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Sanjay Raut का बागी सांसदों को सख्त संदेश

Maharashtra की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रही हलचल के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने संभावित बगावत को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर किसी सांसद को पार्टी छोड़नी है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। संजय राउत ने कहा कि जिन सांसदों को पार्टी ने टिकट दिया, चुनाव में समर्थन दिया और जनता के बीच पहुंचाकर संसद तक भेजा, उनसे उम्मीद की जाती है कि वे संगठन के प्रति ईमानदार रहें। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी छोड़ने की स्थिति में नैतिक रूप से पहले इस्तीफा देना जरूरी है, उसके बाद ही कोई आगे का कदम उठाया जाए। शिवसेना (यूबीटी) के लगभग छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि इन सांसदों की शिंदे खेमे के नेताओं से मुलाकात भी हुई है, हालांकि इस बारे में अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी बीच संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब तक किसी सांसद की ओर से लिखित रूप में इस्तीफा या आधिकारिक सूचना नहीं आती, तब तक सभी सांसद पार्टी के सदस्य ही माने जाएंगे। राउत ने यह भी कहा कि मीडिया में चल रही कई खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि हाल ही में हुई पार्टी बैठक में सभी सांसदों ने एकजुट रहने की बात कही थी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में भरोसा जताया था। ऐसे में अचानक सामने आ रही बगावत की खबरें पार्टी के लिए चिंता का विषय जरूर हैं, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राउत ने अपने बयान में यह भी कहा कि पार्टी ने इन सांसदों को सिर्फ टिकट ही नहीं दिया, बल्कि चुनावी तैयारियों में भी पूरा सहयोग किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई नेता पार्टी और जनता के भरोसे के खिलाफ जाकर अलग रास्ता चुनता है, तो उसे इसका राजनीतिक परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी और सत्तापक्ष दोनों ही इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि यह सिर्फ राजनीतिक अटकलें हैं या फिर वास्तव में कोई बड़ा सियासी बदलाव होने वाला है।

इस्तीफा देकर जाओ‘, संजय राउत की सांसदों की दो टूक

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रही हलचल के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बागी सांसदों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर किसी को पार्टी छोड़नी है, तो पहले औपचारिक रूप से इस्तीफा देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। संजय राउत ने दो टूक कहा कि जो सांसद पार्टी से अलग होना चाहते हैं, उन्हें पहले अपना इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सांसद जनता के वोटों से चुनकर संसद पहुंचे हैं और उनकी जिम्मेदारी पार्टी और मतदाताओं दोनों के प्रति है। राउत ने यह भी बताया कि पार्टी की ओर से व्हिप जारी किया गया है, जिससे सभी सांसदों को संगठनात्मक निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी को निर्धारित नियमों के तहत ही काम करना होगा। उन्होंने जानकारी दी कि कल संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। राउत के अनुसार यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सांसदों की मौजूदगी और उनकी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर औपचारिक पत्र भेजा गया है। पार्टी का उद्देश्य संसदीय स्तर पर अपनी स्थिति को स्पष्ट रखना और किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति से बचना है। संजय राउत के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, खासकर यदि किसी तरह की आधिकारिक बगावत सामने आती है।

भगवान और मां की शपथ लेकर कहा था उद्धव ठाकरे के साथ हैं

संजय राउत ने कहा कि पिछले रविवार को हुई सांसदों की मीटिंग में सभी ने यह बात स्वीकार कीि वे पार्टी और उद्धव ठाकरे के पक्ष में हैं. उनमें से एक सांसद ने साईं बाबा की चार बार शपथ ली थी। एक ने मां भवानी की कस्मे खाई थी. एक ने अपनी माता की कसम खाई। उसके बाद भी यदि कोई ऐसा करेगा तो हम नहीं छोड़ेंगे। अरविंद सावंत के अनुसार, अभी तक किसी ने उनसे कुछ नहीं बोला है। किसी ने यह नहीं कहा कि वह पार्टी से जा रहे हैं। हालांकि, यूबीटी प्रबंधन सतर्क रहना चाहता है। इसलिए ओम बिरला को पत्र भेजा गया है। यूबीटी के लगभग छह सांसदों का एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ सांसदों ने हाल ही में शिंदे गुट के नेताओं से मुलाकात भी की है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन अटकलों के बीच संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि किसी सांसद ने औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, इसलिए वे अभी भी सभी को पार्टी का हिस्सा मानते हैं। राउत ने यह भी कहा कि जब तक लिखित सूचना नहीं मिलती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि हाल की पार्टी बैठक में सभी सांसदों ने एकजुटता दिखाने की बात कही थी। राउत के अनुसार, बैठक में सभी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर विश्वास जताया और पार्टी के साथ बने रहने का आश्वासन दिया था। इसी कारण मौजूदा चर्चाएं और भी चौंकाने वाली लग रही हैं।
राउत ने अपने बयान में यह कहा कि पार्टी ने इन सांसदों को सिर्फ टिकट नहीं दी, बल्कि चुनावी अभियान में हर स्तर पर समर्थन किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर कोई नेता अब अलग रास्ता अपनाता है, तो यह जनता के विश्वास के साथ अन्याय होगा, जिसने उन्हें संसद में भेजा है। दूसरी ओर, पार्टी के कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और सभी सांसदों से संपर्क में रहा जा रहा है। उनका मानना है कि बातचीत के माध्यम से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसी तरह का विभाजन न हो। इसी बीच संसद से जुड़े प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि यूबीटी खेमे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और पार्टी की एकजुटता बनाए रखने की बात कही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव का संकेत मिल सकता है। यदि कोई महत्वपूर्ण दलबदल होता है, तो इसका प्रभाव राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन पर भी पड़ेगा। सभी की निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये महज राजनीतिक अटकलें हैं या वास्तव में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर कोई बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है।

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