Supreme Court of India ने आवारा और खतरनाक कुत्तों से जुड़े मामले में एक अहम टिप्पणी करते हुए जन सुरक्षा को सर्वोपरि बताया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई आवारा कुत्ता सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता है, तो उसे मानवीय तरीके से euthanize (इंजेक्शन देकर समाप्त) किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के साथ-साथ नागरिकों को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार भी प्राप्त है। इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि संबंधित अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश उन मामलों में सख्ती बढ़ाने के लिए दिया गया है, जहां नियमों के पालन में लापरवाही सामने आती है। इससे पहले कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाकर आश्रय गृहों में रखने के निर्देश दिए थे। साथ ही सड़क पर कुत्तों को भोजन देने पर भी रोक लगाई गई थी, जिसे लेकर कई पशु अधिकार संगठनों ने याचिकाएं दायर की थीं।
कोर्ट ने 3 राज्यों में कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं का उल्लेख किया।
राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में एक महीने के अंदर कुत्तों के काटने के 1084 मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें लगी हैं, जिनमें उनके चेहरों पर गहरे जख्म भी शामिल हैं। तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। सूरत में एक जर्मन पर्यटक को कुत्ते ने काट लिया। इस प्रकार की घटनाएं शहरी प्रशासन पर नागरिकों का भरोसा कमजोर करती हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने 9 आदेश जारी किए, कहा- नियमों को कड़ा किया जाए। राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को सशक्त बनाएं और प्रभावी ढंग से लागू करें। हर जिले में न्यूनतम 1 सक्रिय ABC सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) स्थापित किया जाए। जहां जनसंख्या अधिक है, वहां आवश्यकतानुसार ABC केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए। कोर्ट के निर्देशों और पशु कल्याण कानूनों का सम्पूर्ण रूप से पालन किया जाए। जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी ये नियम लागू करने का निर्णय लिया जाए और इसे निर्धारित समय में प्रभावी बनाया जाए।

एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या को हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का उपयोग कर उन्हें हटाना। इसके लिए NHAI ने मॉनिटरिंग और समन्वय व्यवस्था भी स्थापित की रेबीज से प्रभावित या अत्यंत खतरनाक कुत्तों के मामलों में, कानून के तहत आवश्यकता पड़ने पर euthanasia (दया मृत्यु) जैसे उपाय किए जा सकते हैं ताकि मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कोर्ट के आदेशों को लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए। आमतौर पर उनके खिलाफ FIR या कठोर कार्रवाई न की जाए।
29 जनवरी अदालत की सख्त चेतावनी हमारी बात को मजाक न समझें
कोर्ट ने पिछले वर्ष स्वतः संज्ञान लिया था।
यह मामला 28 जुलाई 2025 को प्रारंभ हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वयं संज्ञान लिया था। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते के अंदर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय केंद्र में भेजने का निर्देश दिया था। इसके विरोध में होने वाले प्रदर्शन के चलते 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया। कोर्ट ने बताया कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो हिंसक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। बाद में मामले का क्षेत्र पूरे देश में फैला दिया गया। 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अस्थायी आदेश में राज्यों और NHAI को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और अन्य संस्थानों के पास से आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया।










