Punjabi singer Resham Singh Anmol ने अपनी नई लग्जरी डिफेंडर कार को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि पहली सर्विस के कुछ समय बाद ही उनकी गाड़ी अचानक सड़क पर चलते-चलते बंद हो गई। इसके बाद वाहन को सर्विस सेंटर भेजा गया, जहां जांच में फ्यूल पंप खराब होने की बात सामने आई। इस घटना के बाद उन्होंने ईंधन की गुणवत्ता और E20 पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए हैं। अनमोल के अनुसार सर्विस सेंटर में उन्हें बताया गया कि वाहन में इस्तेमाल किए गए ईंधन की वजह से फ्यूल पंप प्रभावित हुआ है। इसके बाद उन्होंने सामान्य E20 पेट्रोल भरवाना बंद कर दिया और केवल हाई-स्पीड पेट्रोल (XP95 और XP100) का उपयोग करने का फैसला किया। हालांकि उनका दावा है कि कई पेट्रोल पंपों पर जाने के बावजूद उन्हें यह प्रीमियम ईंधन उपलब्ध नहीं हो सका। रेशम सिंह अनमोल ने सरकार से मांग की है कि ऐसे पेट्रोल पंपों की आधिकारिक सूची जारी की जाए, जहां हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल आसानी से उपलब्ध हो। उनका कहना है कि यदि कुछ वाहनों के लिए विशेष प्रकार के ईंधन की आवश्यकता है, तो वाहन मालिकों को उसकी सही जानकारी और उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समस्या केवल उनकी नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी आ रही है। सिंगर के बड़े भाई निर्मल सिंह ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दिल्ली-बनूड़ रोड पर सफर के दौरान गाड़ी अचानक बंद हो गई थी। इसके बाद वाहन को चंडीगढ़ स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां जांच के बाद फ्यूल पंप बदलना पड़ा। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई, लेकिन इस संबंध में कोई लिखित निर्देश देने से इनकार कर दिया गया। रेशम सिंह अनमोल का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल, प्रीमियम ईंधन की उपलब्धता और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के रखरखाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि वाहन निर्माताओं और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन मालिकों को हमेशा निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन और रखरखाव संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
पंजाबी सिंगर की 4 बड़ी बातें…
पंजाबी सिंगर रेशम सिंह अनमोल ने एक वीडियो जारी कर अपनी नई डिफेंडर कार से जुड़ा अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि पहली सर्विस के बाद उनकी ब्रांड न्यू गाड़ी अचानक चलते-चलते बंद हो गई। उनके अनुसार घटना के बाद उन्होंने तुरंत कंपनी से संपर्क किया, जहां उन्हें वाहन की जांच करवाने की सलाह दी गई। बाद में सर्विस सेंटर में जांच के दौरान फ्यूल पंप खराब होने की जानकारी दी गई। अनमोल ने दावा किया कि कंपनी की ओर से उन्हें बताया गया कि ईंधन से जुड़ी समस्या के कारण फ्यूल पंप प्रभावित हुआ है। इसके बाद उन्होंने सामान्य पेट्रोल का उपयोग बंद कर दिया और अपनी गाड़ी में अधिकतर समय हाई-स्पीड पेट्रोल XP95 भरवाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वाहन की बेहतर परफॉर्मेंस के लिए अब वे केवल प्रीमियम ईंधन का इस्तेमाल करना चाहते हैं। सिंगर ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में उन्हें XP95 और XP100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि कई पेट्रोल पंपों पर जाने के बावजूद उन्हें यह ईंधन नहीं मिला। पंप कर्मचारियों ने भी बताया कि उनके पास यह प्रीमियम पेट्रोल उपलब्ध नहीं है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान दिक्कतें बढ़ रही हैं। रेशम सिंह अनमोल ने सरकार से अपील की कि ऐसे पेट्रोल पंपों की आधिकारिक सूची जारी की जाए, जहां XP95 और XP100 जैसे हाई-ऑक्टेन पेट्रोल उपलब्ध हों। उनका कहना है कि इससे वाहन मालिकों को सही स्थान पर ईंधन भरवाने में सुविधा होगी और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विशेष प्रकार के ईंधन की जरूरत है, तो उसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अपने वीडियो के अंत में अनमोल ने कहा कि कंपनी की ओर से उन्हें बताया गया है कि इसी तरह की समस्या कुछ अन्य वाहन मालिकों को भी हुई है। उन्होंने लोगों से अपने अनुभव साझा करने की अपील की और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया कि इस विषय पर उचित व्यवस्था और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वाहन चालकों को भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।


जानिए सिंगर के भाई ने दैनिक भास्कर को क्या बताया…
पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल की लग्जरी डिफेंडर एसयूवी को लेकर सामने आए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में उनके बड़े भाई डॉ. निर्मल सिंह नकटपुर ने पूरी घटना का क्रम बताते हुए दावा किया कि गाड़ी में आई खराबी का कारण सामान्य पेट्रोल बताया गया था। उन्होंने कहा कि कंपनी की ओर से मौखिक रूप से प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई, लेकिन इस संबंध में कोई लिखित जानकारी नहीं दी गई। डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि रेशम सिंह अनमोल के पास पहले रेंज रोवर स्पोर्ट्स थी, जिसका उपयोग उन्होंने वर्ष 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में किया था। उस दौरान गाड़ी पहले एक पेड़ की टहनी से क्षतिग्रस्त हुई और बाद में बाढ़ के पानी में फिसल गई। इसके बाद उन्होंने वह वाहन बेच दिया और 7 नवंबर 2025 को करीब 1.55 करोड़ रुपये की लागत से नई सफेद डिफेंडर-110 खरीदी। नई डिफेंडर खरीदने के कुछ महीनों बाद ही वाहन में तकनीकी समस्या सामने आई। मई 2026 में गाड़ी अचानक खराब हो गई, जिसके बाद उसे चंडीगढ़ स्थित सर्विस सेंटर भेजा गया। जांच के बाद फ्यूल पंप बदलना पड़ा। परिवार का दावा है कि सर्विस सेंटर ने मौखिक रूप से कहा कि भविष्य में इस गाड़ी में केवल प्रीमियम पेट्रोल ही डलवाया जाए, लेकिन जब इस सलाह को लिखित या ईमेल के माध्यम से देने का अनुरोध किया गया तो कंपनी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। निर्मल सिंह ने आगे बताया कि 27 मई 2026 को रेशम सिंह अनमोल एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में डिफेंडर अचानक बंद हो गई। कंपनी से संपर्क करने पर उन्हें कुछ समय तक गाड़ी स्टार्ट न करने की सलाह दी गई। बाद में वाहन को सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां जांच के बाद फ्यूल पंप बदल दिया गया। इस घटना के बाद वाहन की विश्वसनीयता और ईंधन गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में जब रेशम सिंह अनमोल छात्रों के समर्थन में दिल्ली जा रहे थे, तब रास्ते में उन्होंने कई पेट्रोल पंपों पर हाई-स्पीड पेट्रोल (XP95 और XP100) तलाशने की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह ईंधन उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपनी परेशानी साझा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। अब इस पूरे मामले के बाद प्रीमियम पेट्रोल की उपलब्धता और आधुनिक वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है।
1 अप्रैल से E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई
केंद्र सरकार ने देशभर में स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियां 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति करेंगी। इस फैसले का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण में कमी लाना है। E20 पेट्रोल कोई नई व्यवस्था नहीं है। देश के कई हिस्सों में इसकी शुरुआत वर्ष 2023 से ही हो चुकी थी, लेकिन उस समय इसे वैकल्पिक रूप से उपलब्ध कराया जा रहा था। अब सरकार ने इसे पूरे देश में लागू कर दिया है, जिससे सभी पेट्रोल पंपों पर इसी मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही एथेनॉल मिश्रण की नीति को राष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह लागू करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेज गति से आगे बढ़ाते हुए अपना लक्ष्य भी पहले तय समय से पहले हासिल करने का फैसला किया है। पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूरा किया जाना था, लेकिन इसे संशोधित कर 2025-26 तक कर दिया गया। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त बाजार भी मिलेगा। E20 पेट्रोल को लागू करने के पीछे पर्यावरण संरक्षण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। एथेनॉल एक जैव-ईंधन है, जिसका उत्पादन गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है और पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में इसे अधिक टिकाऊ ईंधन विकल्प माना जाता है। यही वजह है कि सरकार लगातार एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। नई ईंधन नीति के लागू होने के बाद कुछ वाहन मालिकों ने पुराने मॉडलों में E20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर चिंता भी जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश नए वाहन E20 ईंधन के अनुकूल बनाए जा रहे हैं, जबकि पुराने वाहनों के उपयोगकर्ताओं को वाहन निर्माता कंपनियों की सलाह के अनुसार ही ईंधन का चयन करना चाहिए। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इस नीति से पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और कृषि क्षेत्र—तीनों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
