ईरान का तेल निर्यात तेज, तनाव बढ़ा

डील पर हस्ताक्षर से पहले ही तेल की बिक्री करने लगा ईरान, US प्रतिबंधों को पार कर निकला पहला टैंकर ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते पर साइन होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल निर्यात आरंभ कर दिया है। टैंकर ट्रैकिंग कंपनियों के अनुसार, यह पहले निर्यात में पिछले दो महीनों में शामिल हैं जिसमें नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी के बड़े सुपरटैंकर हैं। ईरान अमेरिका के साथ संभावित समझौते का लाभ उठाने में कोई समय बर्बाद नहीं कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट के किनारे अमेरिकी नाकाबंदी को पार करते हुए पिछले दो महीनों में पहली दफा ईरानी कच्चे तेल का निर्यात हुआ है। इस सप्ताहांत अमेरिका ने ईरान के साथ शांति संधि पर सहमति की जानकारी दी थी। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं. इससे पहले कम से कम तीन ईरानी तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से बाहर जा चुके हैं और इस सप्ताह अब तक अमेरिकी नाकाबंदी को पार करके क्षेत्र छोड़ चुके हैं। यह सूचना टैंकर-ट्रैकिंग कंपनियों द्वारा प्रदान की गई है। टैंकर ट्रैकिंग सेवा टैंकरट्रैकर्स डॉट कॉम ने AIS (Automatic Identification System) डेटा और सैटेलाइट इमेज के आधार पर अनुमान लगाया है कि नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी (NITC) के कम से कम दो सुपरटैंकर अमेरिकी प्रतिबंध को पार कर चुके हैं। इन विशाल क्रूड कैरियर्स (VLCCS) के नाम डियोना और हीरो-2 हैं। दोनों जहाज मिलकर 38 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लेकर अमेरिका के नाकेबंदी क्षेत्र से गुजर चुके हैं। टैंकर ट्रैकर्स ने कहा, ‘यह ईरान के कच्चे तेल का पहले दो महीनों में पहला निर्यात है.’ नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी का एक और टैंकर ‘स्ट्रीम’ भी अमेरिकी नाकाबंदी की सीमा के नजदीक आ रहा है। टैंकरट्रैकर्स यह जहाज पिछले सात हफ्तों से पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में ईरान में प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहा था।

तेल निर्यात को पटरी पर लाने की पूरी तैयारी कर चुका ईरान

NITC का एक और VLCC टैंकर ‘डैन’ भी रियाउ द्वीपसमूह के नज़दीक के क्षेत्र सबाहर निकल चुका है, जहां वह 23 मई से ट्रैकिंग सिस्टम को बंद करके रुका हुआ था. अब यह तेल को लोड करने हेतु ईरान की तरफ बढ़ रहा है। ईरानी तेल टैंकरों की गतिविधियाँ निरंतर बढ़ रही हैं। शुक्रवार को जिनेवा में उस करार पर सिग्नेचर होने की आशा है, जिसके तहत 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया आरंभ होगी। ईरान इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए तैयार है कि जैसे ही समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, अमेरिका ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने वाला है. मंगलवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने समझौते से परिचित स्रोतों के संदर्भ में बताया कि इस समझौते के तहत ईरान को तुरंत तेल और ईंधन की बिक्री शुरू करने की अनुमति मिलेगी। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते के पहले वैश्विक तेल बाजार में एक बड़ा मोड़ आया है। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय बाद ईरान ने अपने कच्चे तेल का निर्यात फिर से शुरू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में गतिविधि बढ़ गई है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच समझौते की बातचीत अंतिम दौर में बताई जा रही है।
पिछले दो महीनों में पहली बार ईरानी सुपरटैंकर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सक्रिय दिखाई दिए हैं। इन्हें नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी (NITC) से जोड़ा जा रहा है, जो पहले अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण सीमित गतिविधियों में थी। अब इन टैंकरों की आवाजाही में तेजी आई है। कम से कम तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल चुके हैं। इन टैंकरों के माध्यम से लाखों बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा में भेजा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की आर्थिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य समझौते से पहले राजस्व में वृद्धि करना है। ट्रैकिंग डेटा से यह भी स्पष्ट हुआ है कि कुछ सुपरटैंकर अमेरिकी निगरानी क्षेत्र को पार कर चुके हैं। इनमें से दो बड़े जहाजों पर भारी मात्रा में कच्चा तेल लदा हुआ था, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में फिर से जुड़ता दिख रहा है। इस गतिविधि को ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
समुद्री निगरानी एजेंसियों का कहना है कि ईरानी जहाजों की गतिविधियों में हालिया दिनों में वृद्धि हुई है। कई टैंकर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि ईरान अपने तेल निर्यात ढांचे को तेजी से पुनर्जीवित कर रहा है। यह पूरा घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है, तो ईरानी तेल निर्यात पर लगे कई प्रतिबंधों में ढील मिलने की संभावना है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस स्थिति का लाभ उठाकर समझौते से पहले ही अपने आर्थिक हितों को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए यह कदम केवल वाणिज्यिक नहीं बल्कि सामरिक भी माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियां भी इस स्थिति पर करीब से निगरानी रख रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र से तेल की आवाजाही हमेशा वैश्विक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह दुनिया के बड़े हिस्से को ऊर्जा उपलब्ध कराता है। सभी की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब संभावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके बाद ईरान के तेल निर्यात और वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
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