आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दिलजीत दोसांझ के बारे में बताई ये दो महत्वपूर्ण बातें।
कनाडा में पंजाबी गायक Diljit Dosanjh के वर्ल्ड टूर “Aura-2026” के दौरान हुए एक कार्यक्रम ने विवाद का रूप ले लिया है। शो के बीच कुछ लोगों द्वारा खालिस्तानी नारे लगाए जाने की घटना सामने आई, जिसके बाद माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। दिलजीत दोसांझ ने मंच से ही ऐसे उपद्रव करने वालों को शांत रहने और कार्यक्रम में बाधा न डालने की अपील की। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर सुरक्षा कर्मियों से ऐसे लोगों को बाहर निकालने का संकेत भी दिया। इस घटना के बाद प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े Gurpatwant Singh Pannun ने एक वीडियो जारी कर दिलजीत दोसांझ को चेतावनी दी है। वीडियो में उसने दावा किया कि कनाडा के बाद अमेरिका में भी उनके शो का विरोध किया जाएगा। पन्नू ने अपने बयान में दिलजीत के कुछ सार्वजनिक विचारों और बयानों पर आपत्ति जताई है। उसने उन्हें “घमंडी” बताते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार उनके खिलाफ माहौल को और बढ़ा सकता है। उसने यह भी कहा कि मंच पर दिखाया गया आत्मविश्वास और कड़े रुख भविष्य में उनके कार्यक्रमों के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि, इन दावों और बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो दिलजीत दोसांझ की ओर से और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। सुरक्षा और आयोजकों की ओर से कार्यक्रमों की व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है और स्थिति को शांत बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

अमिताभ बच्चन के पैर चूमने पर उठाए गए सवाल
कनाडा में हुए एक कार्यक्रम के बाद पंजाबी गायक Diljit Dosanjh एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में उनके मंच से दिए गए बयान और कुछ दर्शकों की हरकतों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े Gurpatwant Singh Pannun ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने दिलजीत दोसांझ को लेकर कई तीखे और विवादित बयान दिए हैं। वीडियो में उसने उन्हें “भारतीय दोसांझ” कहकर संबोधित किया है। पन्नू ने अपने वीडियो में कुछ पुरानी घटनाओं का उल्लेख करते हुए दिलजीत के सार्वजनिक व्यवहार और बयानों पर सवाल उठाए हैं। उसने दावा किया कि उनके अनुसार कुछ ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर भी अलग-अलग नजरिए मौजूद हैं। वीडियो में पन्नू ने यह भी कहा कि मंच पर दिखाए गए कुछ कार्यों और बयानों का असर भविष्य के आयोजनों पर पड़ सकता है। उसने चेतावनी भरे लहजे में अमेरिका और कनाडा में होने वाले आगामी शो का जिक्र किया। पन्नू द्वारा दिए गए इन बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही किसी आधिकारिक संस्था ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया दी है। इसी तरह, दिलजीत दोसांझ की ओर से भी इस मामले पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आयोजकों और सुरक्षा एजेंसियों की नजर आगामी कार्यक्रमों पर बनी हुई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।
जानिए दिलजीत दोसांझ और खालिस्तान समर्थकों के बीच पूरा विवाद क्या है..
