आज देश में सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण रूप से शुरू हो गया है। इन उपचुनावों के नतीजे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के साथ 14 नवंबर, 2025 को घोषित किए जाएंगे। मतदान में व्यापक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ की गई हैं और चुनाव आयोग ने निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव कराने के निर्देश जारी किए हैं।
किन सीटों पर हो रहा मतदान
आज जिन आठ निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग हो रही है जम्मू-कश्मीर के बडगाम और नगरोटा, राजस्थान की अंता सीट, झारखंड की घाटशिला (एसटी), तेलंगाना की जुबली हिल्स, पंजाब की तरनतारन, मिजोरम की डम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा इन सभी क्षेत्रों में स्थानीय और राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर असर डालने वाली जिज्ञासाएँ रही हैं।

जम्मू-कश्मीर की बड़गाम और नगरोटा सीट
बडगाम सीट- यह सीट मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दो सीटों से जीतने के बाद गंदेरबल को रखते हुए अक्तूबर 2024 में छोड़ने के कारण खाली हुई थी। इस बार यहाँ नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और भाजपा समेत कई पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में हैं। मुखियमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने पार्टी प्रत्याशी के लिए प्रचार –प्रसार भी किया। कुल 17 उम्मीदवार इस सीट पर चुनाव के लिए उम्मीदवार हैं।
नगरोटा सीट 31 अक्तूबर 2024 को भाजपा विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद रिक्त हुई। भाजपा ने दिवंगत विधायक की पुत्री देवयानी राणा को अब इस सीट पर उम्मीदवार बनाया गया है। मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा बनाम नेशनल कॉन्फ्रेंस का माना जा रहा है। नगरोटा में लगभग 97,893 मतदाता और 154 मतदान केंद्र हैं।
राजस्थान की अंता (बारां जिला)
राजस्थान की अंता सीट उस समय खाली हुई जब विधायक कंवरलाल मीणा को 20 साल पुराने मामले में दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई और वे अयोग्य घोषित हुए। यहाँ कुल 2,27,563 मतदाता और 268 पोलिंग केंद्र बनाए गए हैं। इस बार चुनाव त्रिकोणीय हो गया है कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया, भाजपा से मोरपाल सुमन और कांग्रेस के बागी नरेश मीणा ने निर्दलीय रूप से ताल ठोककर मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसके अलावा 12 अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
पंजाब की तरनतारन सीट
पंजाब की तरनतारन सीट आप विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद रिक्त हुई थी। इस उपचुनाव में चार बड़े दलों कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने प्रमुख उम्मीदवार उतारे हैं। AAP ने हरमीत संधू को मैदान में उतारा है जिन्होंने अकाली दल छोड़कर AAP जॉइन किया था।कांग्रेस ने करणबीर सिंह बुर्ज को अपना प्रत्याशी बनाया है।भाजपा पार्टी की ओर से हरजीत सिंह संधू मैदान में हैं।अकाली दल की और से सुखविंदर कौर रंधावा उम्मीदवार हैं ।
यह सीट पंजाब की राजनीतिक हलचल में नज़दीकी नजर रखे जाने वाली मानी जा रही है क्योंकि पंजाब में 2027 में चुनाव होने वाले हैं।

झारखंड की घाटशिला (एसटी) सीट
पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के कारण खाली हुई घाटशिला सीट खाली हो गई थी।इस सीट पर कुल 2,56,352 मतदाता हैं और उपचुनाव के लिए 300 बूथ बनाए गए हैं। इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशी हैं। जिनमें 9 ऐसे हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। प्रमुख दावेदारों में भाजपा ने बाबूलाल सोरेन (पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र) को मैदान में उतारा है।सत्तारूढ़ झामुमो ने दिवंगत रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन को उम्मीदवार बनाया है।JLKM के रामदास मुर्मू भी इस बार मैदान में हैं।भाजपा ने इस सीट को प्रतिष्ठा का मामला बना लिया है और बड़े नेता सक्रिय रूप से प्रचार में लगे रहे।
तेलंगाना की जुबली हिल्स (हैदराबाद)
BRS विधायक मगंती गोपीनाथ के जून 2025 में निधन के बाद यह सीट खाली हुई। जुबली हिल्स में कुल 4.01 लाख मतदाता हैं और इस बार चुनाव त्रिकोणीय है कांग्रेस, BRS और भाजपा के बीच। इस सीट के प्रमुख उम्मीदवार BRS ने दिवंगत गोपीनाथ की पत्नी सुनीता को टिकट दिया है।भाजपा ने एल दीपक रेड्डी को उतारा है।सत्तारूढ़ कांग्रेस के नविन यादव हैं, जिन्हें AIMIM का समर्थन भी प्राप्त है। कुल 58 उम्मीदवार इस सीट पर नामांकन किए थे, पर मुख्य मुकाबला तीन बड़े दलों के बीच देखा जा रहा है।
मिजोरम की डम्पा
यह सीट 21 जुलाई को MNF विधायक लालरिन्टलुआंगा सैलो के निधन के बाद खाली हुई। डम्पा में कुल 21,003 मतदाता हैं और पांच प्रमुख उम्मीदवार हैं जिनमें ZPM, MNF, कांग्रेस और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नाम शामिल हैं। चुनाव आयोग ने यहाँ भी विशेष सुरक्षा और व्यवस्था लागू की है। साथ ही, चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री लालदूहोमा पर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस भी जारी हुआ है जिस पर विपक्ष ने शिकायत दर्ज कराई थी।
ओडिशा की नुआपाड़ा सीट
BDZ विधायक व पूर्व मंत्री राजेंद्र ढोलकिया के निधन के बाद नुआपाड़ा सीट खाली हुई थी। यहाँ कुल 2.53 लाख मतदाता हैं और 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने दिवंगत विधायक के बेटे जय ढोलकिया को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस और BDZ ने भी जोरदार प्रचार किया है। BDZ ने सेनहंगिनी छुरिया को मैदान में उतारा है और कांग्रेस के घासी राम माझी भी प्रमुख दावेदार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी छुरिया के साथ मिलकर प्रचार किया।
चुनाव आयोग की तैयारियाँ और सुरक्षा
चुनाव आयोग ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं । सुरक्षा तैनाती, बूथ-लेवल प्रशिक्षण, मॉक पोलिंग और मतदाता जागरूकता अभियानों के साथ-साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल और अन्य स्वास्थ्य-सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने मतदान केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएँ की हैं ताकि लंबी कतारों का प्रबंधन और विशेष जरूरतों वाले मतदाताओं की सुविधा बनी रहे।
राजनीतिक मायने और नज़रें 14 नवंबर पर
इन उपचुनावों के नतीजे 14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के साथ घोषित होंगे, इसलिए राजनीतिक दल इन सीटों पर अपने संगठनात्मक कद और स्थानीय समर्थन का आकलन करने के लिए विशेष रूप से उत्साहित हैं। कई स्थानों पर ये उपचुनाव आगामी सालों की राजनीति और पार्टी रणनीतियों के लिए संकेतक भी माने जाएंगे।
आज के उपचुनाव स्थानीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय दलों की रणनीतियों का परीक्षण भी हैं। जहाँ कुछ सीटों पर परिवारिक उत्तराधिकार और पार्टियों की साख दांव पर है, वहीं अन्य जगहों पर नए चेहरों और बदलते समीकरणों ने चुनावी परिदृश्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नतीजे 14 नवंबर को घोषित होने के बाद ही राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर व्यापक राजनीतिक समीक्षाएँ शुरू होंगी।










