
कल ही हरिद्वार के लिए निकले थे चारों
चंडीगढ़ के सेक्टर-29 और सेक्टर-30 से जुड़े चारों युवक गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। उनका उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान गंगाजल लेकर अपने शहर लौटना था। परिजनों के अनुसार, सभी युवक उत्साह के साथ यात्रा पर निकले थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। हादसे की खबर मिलते ही परिवारों में मातम छा गया। जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई, वह स्नान के लिए अधिकृत घाट नहीं था। ज्वालापुर के जटवाड़ा पुल के पास लोगों को पानी में उतरने से रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद कुछ युवक गंगनहर में उतर गए। अधिकारियों का कहना है कि नहर के इस हिस्से में तेज बहाव के साथ नीचे दलदली मिट्टी भी है, जिससे पैर फंसने और संतुलन बिगड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है। एक युवक को पानी में संघर्ष करता देख उसके तीनों दोस्तों ने बिना अपनी जान की परवाह किए उसे बचाने की कोशिश की। हालांकि तेज धारा और गहराई के कारण चारों युवक खुद भी पानी में फंस गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद के लिए आवाज लगाई और पुलिस व राहत एजेंसियों को सूचना दी, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि उन्हें समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। घटना की जानकारी मिलते ही जल पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। प्रशिक्षित गोताखोरों ने कई घंटों तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। काफी प्रयासों के बाद चारों युवकों को नहर से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद सभी को मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की है कि वे गंगा और गंगनहर में केवल अधिकृत एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें। अधिकारियों ने कहा कि चेतावनी बोर्ड लगे स्थानों या प्रतिबंधित क्षेत्रों में पानी में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। साथ ही लोगों से सुरक्षा नियमों का पालन करने और किसी भी जोखिम से बचने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
घटना इतनी तेजी से हुई कि मौके पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। एक युवक को पानी में संघर्ष करता देख उसके तीन दोस्तों ने तुरंत उसकी मदद करने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव ने चारों को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही पलों में सभी युवक गहरे पानी में लापता हो गए, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया और राहत कार्य शुरू करने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर युवकों को बचाने की कोशिश की, लेकिन गंगनहर की गहराई और पानी की तेज रफ्तार के कारण किसी को सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस, जल पुलिस और एसडीआरएफ को तत्काल सूचना दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जहां यह हादसा हुआ, वह स्थान स्नान के लिए अधिकृत नहीं है। वहां पहले से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और लोगों को पानी में उतरने से मना किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, नहर के इस हिस्से में तेज बहाव के साथ दलदली तल होने के कारण पैर फंसने और संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल उन्हीं घाटों पर स्नान करें जिन्हें सुरक्षित घोषित किया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें और पुलिस व प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, निगरानी बढ़ाने और श्रद्धालुओं को लगातार जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा इंतजामों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।