23 अप्रैल को वैंकूवर में विरोध की शुरूआत हुई: दिलजीत दोसांझ का लाइव कॉन्सर्ट उसी दिन वैंकूवर में था। उनके गाने गाने के दौरान कुछ दर्शकों ने खालिस्तान के झंडे लहराने शुरू कर दिए और खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। वे शोर मचाते रहे। दूसरे लोगों ने उनकी गतिविधियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके। खालिस्तान समर्थक भारत विरोधी नारे लगाने लगे, जिसे सुरक्षा कर्मियों ने देखा। उन्होंने खालिस्तान समर्थकों को रोकने का प्रयास किया। इसके चलते वे सुरक्षा कर्मियों से उलझ गए। फिर सुरक्षा ने उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया। खालिस्तान समर्थकों ने दिलजीत दोसांझ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमिताभ बच्चन के साथ दिखाकर उन्हें “भारत सरकार का समर्थक” घोषित किया। खालिस्तान समर्थक ने कहा कि गायक आरएसएस-भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए वे दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों का विरोध कर रहे हैं। 30 अप्रैल को खालिस्तानियों ने फिर दिखाए झंडे: दिलजीत दोसांझ ने ऑरा वर्ल्ड टूर के दौरान कैलगरी में अपने शो में खालिस्तानियों द्वारा झंडे दिखाए जाने पर गुस्सा जताया। दिलजीत ने स्टेज से ही उन खालिस्तानी समर्थकों को जवाब दिया जो पोस्टर दिखा रहे थे। अपने किसी कार्यक्रम में दिलजीत पहली बार इस कदर नाराज नजर आए। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के अंदाज में अपनी जांघ पर हाथ मारते हुए कहा कि जो आना चाहता है, वो मैदान में आए। मैं उसे उठाकर बाहर फेंक दूंगा। इससे खालिस्तानी भड़क गए और दिलजीत के खिलाफ ट्रोलिंग करने लगे।
कनाडा में अपने कॉन्सर्ट के दौरान पंजाबी गायक Diljit Dosanjh ने मंच से अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने पंजाब के प्रति प्रेम को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं और इससे जुड़ी भावनाओं पर उन्हें किसी तरह की आपत्ति नहीं है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उनके सामने झंडे दिखाकर अपनी भावना व्यक्त करना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, और उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके अनुसार, संगीत और कला का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि विवाद पैदा करना। दिलजीत ने यह भी कहा कि उनके शो में हर उम्र के लोग शामिल होते हैं, जिनमें बच्चे और परिवार भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में कार्यक्रम का माहौल शांत और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है ताकि सभी लोग शो का आनंद ले सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति कॉन्सर्ट के दौरान अनुशासन तोड़ता है या माहौल खराब करने की कोशिश करता है, तो सुरक्षा व्यवस्था के तहत उसे तुरंत बाहर कर दिया जाएगा। उनका कहना था कि लाइव शो की गरिमा बनाए रखना प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
दिलजीत दोसांझ अमिताभ बच्चन के पैरों को छूते हुए
दिलजीत को लेकर पहले भी कंट्रोवर्सी हुई
KBC में अमिताभ बच्चन के पैर छूने की घटना: वर्ष 2025 का प्रमुख विवाद तब उभरा जब दिलजीत दोसांझ ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के सेट पर आए और उन्होंने अमिताभ बच्चन के पैर छुए तथा उनका आशीर्वाद लिया। आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) और गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस पर तीखी आलोचना की। उन पर आरोप लगाया गया कि दिलजीत उन व्यक्तियों का सम्मान कर रहे हैं, जिनका नाम 1984 के सिख दंगों के दौरान विवादित रहा। इसके बाद पन्नू ने दिलजीत को ‘लक्ष्य’ बनाना शुरू किया। ‘भारत का पोस्टर बॉय’ होने का आरोप: 2025 के दौरे के दौरान कई कट्टरपंथी संगठनों ने दिलजीत के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया। उन्हें “भारत सरकार का प्रतिनिधि” और “बीजेपी-आरएसएस का सहयोगी” बताया गया। आरोप था कि दिलजीत अपनी लोकप्रियता का उपयोग विदेशों में भारत सरकार की छवि को सुधारने और सिख समुदाय में केंद्र सरकार की पैठ बनाने के लिए कर रहे हैं। पंजाबी गायक Diljit Dosanjh के पिछले दौरे के दौरान उनके कुछ मंचीय प्रदर्शनों को लेकर चर्चा और विवाद देखने को मिले हैं। कई कॉन्सर्ट्स में उन्हें भारतीय तिरंगा लहराते हुए देखा गया, जिसे उन्होंने अपने प्रदर्शन का हिस्सा बनाकर देशभक्ति की भावना के रूप में प्रस्तुत किया। इन दृश्यों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और कुछ समूहों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने इसे गर्व और एकता का प्रतीक बताया, वहीं कुछ खालिस्तान समर्थक विचारधारा से जुड़े लोगों ने इसे लेकर आपत्ति जताई। इन समूहों का दावा था कि कलाकारों को केवल क्षेत्रीय या पंजाबी पहचान को ही मंच पर बढ़ावा देना चाहिए, जबकि राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग को लेकर उनकी अलग राय रही। हालांकि, यह दृष्टिकोण व्यापक रूप से विवाद का विषय बना रहा। इस पूरे मामले में दिलजीत दोसांझ की ओर से मंच पर दी गई प्रस्तुतियों को उनके प्रशंसक सांस्कृतिक एकता और देशभक्ति के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक इसे अलग नजरिए से देखते हैं। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।