सब्जी विक्रेता ₹1 करोड़ के धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड बना: दिन में सब्जियां बेचता, रात में साइबर नेटवर्क का संचालन करता; 140 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं। लुधियाना में 1 करोड़ रुपए से अधिक के अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का सूत्रधार सब्जी विक्रेता निकला। उसके पिता भी सब्जियां बेचते हैं। सूत्रधार दिन में सब्जियों की बिक्री करता और रात में विदेशी लोगों को धोखा देने वाला साइबर फ्रॉड सेंटर चलाता था। पुलिस ने इस मास्टरमाइंड सहित 140 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अमेरिका और यूरोप के लोगों को माइक्रोसॉफ्ट के तहत नकली वायरस अलर्ट भेजकर धोखा देते थे। पुलिस ने इस नेटवर्क से 1.07 करोड़ रुपये नगद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल, 19 लग्जरी वाहन और 300 से अधिक बैंक खाते जब्त किए हैं। जब पुलिस ने सब्जी विक्रेता मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, तो शुरुआत में वह पुलिस को भटकाता रहा, लेकिन कड़ी पूछताछ में मामला स्पष्ट हो गया। मुनीष की गिरफ्तारी के बाद दैनिक भास्कर की टीम उसकी सब्जी की दुकान पर गई। हालांकि, वहां केवल मुनीष का चाचा ही मौजूद था। चाचा ने जानकारी दी कि मुनीष के पिता एक रिश्तेदार की मौत पर गए हुए हैं। चाचा ने बताया कि मुनीष माता-पिता का एकमात्र बेटा है। वह सुबह से शाम तक अपनी दुकान पर सब्जियाँ बेचता था। उसकी दुकान लगभग 50 साल पुरानी है। उसे शनिवार को ही जानकारी मिली कि पुलिस ने मुनीष को गिरफ्तार किया है। इस मामले में मुनीष के पिता जब रिश्तेदारी से लौटेंगे, तब वे कुछ जानकारी दे सकेंगे। इधर, इस मामले में अभी पुलिस के उच्च अधिकारियों ने कोई विशेष जानकारी नहीं दी है।
अब पूरी स्थिति को विस्तार से समझिए।
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के अनुसार, पुलिस को जानकारी मिली थी कि शहर में कुछ कॉल सेन्टर विदेशी नागरिकों के साथ ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। इसके बाद, पुलिस ने बुधवार की रात को संधू टॉवर और सिल्वर ओक के आसपास स्थित कई व्यावसायिक परिसरों में एक साथ छापेमारी की। पुलिस ने 132 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। छापे में लगभग 1 करोड़ 7 लाख रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन, 19 लग्जरी गाड़ियाँ, 450 से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए। 13 मई को साइबर क्राइम थाने में BNS की धाराओं 318(4), 319(2), 336(3), 61(2) और IT एक्ट की धाराओं 66-C, 66-D, 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 150 व्यक्तियों को नामजद किया गया, 140 गिरफ्तार पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने बताया कि इस मामले में 150 व्यक्तियों को नामजद किया गया। 132 लोग बुधवार को और 8 लोग रविवार को गिरफ्तार किए गए। मुनीष भी गिरफ्तार किए गए 132 व्यक्तियों में शामिल था। साइबर धोखाधड़ी के इस मामले में आरोपी उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के लोगों को निशाना बनाते थे। जिन्हें हमने पकड़ा है, वे सभी पहले अच्छी कंपनियों में कार्यरत थे। इनका वेतन 30 हजार से 50 हजार के बीच था। इनकी स्पोकन बहुत बेहतर है। साधारण व्यक्ति बातचीत में इनसे सरलता से ठगा जाएगा। कॉल पर लोगों को प्रतीत होगा कि शायद ये किसी कंपनी से हैं। ये आरोपी मुख्यतः एनसीआर और देहरादून के निवासी हैं। इनके हैकर मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप में हैं। ये आरोपी जिन पीजी में निवास करते थे वहां पर भी पुलिस कार्रवाई कर रही है। 6 हवाला ऑपरेटरों को पुलिस ने पकड़ लिया है, जिनका संबंध गुजरात से है। लोगों से अनुरोध है कि यदि आप कोई व्यवसाय करते हैं तो इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल में जानकारी सुरक्षित रखें। अगर आपको जानकारी नहीं है तो सावधानी बरतें और तकनीकी सहायता प्राप्त करें।

इस मामले में आयकर को भी जोड़ा जा रहा है। आयकर और राज्य साइबर को जानकारी पहुंचा दी गई है। इस मामले के प्रत्येक समूह का नेतृत्व एक एसीपी कर रहा है। एक समूह में पंजाब पुलिस के 20 से 25 कर्मचारी शामिल हैं। ये विज्ञापन के माध्यम से ही लोगों को धोखा देते थे। आरोपी ऐसे ठगी करते थे, जांच में पता चला कि वे विदेशी लोगों के कंप्यूटर स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट के नाम से नकली वायरस और सुरक्षा चेतावनियाँ भेजते थे। स्क्रीन पर एक झूठा कस्टमर केयर नंबर भी प्रदर्शित किया जाता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता, तो कॉल एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीधे ठगों तक पहुँच जाती थी। इसके बाद आरोपियों ने खुद को तकनीकी सहायता कर्मचारी बताते हुए पीड़ित से अल्ट्राव्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहा। इससे ठग पीड़ित के कंप्यूटर का पूरा नियंत्रण अपने पास ले लेते थे। बाद में झूठे स्कैन और नकली पॉप-अप दिखाकर लोगों को डराया जाता था। उन्हें सूचित किया जाता था कि उनका बैंक खाता या ईमेल चोरी हो गया है, या फिर उनके कंप्यूटर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री पाई गई है। इसी डर का उपयोग कर उनसे ठगी की जाती थी।
हर कॉल सेंटर में 8 से 10 टीमें स्थापित की गई थीं और प्रत्येक टीम में 6 से 7 सदस्य कार्यरत थे। ओपनर पीड़ित को धोके में डालकर सिस्टम तक पहुंच हासिल करते थे। क्लोजर खुद को बैंक अधिकारी बताकर धनराशि स्थानांतरित करवाते थे। आरोपी ने घर से नकद उठाना, सोना खरीदवाने के लिए दरवाजे पर बुलाना, अमेजन और एप्पल गिफ़्ट कार्ड खरीदना, झूठे विदेशी खातों में पैसे भेजना, हवाला और क्रिप्टो के माध्यम से भारत भेजना किया। पुलिस की जांच में यह पता चला कि धोखाधड़ी की राशि हवाला नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य गैरकानूनी तरीकों से भारत लायी जाती थी। पुलिस की छापेमारी के दौरान कई युवा लड़के और लड़कियाँ वहां से गिरफ्तार किए गए। सूत्रों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि मास्टरमाइंड गरीब परिवारों से आने वाले लड़के-लड़कियों को जल्दी अमीर बनने का सपना दिखा कर इस गतिविधि में लगाता था।