पुरानी गाड़ियों का माइलेज 3-7% तक गिर सकता है
देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद वाहन मालिकों के बीच इसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच निर्मित अधिकांश पेट्रोल वाहन E20 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। ऐसे वाहनों में सामान्य परिस्थितियों में किसी बड़ी तकनीकी समस्या की संभावना नहीं मानी जाती। हालांकि पुराने मॉडलों के वाहन मालिकों को इस नए ईंधन के उपयोग से पहले निर्माता कंपनी की सलाह अवश्य देखनी चाहिए। पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल के लंबे समय तक उपयोग से कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख असर फ्यूल एफिशिएंसी पर पड़ सकता है। अनुमान है कि कुछ पुराने वाहनों का माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इंजन में लगे रबर सील, प्लास्टिक पाइप और अन्य पुर्जों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जाती है, खासकर उन वाहनों में जिन्हें E20 ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। एथेनॉल एक जैव-ईंधन (Biofuel) है, जिसे स्टार्च और शुगर युक्त पदार्थों के फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर अधिक पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। इसके अलावा सड़े आलू, कसावा और कुछ अन्य जैविक पदार्थों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। एथेनॉल उत्पादन को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है। फर्स्ट जनरेशन (1G) एथेनॉल गन्ने के रस, मक्का, मीठे चुकंदर और मीठे ज्वार जैसे खाद्य स्रोतों से बनाया जाता है। सेकंड जनरेशन (2G) एथेनॉल कृषि अपशिष्ट और बायोमास जैसे चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, भुट्टे के अवशेष, बांस और अन्य सेल्युलोज आधारित सामग्री से तैयार किया जाता है। वहीं थर्ड जनरेशन (3G) बायोफ्यूल एल्गी (शैवाल) से विकसित करने पर शोध जारी है, जिसे भविष्य का अधिक टिकाऊ और उन्नत ईंधन माना जा रहा है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। वहीं विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुराने वाहन मालिक अपने वाहन की तकनीकी क्षमता की जांच कर लें और वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन का ही उपयोग करें। इससे इंजन की कार्यक्षमता बनी रहेगी और वाहन लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा।
भारत में क्यों हो रहा विरोध?
देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद इसके फायदे और संभावित प्रभावों को लेकर बहस तेज हो गई है। खासकर वर्ष 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने इस नई ईंधन नीति को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी हैं। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद कुछ वाहनों में माइलेज कम होने और रखरखाव का खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। पुराने वाहन मालिकों का दावा है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन का लंबे समय तक उपयोग करने से इंजन के कुछ पुर्जों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में रबर सील, प्लास्टिक पार्ट्स और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण कई वाहन उपयोगकर्ता इस नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन से माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले इंजन का प्रदर्शन और वाहन का पिकअप बेहतर हो सकता है। सरकार का यह भी कहना है कि आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए वाहन इस ईंधन के अनुरूप विकसित किए जा रहे हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि नए और E20-अनुकूल वाहनों में इस ईंधन के उपयोग से सामान्यतः कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं आती। हालांकि पुराने मॉडल के वाहन मालिकों को निर्माता कंपनी की सलाह का पालन करना चाहिए। समय पर सर्विसिंग, सही गुणवत्ता वाले ईंधन का उपयोग और वाहन की नियमित जांच से संभावित समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। E20 पेट्रोल को लेकर अलग-अलग पक्षों की राय सामने आने के बीच यह स्पष्ट है कि स्वच्छ ईंधन की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। जहां सरकार इसे पर्यावरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं कुछ वाहन मालिक व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर अपनी चिंताएं जता रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस नीति के प्रभाव और वाहन निर्माताओं की नई तकनीकों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
गाड़ियों को कैसे पहुंचा रहा नुकसान?
