दिल्ली ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। पता चला है कि जम्मू के मेडिकल कॉलेज से MBBS करने वाले कई कश्मीरी डॉक्टरों का ब्रेनवॉश कर एक सफेदपोश टेरर मॉड्यूल खड़ा किया गया था। ये सभी डॉक्टर पढ़ाई पूरी करने के बाद देश के अलग-अलग शहरों में नौकरी कर रहे थे और वहीं पर नए लोगों को मॉड्यूल में जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
ब्रेनवॉश ऐसे किया गया
जांच एजेंसियों के अनुसार,
- इन डॉक्टरों को चुन-चुनकर संपर्क किया गया
- दुनिया के अलग-अलग देशों में एक समुदाय पर हुए अत्याचारों के वीडियो बार-बार दिखाए गए
- यह कहा गया कि “अपनी कौम के लिए आगे आना ही असली जिम्मेदारी है”
सूत्रों का दावा है कि हर एक या दो डॉक्टर पर एक पाकिस्तानी हैंडलर नियुक्त था, जो रोजाना वीडियो कॉल और वॉयस कॉल पर बातचीत करता था। पहले कट्टरपंथी वीडियो दिखाए जाते और कुछ समय बाद बम बनाने और ब्लास्ट करवाने के वीडियो लिंक भेजे जाने लगे।दिल्ली ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में
लाल किले में हुए धमाके के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक माना और पुलिस कमिश्नर व मुख्य सचिव को कई सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया हैअमोनियम नाइट्रेट खरीदने-बेचने वाले हर व्यक्ति / कारोबारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगाइसमें खरीदार-विक्रेता की फोटो, पहचान, मात्रा और लेनदेन की पूरी जानकारी दर्ज होगीसंवेदनशील रसायन के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई ढिलाई नहीं दी जाएगी
सोशल मीडिया की वैज्ञानिक ट्रैकिंग
एलजी कार्यालय ने पुलिस को निर्देश दिया है कि:मेटा, एक्स (Twitter) और दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म से तुरंत बातचीत शुरू की जाएऐसे कंटेंट की ट्रैकिंग की जाए जो लोगों को भड़काने या गुमराह करने की कोशिश करता है
एलजी ने कहा कि ऑनलाइन कट्टरपंथ आज की सुरक्षा चुनौतियों में सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल इंटेलिजेंस बढ़ाई जाएगीकम्युनिटी आउटरीच कार्यक्रम हर थाने में बढ़ाए जाएंगेलोगों को शामिल कर प्रिवेंटिव पुलिसिंग को मजबूत किया जाएगा
एलजी ने साफ कहा है कि दिल्ली जैसी अंतरराष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता, इसलिए सभी एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना
