डिजिटल टैक्स विवाद पर ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी कंपनियों पर लगाए जा रहे डिजिटल टैक्स को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी कदम का जवाब सख्त आर्थिक कार्रवाई से दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा है कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाकर डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) लागू करता है, तो उस देश के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। यह शुल्क 100 प्रतिशत तक हो सकता है, जिससे व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि यह कार्रवाई किसी भी मौजूदा या भविष्य के व्यापार समझौतों से ऊपर मानी जाएगी। यानी समझौते होने के बावजूद इस फैसले को लागू किया जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह संदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कई देश अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस तरह के टैक्स लगाने की तैयारी में हैं। इस विवाद की पृष्ठभूमि डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक टैक्स नीति को लेकर लंबे समय से चल रहे मतभेदों से जुड़ी है। अमेरिका का मानना है कि ऐसे टैक्स उसके तकनीकी क्षेत्र को असमान रूप से प्रभावित करते हैं।

किसी भी ट्रेड एग्रीमेंट से ऊपर माना जाएगा नया टैक्‍स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिजिटल टैक्स को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने बयान में इसे “अंतिम चेतावनी” बताते हुए साफ कर दिया है कि इस दिशा में आगे बढ़ने वाले किसी भी देश को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। यदि कोई देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स लागू करता है, तो उसके अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर तुरंत प्रभाव से 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नया टैरिफ किसी भी मौजूदा व्यापार समझौते से ऊपर माना जाएगा। चाहे समझौता पहले से लागू हो, उस पर हस्ताक्षर हुए हों या नहीं, यह कार्रवाई फिर भी लागू रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह कदम अमेरिका के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है और इसे बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव में लाया जाएगा। उनके बयान के बाद वैश्विक व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है। इस तरह की सख्त नीति से अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है, खासकर उन देशों के साथ जो डिजिटल अर्थव्यवस्था पर नया टैक्स सिस्टम लागू करने की तैयारी में हैं।

टेक्नोलॉजी कंपनियों पर विदेशी टैक्स के खिलाफ

यह पहली बार नहीं है, जब ट्रंप अमेरिकी टेक कंपनीज़े खिलाफ विदेशी टैक्स या नियमों के लिए खड़े हुए हैं। पिछले साल अगस्त में उन्होंने ऐसे देशों पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दी थी। उनका हमेशा यह मानना था कि इस प्रकार के डिजिटल टैक्स और सख्त नियम केवल और केवल अमेरिकी टेक्नोलॉजी क्षेत्र को नुकसान पहुँचाने और उनके साथ भेदभाव करने के इरादे से बनाए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सूचना बिल्कुल उसी समय आई है, जब अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच टैरिफ एग्रीमेंट को स्वीकृति देने की 4 जुलाई की समय सीमा बेहद करीबी है। महीनों की चर्चाओं के बाद यूरोपीय यूनियन की चेयरपर्सन उर्सुला वॉन डेर लेयन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच स्कॉटलैंड में संपन्न मुलाकात के बाद मई में इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया था। इस समझौते के तहत अधिकतर यूरोपीय निर्यात पर शुल्क की सीमा 15% निर्धारित की जानी थी। इस संपूर्ण एग्रीमेंट में डिजिटल सर्विसेज टैक्स का विषय शामिल नहीं था। यह लंबे समय से वाशिंगटन और यूरोपीय संघ के बीच संघर्ष का मुख्य कारण बना हुआ था। ट्रंप की हालिया चेतावनी के चलते दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव और बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि यह टैक्स सभी वर्तमान और पूर्व व्यापार समझौतों से ऊपर रखा जाएगा। यानि अगर कोई देश पहले से किसी ट्रेड एग्रीमेंट में है, तब भी इस निर्णय के बाद अमेरिकी कार्रवाई लागू हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर यह सूचना दीि कई देश अमेरिकी टेक कंपनियों को लक्षित करनेे लिए डिजिटल टैक्स लागू करने की योजना बना रहे हैं। इसे उन्होंने अनुचित और एकतरफा कदम कहा है। इस पूरे विवाद ककारण डिजिटल अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण और टैक्स नीति के संबंध में विभिन्न देशों के दृष्टिकोण का भिन्नता माना जा रहा है। कई राष्ट्र, जिसमें यूरोपीय देश शामिल हैं, डिजिटल कंपनियों से अधिक टैक्स वसूलने की मांग करत रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका का तर्क है कि ऐसे टैक्स खासतौर पर उसकी बड़ी टेक कंपनियों को प्रभावित करते हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को असंतुलित करते हैं। इस कारण दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से टकराव बना हुआ है। यह मामला उस समय और भी संवेदनशील हो गया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पहले से व्यापारिक समझौतों पर बातचीत जारी है। हाल ही में दोनों पक्षों ने कुछ शर्तों पर सहमति व्यक्त की थी, लेकिन डिजिटल टैक्स का मुद्दा अब भी सुलझा नहीं है। यदि यह विवाद और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और तकनीकी क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से उन कंपनियों पर जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल सेवाएं देती हैं। सभी देशों की निगाह इस बात पर है कि आने वाले समय में अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं। बातचीत से समाधान निकलता है या तनाव और बढ़ता है, यह भविष्य ही बताएगा।
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