Jammu and Kashmir के कुलगाम जिले में एक बार फिर आतंकियों ने आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है। शुक्रवार रात ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आतंकियों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यह हमला कुलगाम के केलम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर हुआ। बताया जा रहा है कि दो हथियारबंद आतंकी रात के समय वहां पहुंचे और काम कर रहे मजदूरों से पहले उनकी पहचान और नाम पूछा। इसके बाद उन्होंने बेहद नजदीक से दोनों पर गोलियां चला दीं और मौके से फरार हो गए। हमले के बाद आसपास मौजूद अन्य मजदूर और स्थानीय लोग तुरंत घायलों की मदद के लिए पहुंचे। दोनों को गंभीर हालत में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रातरे और 28 वर्षीय भूपेंद्र के रूप में हुई है। दीपक को सीने में गोली लगी थी, जबकि भूपेंद्र के पेट में गोली लगी थी। भूपेंद्र की हालत गंभीर होने पर उन्हें श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया। संदिग्ध आतंकियों की तलाश के लिए संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया है। सुरक्षा बल आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में भी सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। इस हमले की जिम्मेदारी कथित तौर पर द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन माना जाता है। संगठन ने कथित तौर पर भविष्य में भी ऐसे हमले जारी रखने की धमकी दी है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की भी जांच कर रही हैं। यह घटना पिछले नौ दिनों के भीतर कश्मीर में दूसरा बड़ा टारगेट अटैक मानी जा रही है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान जारी रहेगा। आम नागरिकों और बाहरी राज्यों से आए मजदूरों को निशाना बनाना आतंकियों की दहशत फैलाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नाम पूछा, फिर मारी गोली
शुक्रवार रात कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो हथियारबंद आतंकी वहां पहुंचे। हमलावर सीधे उन मजदूरों के पास गए जो काम खत्म करने के बाद अपने ठिकाने पर मौजूद थे। आतंकियों ने पहले उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए नाम पूछा और फिर बेहद नजदीक से गोलियां चला दीं। अचानक हुई फायरिंग से दोनों मजदूर गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकी यह समझकर मौके से भाग निकले कि दोनों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया और वहां मौजूद अन्य मजदूर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। कुछ देर बाद साथी मजदूर और आसपास के स्थानीय लोग घायल युवकों की मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी तथा प्राथमिक सहायता देने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों घायलों को बिना समय गंवाए अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने दोनों की हालत को बेहद गंभीर बताया और तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सा कर्मियों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गोलियां शरीर के संवेदनशील हिस्सों में लगने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और हमलावरों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय लोगों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आतंकियों की पहचान और उनके फरार होने के रास्तों का पता लगाने में जुटी है।

दोनों मजदूरों की मौत
घायल मजदूरों को गंभीर हालत में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया। अस्पताल प्रशासन ने दोनों की स्थिति को बेहद नाजुक बताते हुए उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उनकी चोटें काफी गंभीर थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद 24 वर्षीय दीपक रातरे को मृत घोषित कर दिया। वह छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और रोज़गार की तलाश में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। हमले में उनके सीने में गोली लगने से उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं, जिसके कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। दूसरे घायल मजदूर 28 वर्षीय भूपेंद्र की हालत भी लगातार बिगड़ती जा रही थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए देर रात श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया। चिकित्सकों ने वहां भी उनका गहन उपचार किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्होंने भी दम तोड़ दिया। भूपेंद्र के पेट में गोली लगने से कई अंदरूनी अंग प्रभावित हुए थे। अधिक रक्तस्राव और गंभीर आंतरिक चोटों के चलते उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी रही। डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। दोनों मजदूरों की मौत के बाद उनके साथियों और परिजनों में शोक की लहर है। प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां इस आतंकी हमले की हर पहलू से जांच कर रही हैं और दोषियों को जल्द पकड़ने के लिए अभियान जारी है।
9 दिनों में दूसरा टारगेट किलिंग
कुलगाम में हुआ यह आतंकी हमला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। पिछले नौ दिनों के भीतर यह दूसरा टारगेट अटैक है, जिसने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक इलाके में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लगातार हो रहे ऐसे हमले आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच भय का माहौल पैदा करने की कोशिश हैं। इसी वजह से घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। वारदात के तुरंत बाद आसपास मौजूद मजदूरों और स्थानीय लोगों ने घायल युवकों को बचाने का प्रयास किया। दोनों को गंभीर अवस्था में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने लगातार इलाज किया। बाद में एक घायल को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) भेजा गया, लेकिन दोनों मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी। मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ के दीपक रातरे और भूपेंद्र के रूप में हुई है। दोनों रोज़गार की तलाश में कश्मीर आए थे और ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू से मामले की जांच कर रही हैं। आसपास के जंगलों, संवेदनशील इलाकों और संभावित ठिकानों पर व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी है। साथ ही तकनीकी निगरानी, स्थानीय खुफिया इनपुट और अन्य सुरागों के आधार पर हमलावरों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
कुलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुट गई हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) नामक संगठन ने कथित तौर पर ली है। सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की सत्यता की पुष्टि करने के साथ-साथ हमले की साजिश, हमलावरों की पहचान और उनके स्थानीय नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है। पिछले कुछ दिनों में हुई टारगेट किलिंग की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का मानना है कि निर्दोष नागरिकों और बाहरी राज्यों से आए मजदूरों को निशाना बनाकर आतंकी संगठन भय और अस्थिरता का माहौल पैदा करना चाहते हैं। घटना के बाद केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हमले की कड़ी निंदा की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि आम नागरिकों पर हमला करने वालों के खिलाफ सुरक्षा बल पूरी सख्ती से कार्रवाई करेंगे और आतंकियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के प्रयास जारी रहेंगे। सुरक्षा बलों ने कुलगाम और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है, जबकि विभिन्न एजेंसियां तकनीकी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। साथ ही सीमावर्ती और संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा इंतजाम और मजबूत किए जा रहे हैं। ऐसी घटनाओं के बाद बाहरी राज्यों से आकर काम करने वाले मजदूरों, कर्मचारियों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी दिशा में प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और नियमित निगरानी की व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।