पंजाब में एनआरआई विवाह धोखाधड़ी के मामले एक बार फिर गंभीर बहस का विषय बन गए हैं। पंजाब महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष बलजीत कौर ने इस समस्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह अब एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में लगभग 32 हजार महिलाएं एनआरआई विवाह धोखाधड़ी की शिकार हुई हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बेहद चिंताजनक है और यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में धोखे और उपेक्षा का सामना कर रही हैं। बलजीत कौर ने कहा कि विदेशों में बसे भारतीयों से विवाह को लेकर कई परिवार बड़े सपने देखते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह संबंध टूटे हुए विश्वास और बर्बाद जीवन की कहानी बन जाते हैं। शादी के बाद कई पति विदेश जाकर अपनी पत्नियों से संपर्क तोड़ देते हैं, जिससे महिलाएं मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में महिलाओं को केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई परिवार अपनी पूरी जीवनभर की जमा पूंजी बेटी की शादी में लगा देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें न्याय के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है। यह स्थिति पंजाब के सामाजिक ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाएं न्याय पाने के लिए लंबे समय तक अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन समय पर समाधान नहीं मिल पा रहा है।

बलजीत कौर ने केंद्र सरकार से मांग की कि
एनआरआई विवाह धोखाधड़ी से संबंधित मामलों को रोकने के लिए दृढ़ और प्रभावी कानून तैयार किए जाने चाहिए। विदेश में रहने वाले पतियों पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष कानूनी प्रावधान स्थापित किए जाने चाहिए, जो विवाह के बाद अपनी पत्नियों को छोड़ देते हैं या ठगी करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में दोषियों के पासपोर्ट रद्द करने, संपत्ति जब्त करने, गिरफ्तारी वारंट जारी करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई को तेज बनाने के लिए स्पष्ट और कठोर कानूनी प्रावधान होना आवश्यक है। इसके साथ ही पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन आवश्यक है। बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब महिला कांग्रेस इस समस्या को लगातार उठाती रहेगी और एनआरआई विवाह धोखाधड़ी की शिकार सभी महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेगी। पंजाब की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। अंत में बलजीत कौर ने कहा कि सरकारों को अब सिर्फ डेटा तक सीमित रहने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी पंजाबी बेटी का जीवन इस प्रकार की धोखाधड़ी के कारण बर्बाद न हो। पंजाब में एनआरआई विवाह धोखाधड़ी का मुद्दा एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पंजाब महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष बलजीत कौर ने कहा है कि यह समस्या अब व्यक्तिगत मामलों से परे एक बड़े सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है, जिस पर तुरंत सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में लगभग 32 हजार महिलाएं एनआरआई विवाह धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी हैं। यह संख्या न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह दिखाती है कि कई परिवारों का जीवन इससे गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है। कई परिवार अपनी पूरी बचत विवाह पर खर्च कर देते हैं, लेकिन उन्हें न्याय पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। यह समस्या पंजाब के माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों में अधिकतम रूप से देखी जाती है, जहां एनआरआई विवाहों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इसी कारण इन क्षेत्रों में इन मामलों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि एनआरआई विवाह धोखाधड़ी को रोकने के लिए कठोर और प्रभावी कानून बनाए जाएं। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष कानूनी प्रावधान जरूरी हैं, जिससे पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय मिल सके। बलजीत कौर ने सुझाया कि ऐसे मामलों में दोषियों के पासपोर्ट निरस्त करने, संपत्ति जब्त करने और गिरफ्तारी के वारंट जारी करने जैसे कठोर कदम लेने चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सहयोग को भी मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित महिलाओं के लिए त्वरित निपटारे की अदालतों की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें वर्षों तक न्याय के लिए न रुकना पड़े। इससे मामलों का समाधान तेजी से होगा और पीड़ितों को राहत मिलेगी। अंत में उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक या कानूनी समस्या नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। सरकार को अब ठोस कदम उठाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी बेटी का जीवन इस प्रकार की धोखाधड़ी से प्रभावित न हो।