Hoshiarpur के सिविल सर्जन कार्यालय में आम आदमी क्लीनिकों से जुड़े मेडिकल कर्मचारियों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। इस धरने में एमबीबीएस डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी नौकरी को कोई स्थिरता नहीं मिली। उनका आरोप है कि सरकार उन्हें स्थायी करने के बजाय दिहाड़ी कर्मचारियों की तरह काम करवा रही है, जिससे वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि पिछली सरकारों के समय भी कर्मचारियों की भर्ती कॉन्ट्रैक्ट आधार पर होती थी, लेकिन मौजूदा सरकार से उन्हें काफी उम्मीदें थीं। उनका कहना है कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और रोजगार सुरक्षा देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इन वादों को पूरा नहीं किया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कम वेतन, अस्थायी नियुक्ति और नौकरी की असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब भी वे अपनी मांगों को लेकर सरकार के पास जाते हैं, तो केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे स्वास्थ्य मंत्री के साथ कई बार बैठक कर चुके हैं। हर बार उन्हें भरोसा दिया गया कि उनकी मांगों पर जल्द फैसला लिया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे मेडिकल कर्मचारियों में निराशा और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। जरूरत पड़ने पर पूरे पंजाब स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। आम आदमी क्लीनिकों से जुड़े मेडिकल कर्मचारियों का यह विरोध सरकार के लिए एक नई चुनौती बनता नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर कब और क्या फैसला लेती है, या फिर यह विरोध आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलन का रूप लेता है।

Hoshiarpur के सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर आम आदमी क्लीनिकों में कार्यरत मेडिकल कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में एमबीबीएस डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोजगार सुरक्षा और सेवा संबंधी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी अब भी अस्थायी बनी हुई है। उनका आरोप है कि नियमित सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया, जिससे उनके भविष्य को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि नई सरकार बनने के बाद उनकी सेवा शर्तों में सुधार होगा और उन्हें स्थायी नियुक्ति का लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादों के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि वे कम वेतन, अनुबंध आधारित नियुक्ति और नौकरी की असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं। वे अपनी मांगों को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। हर बार उन्हें जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यदि सरकार जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में पंजाब स्तर पर संयुक्त प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जा सकता है। मेडिकल कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल नौकरी पक्की करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बेहतर सेवा शर्तें, सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा भी चाहते हैं। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कर्मचारियों का मनोबल मजबूत होना भी जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और कर्मचारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। यह मामला स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है। यदि जल्द कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।










