Ayodhya के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब केवल जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस विवाद ने सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने एक बार फिर इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब मामला सीधे जनता की आस्था से जुड़ा हो, तो सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राम मंदिर से जुड़े बड़े कार्यक्रमों का श्रेय और नेतृत्व सामने आता है, तो ऐसी परिस्थितियों में जिम्मेदारी से दूरी क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने पूछा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का आधिकारिक रुख क्या है। प्रियांक खरगे ने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि विश्वास और पारदर्शिता से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, अगर धार्मिक संस्थानों में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। उनके अनुसार, केवल बयानबाजी से जनता के सवालों का समाधान नहीं होता। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार अक्सर धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक लाभ लेती है, लेकिन जब गंभीर सवाल उठते हैं तो जवाब देने से बचती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी यही पैटर्न दिखाई दे रहा है। इस बीच, जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में वित्तीय रिकॉर्ड, दान की गिनती और बैंक में जमा प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। कुछ कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि प्रक्रिया में कहीं कोई चूक या गड़बड़ी तो नहीं हुई। सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और कुछ स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई है। इसके साथ ही ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे ने भी स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष का दावा है कि इस मामले में जवाबदेही तय करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
