महिला आरक्षित वार्ड में पुरुष उम्मीदवार को चुनाव लड़ाने की अनुमति कैसे मिली, यह गंभीर प्रश्न उठाते हुए नगर परिषद चुनावों में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही और धांधली का चौंकाने वाला मामला उभरा है। समाजवादी पार्टी के नेता एवं मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड पंजाब के उपाध्यक्ष मदन शर्मा ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वार्ड नंबर 2 और 26 में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। पत्रकार वार्ता में सपा नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारियों की बड़ी लापरवाही के कारण पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक बना हुआ है। महिला आरक्षित वार्ड से पुरुष उम्मीदवार का चुनाव लड़ना एक अनुचित मामला है। सपा नेता के साथ उपस्थित निर्दलीय उम्मीदवार राज कुमार सरसवाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की असलियत को उजागर किया। राज कुमार ने कहा कि उन्होंने वार्ड नंबर 26 से अपना नामांकन पत्र भरा था, पर चुनाव अधिकारियों ने पूरी लापरवाही से उन्हें वार्ड नंबर 2 से उम्मीदवार घोषित कर दिया और चुनाव चिह्न भी प्रदान किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वार्ड नंबर 2 महिलाओं के लिए आरक्षित था, तो एक पुरुष उम्मीदवार को वहां से चुनाव लड़ने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई? यह सीधे तौर पर एक बड़ी प्रशासनिक चूक और जांच का विषय बन गया है। चुनाव लड़ने वाले राज कुमार सरसवाल ने कहा कि इस गड़बड़ी के कारण उन्होंने वार्ड नंबर 2 में कोई चुनाव प्रचार नहीं किया, क्योंकि वह उनका क्षेत्र नहीं था। फिर भी, यह आश्चर्यजनक था कि मतदान के बाद उन्हें वहां 21 वोट मिले। राज कुमार का यह आरोप है कि यदि अधिकारी सजग रहते और उन्हें उनके असली वार्ड नंबर 26 से चुनाव लड़ने का मौका मिलता, तो नतीजे पूरी तरह भिन्न हो सकते थे।
सपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मदन शर्मा ने पार्षदों के संपत्ति शपथ पत्रों की जांच और प्रधान के चुनाव पर रोक की मांग को लेकर राज्य चुनाव आयोग से निम्नलिखित अनुरोध किया है कि वार्ड नंबर 2 और 26 के चुनावों को तुरंत रद्द कर पुनर्मतदान कराया जाए। उन्होंने चुनाव ड्यूटी पर तैनात लापरवाह अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की है। मदन शर्मा ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि केवल जीरकपुर ही नहीं, डेराबस्सी और लालडू नगर परिषद के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों के संपत्ति संबंधी शपथ पत्रों की भी गहनता से जांच की जानी चाहिए। सपा नेता ने स्पष्ट कहा कि जब तक पूरे धांधली मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती, तब तक जीरकपुर नगर परिषद के प्रधान के चुनाव की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर राज्य चुनाव आयोग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे न्याय के लिए माननीय न्यायालय का सहारा लेंगे। इस बीच, इन गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग या स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नगर परिषद चुनाव में गड़बड़ी के आरोप, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल
नगर परिषद चुनावों को लेकर नया विवाद उभरा है, जिसने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न किया है। विपक्षी नेताओं और कुछ उम्मीदवारों ने चुनावी व्यवस्थाओं में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी जांच मांगी है। एक प्रेस वार्ता में राजनीतिक प्रतिनिधियों ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई त्रुटियों से लोकतांत्रिक प्रणाली की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में उम्मीदवारों से संबंधित सूचना और वार्ड आवंटन के बारे में भ्रम उत्पन्न हुआ। विवाद का केंद्र एक उम्मीदवार का मामला बन गया, जिसने आरोप लगाया कि उसका नामांकन एक वार्ड से हुआ था, लेकिन उसे दूसरे वार्ड से उम्मीदवार के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इस कथित प्रशासनिक गलती ने चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप लगाने वाला उम्मीदवार कहता है कि संबंधित वार्ड में उसने चुनाव प्रचार नहीं किया, क्योंकि वह उसका निर्धारित क्षेत्र नहीं था। फिर भी चुनाव परिणामों में उसके नाम पर वोट दर्ज होने की बात सामने आई, जिससे पूरे मामले पर संदेह और बढ़ गया।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि नामांकन और उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारियों में इस तरह की गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सकेगा। मामले में चुनाव अधिकारियों की भूमिका भी चर्चा का विषय है। कई नेताओं ने यह मांग की है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है, तो उचित कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जमा किए गए संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच करने की भी मांग उठाई गई है। नेताओं का तर्क है कि जनप्रतिनिधियों से संबंधित सभी जानकारी पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे। चुनावी विवाद के बीच कुछ राजनीतिक नेताओं ने संबंधित वार्डों में पुनर्मतदान की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो मतदाताओं को दोबारा मतदान का अवसर दिया जाना चाहिए। इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं और अब सभी की नजरें चुनाव आयोग तथा प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और अगले कदम क्या उठाए जाएंगे।










