ गईं।स्थानीय निवासियों ने आग को देखा तो तुरंत इसे रोकने की कोशिशें शुरू कीं। आग को और फैलने से बचाने के लिए, उन्होंने जलती हुई नावों की रस्सियाँ काटकर उन्हें झील के अंदर धकेल दिया।
अग्निशमन दल की बड़ी कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज की छह यूनिटें मौके पर पहुंचीं।कड़ी मशक्कत के बाद दमकल विभाग ने सुबह 7 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।हालाँकि स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी खराब होने के कारण दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुँचने में देरी हुई, जिससे नुकसान और बढ़ गया।रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में इसी क्षेत्र में यह तीसरी बड़ी आग की घटना है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।कोल्लम के जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि घटना की हर पहलू से जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मछुआरों की नावें खाक-अजीविका पर बड़ा संकट
आग में नष्ट हुई नावें मुख्य रूप से स्थानीय मछुआरों की थीं। इनमें से कई नावें तिरुवनंतपुरम के पोझियूर, कोलाचल और पूवर के मछुआरों की थीं, जिन्होंने चुनाव से पहले अपने काम से अवकाश लेते हुए नावें यहां बांधी थीं।सबसे बड़ा नुकसान मछुआरों को हुआ है क्योंकि जलकर नष्ट हुई नावें ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत थीं।एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आग में उसकी पूरी नाव खाक हो गई। अन्य मछुआरों का भी यही कहना है कि अब उनके सामने अगले कई महीनों तक आर्थिक असुरक्षा और रोजगार संकट की स्थिति बनी रहेगी।
हादसे के बाद प्रभावित मछुआरों ने राज्य सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि नावों के नष्ट होने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और बिना सरकारी मदद के अपने काम पर लौट पाना लगभग असंभव है।