Delhi के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन लगातार जारी है और अब यह 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार उपवास का असर अब शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है, इसलिए उनकी सेहत की लगातार निगरानी की जा रही है। सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। इसी मांग को लेकर वह पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर बैठे हैं। लंबे समय तक भोजन न मिलने से शरीर पहले ग्लूकोज और वसा का उपयोग करता है, लेकिन उसके बाद ऊर्जा के लिए मांसपेशियों पर निर्भर होने लगता है। डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के वजन में उल्लेखनीय कमी आई है और कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में भी बदलाव दर्ज किया गया है। ऐसे में उनकी स्थिति पर लगातार मेडिकल टीम नजर बनाए हुए है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए। अदालत ने कहा कि यदि उनकी स्थिति गंभीर होती है तो उन्हें तुरंत आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने नागरिक के जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी पक्षों से संवेदनशीलता बरतने की बात कही। वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं, डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


सोनम वांगचुक अनशन खत्म करने को तैयार नहीं!
डॉक्टरों की गंभीर सलाहों के बावजूद सोनम वांगचुक हार मानने में असमर्थ हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वे इस आंदोलन को इतनी शीघ्रता से समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने समर्थकों से अनुरोध किया कि वे 20 जुलाई को निर्धारित संसद मार्च को और अधिक सशक्त बनाएं. वांगचुक ने विद्यार्थियों से कहा कि वे इस अभियानों को लोकतंत्र और राजनीतिक विज्ञान के वास्तविक पाठ के रूप में देखें। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन को देश के कई प्रमुख नेताओं और प्रसिद्ध व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त हो रहा है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात की और केंद्र सरकार से छात्रों तथा वांगचुक की मांगों को सुनने का निवेदन किया। उसके अलावा, संगीतकार विशाल ददलानी, अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, लेखक शोभा डे, राज ठाकरे और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल इस मुद्दे का समाधान निकालने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने वांगचुक को पत्र भेजकर अनशन समाप्त करने की विनती की है। वे कहते हैं कि परीक्षा प्रणाली में स्पष्टता और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य के तहत वे लगातार धरने पर बैठे हैं। लंबे समय तक भूखा रहना शरीर की ऊर्जा को तेजी से घटा देता है। पहले शरीर ग्लूकोज और वसा का प्रयोग करता है, लेकिन लंबे उपवास की स्थिति में मांसपेशियों पर भी असर पड़ने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सूचित किया है कि वांगचुक के वजन में उल्लेखनीय कमी आई है और इससे उनकी शारीरिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। मेडिकल टीम नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है और आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की निगरानी कर रही है ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत उपचार किया जा सके। इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी गम्भीरता दिखाई है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वांगचुक की सेहत पर लगातार नज़र रखी जाए और उनकी स्थिति गंभीर होने पर तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। अदालत का कहना है कि किसी नागरिक के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वास्थ्य को लेकर लगातार चेतावनियाँ जारी हैं, जबकि सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मांगें छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित हैं और वे शांतिपूर्ण तरिके से अपना विरोध जारी रखेंगे। वांगचुक ने अपने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने छात्रों से भी इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से समझने की गुज़ारिश की है। उनके समर्थक लगातार जंतर-मंतर पर उपस्थित रहकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन को कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। कई सार्वजनिक हस्तियों ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि किसी समाधान की ओर बढ़ा जा सके। सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच क्या सकारात्मक बातचीत होती है या नहीं। वहीं डॉक्टरों की टीम लगातार यही कह रही है।