
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किए जाने का असर अब न्यायिक व्यवस्था तक पहुंच गया है। राजधानी में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होने से बड़ी संख्या में वकील, अदालत के कर्मचारी और मुकदमों से जुड़े पक्ष समय पर सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके। इसके बाद अदालत में इस स्थिति का मुद्दा उठाया गया और न्यायिक कार्यवाही पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि जिन वकीलों की अनुपस्थिति केवल मेट्रो सेवाएं बाधित होने के कारण हुई है, उसके आधार पर किसी भी पक्ष के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि परिवहन संबंधी कठिनाइयों का असर न्याय पाने के अधिकार पर न पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है तो न्यायालय आवश्यक हस्तक्षेप पर विचार कर सकता है। इस घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी अदालत के समक्ष विशेष अनुरोध रखा। एसोसिएशन ने मांग की कि वकीलों, कोर्ट स्टाफ और मुकदमों से जुड़े लोगों को अदालत तक पहुंचने के लिए सीमित आवाजाही की अनुमति दी जाए, ताकि लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो। एसोसिएशन का कहना है कि परिवहन व्यवस्था बाधित होने से न्यायिक प्रक्रिया की गति पर असर पड़ रहा है और आम नागरिकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजधानी के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि कुछ प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए इंटरचेंज सेवा जारी रखी गई है, ताकि आवश्यक यात्रा करने वाले लोगों को न्यूनतम परेशानी हो। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के आधार पर यह कदम उठाया गया है। इसी दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दी है। ऐसे में छात्र आंदोलन, सुरक्षा व्यवस्था, मेट्रो सेवाओं में बदलाव और न्यायिक कार्यवाही से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर प्रशासन और अदालत दोनों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन मामलों पर होने वाले फैसले राजधानी की स्थिति और आगे की व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने राजधानी के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से बंद कर दी है। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने तक इन स्टेशनों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। बंद किए गए स्टेशनों में लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम शामिल हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों को प्रवेश और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर लाइन बदलने की सेवा जारी रखी गई है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय स्टेशन पर यात्री केवल इंटरचेंज की सुविधा का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन वहां से बाहर निकलने या स्टेशन के भीतर प्रवेश करने की अनुमति फिलहाल नहीं है। इससे मेट्रो नेटवर्क पर यात्रा कर रहे लोगों को आंशिक राहत मिल रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जंतर-मंतर क्षेत्र में चल रहे छात्र आंदोलन और सुरक्षा संबंधी तैयारियों के मद्देनजर एहतियात के तौर पर उठाया गया है। बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इसी के अनुरूप मेट्रो संचालन में यह अस्थायी बदलाव किया गया है। मेट्रो स्टेशनों के बंद होने का प्रभाव केवल दैनिक यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालतों, सरकारी दफ्तरों, निजी संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है और सुरक्षा स्थिति सामान्य होने के बाद स्टेशनों को दोबारा खोलने पर निर्णय लिया जाएगा। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले आधिकारिक अपडेट अवश्य जांच लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।