राजधानी दिल्ली और आसपास के NCR इलाकों में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 8 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 393 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और ‘गंभीर’ स्तर के बेहद करीब है।शुक्रवार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 349 था, लेकिन रात और सुबह के दौरान हवाओं की रफ्तार कम होते ही प्रदूषण तेजी से बढ़ गया। राजधानी के कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है, जिससे घनी धुंध और कोहरे की चादर छा गई है और दृश्यता बेहद कम हो गई है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण
CPCB के मुताबिक, शनिवार सुबह दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में हालात ‘गंभीर’ बने रहे।वज़ीरपुर में AQI 445,जहांगीरपुरी में AQI 442,विवेक विहार में AQI 442 व रोहिणी में AQI 436 दर्ज किया गया।दिल्ली के करीब 18 इलाके ‘डार्क रेड ज़ोन’ में हैं, जहां AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। दिल्ली का ओवरऑल AQI 387 रिकॉर्ड किया गया है, जबकि सबसे कम AQI IGI एयरपोर्ट क्षेत्र में 307 रहा।दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।बीते 24 घंटों में कुछ इलाकों में AQI 500 से लेकर 750 के करीब तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में हवाओं की रफ्तार कम हो गई है। पहले 15–20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं अब घटकर करीब 8 किमी प्रति घंटे रह गई हैं। इसके चलते प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंस गए हैं।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 13 से 18 दिसंबर तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
जहरीली हवा का सीधा असर लोगों की सेहत पर दिख रहा है। सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।सरकार की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात में सुधार होता नजर नहीं आ रहा।
