ChandigarhIndiaWorld News

कैब ड्राइवरों के समर्थन में राजा वड़िंग

Chandigarh में अपनी मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे कैब ड्राइवरों के समर्थन में अब पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने रविवार को धरना-स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी ड्राइवरों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से ड्राइवरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। ओला कैब को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चंडीगढ़ एसटीए (स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ओला एप्लीकेशन के माध्यम से कैब बुक करने और संचालित करने पर कार्रवाई की जाएगी। लोग कैब बुक करने के लिए दूसरी अधिकृत कंपनियों की ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई कैब ड्राइवर ओला एप्लीकेशन के माध्यम से सवारी उठाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ मोटर वाहन नियमों के तहत 10 हजार रुपए का चालान किया जाएगा। प्रशासन ने ओला का लाइसेंस छह माह के लिए निलंबित कर दिया है। परिवहन विभाग की टीमें विभिन्न स्थानों पर निगरानी कर रही हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग धरने पर पहुंच बात करते हुए।

प्रदर्शन कर रहे कैब चालक कहते हैं कि एग्रीगेटर कंपनियां किराए का एक बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में ले रही हैं। कई मामलों में कुल किराए का 30 से 40 प्रतिशत तक कंपनियों को चला जाता है। दूसरी ओर, डीजल-पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि, वाहन की ईएमआई, बीमा, टैक्स और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। 14 से 16 घंटे तक वाहन चलाना पड़ता है: प्रदर्शनकारी ड्राइवर बताते हैं कि उन्हें रोजाना 14 से 16 घंटे तक वाहन चलाना होता है, लेकिन इसके बावजूद उनकी आय अपर्याप्त है। इससे उनके परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। आर्थिक दबाव के कारण कई ड्राइवर मानसिक और शारीरिक तनाव भी झेल रहे हैं। राजा वड़िंग ने उठाई ड्राइवरों की आवाज: धरने पर पहुंचे राजा वड़िंग ने कहा कि हजारों कैब चालक कंपनियों की नीतियों के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की और कहा कि ड्राइवरों के हितों की सुरक्षा हेतु ठोस नीति बनानी चाहिए। नितिन गड़करी से हस्तक्षेप की अपील: उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी और गुलाब चंद कटारिया से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। वड़िंग ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए, जिसमें ड्राइवरों का शोषण न हो और कंपनियों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी होकैब ड्राइवर पिछले 16 दिनों से अपनी मांगों के लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में एग्रीगेटर कंपनियों की कमीशन दरों में कमी, उचित किराया नीति लागू करना और कैब सेवाओं के लिए स्पष्ट सरकारी नियम बनाने शामिल हैं।

कैब ड्राइवरों के आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन, मांगों पर तेज हुई बहस

चंडीगढ़ में कैब ड्राइवरों का आंदोलन निरंतर बढ़ रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों को अब राजनीतिक सहायता भी मिल रही है, जिससे इस मुद्दे पर चर्चा में वृद्धि हुई है। आंदोलन कर रहे चालक अपनी आर्थिक और पेशेवर समस्याओं को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। रविवार को कई प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने अपने संघर्ष और चुनौतियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में बढ़ते खर्च और घटती आय के चलते उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है। ड्राइवरों का विश्वास है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कैब एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले कमीशन का अनुपात बहुत अधिक है। इससे उनकी वास्तविक कमाई में भारी गिरावट आती है। उनका कहना है कि किराए कएक बड़ा हिस्सा कंपनियों के पस चला जाता है, जबकि वाहन संचालन ससंबंधित अधिकांश खर्चों का बोझ उन्हें खुद उठाना पड़ता है। ड्राइवरों ने यह भी बताया कि ईंधन की कीमतें, वहन रखरखव, बीमा, परमिट और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में सीमित आय के साथ कार्य करना और भी कठिन हो गया है। उनका कहना है कि कई बार लंबे समय तक काम करने के बावजूद अपेक्षित आमदनी नहीं मिल पाती। आंदोलन में शामिल कई चालकों का दावा है कि उन्हें प्रतिदिन 14 से 16 घंटे तक वाहन चलाना पड़ता है। फिर भी उनकी आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। लंबे समय तक काम करने से शारीरिक और मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।
इस बीच, प्रशासन द्वारा कुछ कैब सेवाओं कखिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी सेवा प्रदाताओं के लिए नियमों और लाइसेंस से संबंधित शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों की मुख्य मांगों में कमीशन दरों की पुनरावलोकन, उचित किराया तय करना और कैब सेवाओं के लिए स्पष्ट नीति बनाना शामिल है। वे कहते हैं कि यदि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस दिशा में प्रयास करें,ो लाखों ड्राइवरों को राहत मिल सकती है। राजनीतिक नेताओं ने भी इस विषय पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि ड्राइवर परिवहन व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने सरकार से संतुलित और व्यावहारिक नीति बनाने का आग्रह किया है। आंदोलन जारी है और ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर प्रतिबद्ध हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगले दिनों में बातचीत से कोई हल निकलता है या आंदोलन और बढ़ता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Subscribe to Our Newsletter!

This will close in 0 seconds