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कौमी इंसाफ मोर्चा व किसान यूनियनों ने सिख बंदियों की रिहाई और अन्य मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर से दिल्ली की और की कूच

सिख बंदियों की रिहाई और अन्य मांगों को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा पंजाब और विभिन्न किसान यूनियनों ने आज शंभू बॉर्डर से दिल्ली के लिए मार्च शुरू किया। सुबह से ही बॉर्डर पर मोर्चा और किसान संगठनों के सदस्यों की भारी संख्या में उपस्थिति हैं।दोपहर तक बड़ी संख्या में लोग बॉर्डर पर इकट्ठा हो चुके हैं और तय कार्यक्रम के अनुसार वे दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं।कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान यूनियनों के नेताओं ने बताया कि मार्च का उद्देश्य मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगों को लेकर है।सिख बंदियों की तत्काल रिहाई की जाए।धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी पर सख्त कानून लागू किया जाए।राजनीतिक बंदियों, जैसे कि सोनम वांगचुक, की तुरंत रिहाई की जाए।

पुलिस और प्रशासन की तैयारियाँ
किसानों के मार्च की घोषणा के बाद पंजाब और हरियाणा पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कई व्यवस्थाएँ की हैं। 13 नवंबर से ट्रैफिक डायवर्जन योजना लागू कर दी गई थी। आज सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक राजपुरा-अंबाला हाईवे पर ट्रैफिक पूरी तरह बंद रहेगा।

लुधियाना से अंबाला जाने वाले वाहनों को राजपुरा-बनूड़-जीरकपुर-डेराबस्सी-अंबाला मार्ग से डायवर्ट किया गया है। वहीं अंबाला से लुधियाना की ओर आने वाले वाहनों को भी यही रूट अपनाना होगा। फतेहगढ़ साहिब से अंबाला जाने वाले वाहनों को लांडरां- एयरपोर्ट चौक मोहाली-डेराबस्सी-अंबाला मार्ग से जाना होगा। पटियाला की तरफ से आने वाले वाहन घनौर मार्ग से डायवर्ट किए गए हैं।

शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था
शंभू बॉर्डर और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने हाईवे पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए रूट डायवर्जन की व्यवस्था की है।किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब (KMSC) का जत्था पहले ही शंभू बॉर्डर की ओर रवाना हो चुका है। कमेटी ने बताया कि यह मार्च श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी पर्व की पूर्व संध्या पर किया जा रहा है। कमेटी का कहना है कि देश और विदेश की जेलों में बंद सिखों को रिहा किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।इसके अलावा, कमेटी ने UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और अन्य ‘एंटी-नेशनल एक्ट’ के तहत गिरफ्तार छात्र नेताओं और बुद्धिजीवियों की रिहाई की भी मांग की है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण मार्च और ज्ञापन देने की अनुमति देने में विफल रही है।

लंगर और अन्य व्यवस्थाएँ
शंभू बॉर्डर पर किसानों और मोर्चा के सदस्यों के लिए लंगर और अन्य सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं। इससे सुनिश्चित किया गया है कि मार्च के दौरान किसी को किसी प्रकार की असुविधा न हो।कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि वार्ता और सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल, शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर मार्च शुरू हो चुका है और किसानों का मानना है कि यह शांतिपूर्ण विरोध और देश के विभिन्न हिस्सों के पंजाबियों को एकजुट करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

 

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