पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि मेडिकल जांच में उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई छात्रों के हितों के लिए जारी रहेगी। अभिजीत दीपके ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार बुखार और कमजोरी महसूस हो रही थी। डॉक्टरों से जांच कराने के बाद रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि उनका इलाज शुरू हो चुका है और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार दवाइयां और अन्य चिकित्सकीय देखभाल जारी है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद दीपके ने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इस कारण उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत बना हुआ है। उन्होंने समर्थकों से भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में छात्र और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। अभिजीत दीपके की तबीयत खराब होने के बाद भी आंदोलन की गतिविधियां जारी हैं। संगठन के नेताओं का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग से जुड़ा अभियान है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर बनी रहेगी।

भूख हड़ताल पर भी थे दीपके, बिगड़ी थी तबीयत
पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में अभिजीत दीपके शुरुआत से ही सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंदोलन के दौरान उन्होंने लगातार छात्रों की मांगों का समर्थन किया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रदर्शन के कई चरणों में वे अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिए। 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया। इसके बाद अभिजीत दीपके ने विरोध स्वरूप भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। उनका कहना था कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए। भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने पर उन्होंने डॉक्टरों से जांच कराई। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया। फिलहाल वे चिकित्सकीय देखरेख में हैं और नियमित उपचार ले रहे हैं। उनकी तबीयत खराब होने की खबर के बाद आंदोलन की गति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं, लेकिन आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि छात्रों की सामूहिक मांगों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य पर आधारित है। इस बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच तीसरे दौर की बैठक होने की संभावना है, जिसमें आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर चर्चा की जाएगी। अब सभी की नजर इस बैठक के नतीजों पर है, क्योंकि इससे आगे की रणनीति और आंदोलन की दिशा तय हो सकती है।
प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो कठोर फैसला लेंगे
पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बातचीत का दौर जारी है। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि हाल ही में हुई बैठक में मुआवजे और कानूनी पहलुओं को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है और जल्द ही इन पर लिखित सहमति मिलने की उम्मीद है। रांका ने स्पष्ट किया कि संगठन की सबसे महत्वपूर्ण मांग, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि यदि इस मांग पर सरकार कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो बातचीत का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय करेगा। आशुतोष रांका ने यह भी कहा कि मीडिया में सामने आई खबरों के अनुसार यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार नहीं कर रही है, तो आंदोलन को लेकर संगठन को नए फैसले लेने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि वार्ता से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। इस बीच संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि टाइफाइड होने के बाद भी उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा छात्रों के हितों की लड़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा अभियान है। उनका दावा है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, संगठन अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगा। अब सभी की नजर सरकार और CJP के बीच होने वाली अगली बैठक पर टिकी है, जहां इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है।
पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। वार्ता के बाद कुछ बिंदुओं पर सकारात्मक प्रगति की जानकारी सामने आई, लेकिन संगठन का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बैठक के बाद कहा कि मुआवजे और कानूनी मामलों से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार का रुख सकारात्मक रहा है। उनके अनुसार कुछ विषयों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है और संगठन को उम्मीद है कि जल्द ही इन पर लिखित आश्वासन भी मिल सकता है। उन्होंने इसे बातचीत की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। रांका ने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह संगठन की सबसे अहम मांगों में शामिल है और जब तक इस पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन की दिशा में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है। इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है। उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा। अब सभी की नजर सरकार और CJP के बीच होने वाली अगली बैठक पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाली वार्ता में प्रमुख मांगों पर सहमति बनने या गतिरोध कायम रहने से आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी। फिलहाल दोनों पक्ष समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने की बात कह रहे हैं।