देशभर में E20 पेट्रोल के व्यापक उपयोग के बीच कुछ वाहन मालिकों ने इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल की एक विशेषता यह है कि यह वातावरण से नमी को आसानी से सोख लेता है। यदि कोई वाहन लंबे समय तक खड़ा रहता है, तो कुछ परिस्थितियों में पेट्रोल और इथेनॉल का मिश्रण अलग होने की संभावना बन सकती है। इससे टैंक में नमी जमा होने और फ्यूल सिस्टम के कुछ हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती है। कुछ पुराने मॉडलों या ऐसे वाहनों में, जिन्हें इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है, रबर सील और प्लास्टिक के कुछ पुर्जों पर लंबे समय में प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यह असर सभी वाहनों में समान रूप से नहीं देखा जाता और यह वाहन के मॉडल, तकनीक तथा निर्माता के मानकों पर भी निर्भर करता है। इसलिए वाहन मालिकों को कंपनी की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल ने भी अपनी लग्जरी डिफेंडर एसयूवी को लेकर इसी तरह की समस्या का दावा किया है। उनका कहना है कि वाहन में फ्यूल पंप की खराबी आने के बाद उन्हें प्रीमियम हाई-ऑक्टेन पेट्रोल (XP95 या XP100) इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी के अधिकारियों ने मौखिक रूप से बताया कि कुछ अन्य वाहन मालिकों को भी ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, हालांकि इस संबंध में कोई लिखित निर्देश उपलब्ध नहीं कराया गया। रेशम सिंह अनमोल के बड़े भाई डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि दिल्ली-बनूड़ रोड पर सफर के दौरान डिफेंडर अचानक बंद हो गई थी। इसके बाद वाहन को चंडीगढ़ स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां जांच के बाद फ्यूल पंप बदला गया। उनका कहना है कि सर्विस सेंटर ने प्रीमियम पेट्रोल भरवाने की सलाह तो दी, लेकिन जब इस बारे में लिखित प्रमाण या ईमेल मांगा गया तो कंपनी ने ऐसा देने से इनकार कर दिया। अनमोल ने यह भी दावा किया कि दिल्ली जाते समय उन्हें कई पेट्रोल पंपों पर XP95 और XP100 पेट्रोल उपलब्ध नहीं मिला। इसी अनुभव को उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से साझा किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई अन्य वाहन मालिकों ने भी ईंधन की उपलब्धता और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के लिए उपयुक्त फ्यूल को लेकर अपनी समस्याएं साझा कीं। इस पूरे मामले ने E20 पेट्रोल, प्रीमियम ईंधन की उपलब्धता और आधुनिक वाहनों की ईंधन आवश्यकताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
देशभर में 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य किए जाने के बाद इस नई ईंधन नीति को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति को अनिवार्य कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाएगा। एथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैविक ईंधन है, जो कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक माना जाता है। इसके इस्तेमाल से प्रदूषण में कमी लाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर ईंधन उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। E20 पेट्रोल लागू होने के बाद कुछ वाहन मालिकों ने इसके प्रभाव को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बने वाहनों और कुछ हाई-परफॉर्मेंस कारों के मालिकों का कहना है कि इस ईंधन के उपयोग से माइलेज, इंजन के प्रदर्शन और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2023 के बाद तैयार किए गए अधिकांश नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप विकसित किए गए हैं और उनमें सामान्य परिस्थितियों में किसी बड़ी तकनीकी समस्या की संभावना कम है। पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल द्वारा अपनी लग्जरी डिफेंडर कार से जुड़ा अनुभव साझा किए जाने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिकों ने भी प्रीमियम ईंधन की उपलब्धता, हाई-ऑक्टेन पेट्रोल और आधुनिक वाहनों की ईंधन आवश्यकताओं को लेकर अपनी राय साझा की। इससे E20 पेट्रोल और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के बीच तालमेल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वाहन मालिक अपने वाहन निर्माता द्वारा निर्धारित ईंधन का ही उपयोग करें और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लें। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रीमियम ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, स्पष्ट दिशा-निर्देश और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई जा रही है। सरकार और वाहन उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से भविष्य में इस नई ईंधन नीति को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।










