Delhi में सरकारी दवाओं की चोरी और कालाबाजारी का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने 70 लाख रुपये मूल्य की दवाओं की भारी खेप के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पता चला कि ये लोग सरकारी दवाओं को अवैध रूप से खरीदकर उन्हें बाजार में अधिक कीमत पर बेच रहे थे। इस गिरफ्तारी से दवाओं की काले बाजारी गतिविधियों पर कड़ी चोट लगी है और आगे की जांच जारी है Delhi पुलिस ने सरकारी हॉस्पिटलों से मुफ्त दवाएं चुराकर उन्हें बेचने वाले एक गिरोह का खुलासा किया। पांच संदिग्धों को पकड़ा गया और 70 लाख रुपये की औषधियां बरामद की गई हैं।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क दी जाने वाली दवाओं को बाजार में बेचने वाले एक विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. दिल्ली पुलिस के अपराध शाखा ने इस संगठित समूह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनकी संपत्ति से लगभग 70 लाख रुपये की दवाएं और दो वाहन जब्त किए हैं, जो सप्लाई के लिए उपयोग हो रहे थे।
राजेंद्र बाजार के निकट बरामद हुई दवाओं की विशाल मात्रा
पुलिस के अधिकारी ने बताया कि पूरी कारवाई एक विशेष सूचना के आधार पर की गई. क्राइम ब्रांच की टीम ने एसीपी स्तर की देखरेख में अभियान चलाया, जिसमें इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस नेटवर्क पर काफी समय से ध्यान दिया जा रहा था, जिसके बाद जाल बिछाकर संदिग्धों को रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में 53 वर्षीय नीरज कुमार और 47 वर्षीय सुशील कुमार शामिल हैं, जो सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। इसके अलावा, 48 वर्षीय लक्ष्मण मुखिया, जो दिल्ली में रहता है, को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इन्हें तीस हजारी क्षेत्र के नजदीक तब पकड़ा जब वे टेम्पो और कार में दवाओं का सामान ले जा रहे थे। जांच में पाया गया कि जब्त की गई दवाओं पर साफ-साफ लिखा था कि ये सरकारी आपूर्ति के लिए हैं और बिक्री के लिए नहीं।
पूछताछ में उजागर हुआ संपूर्ण नेटवर्क
मुख्य आरोपी नीरज कुमार ने जांच के समय हैरान करने वाले खुलासे किए। उसने उल्लेख किया कि वह पिछले एक से डेढ़ साल से इस गैरकानूनी व्यापार को संचालित कर रहा था। अस्पतालों के भीतर मौजूद स्रोतों की सहायता से दवाएं निकाली जाती थीं और फिर बिचौलियों के माध्यम से विभिन्न शहरों में भेजी जाती थीं। इस जानकारी के पश्चात पुलिस ने दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनका नाम बिनेश कुमार (54) और प्रकाश मेहता (30) है

अस्पताल के कर्मियों की सांठ-गांठ से चल रही थी धोखाधड़ी।
जांच में यह पता चला कि बिनेश कुमार, जो दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में फार्मासिस्ट-सह-स्टोरकीपर हैं, और संविदा कर्मचारी प्रकाश मेहता, स्टॉक रिकॉर्ड में अनियमितता कर दवाओं को निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि प्रकाश मेहता कमीशन के तहत दवाओं की निकासी, भंडारण और वित्तीय लेनदेन का कार्य करता था।
बड़ी कीमत वाली और जीवनरक्षक औषधियाँ भी सम्मिलित हैं।
बरामद किए गए स्टॉक में कई महत्वपूर्ण और कीमती औषधियाँ शामिल हैं। इनमें एंटीबायोटिक्स के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए प्रयोग होने वाले इंजेक्शन और अन्य महत्वपूर्ण एवं जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल थीं। ये औषधियाँ सामान्यतः अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
पुलिस ने बताया कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित रैकेट था। इसमें अस्पताल के कर्मी, परिवहनकर्ता और बाहरी वितरक शामिल थे। सभी मिलकर सरकारी दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से पहले बाजार में बेच रहे थे।
पुलिस अब इस समूह से संबंध रखने वाले अन्य व्यक्तियों की पहचान करने में लगी हुई है. साथ ही वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयां आगे भी होती रहेंगी ताकि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोका जा सके और जरूरतमंद मरीजों तक दवाएं सही तरह से पहुंच सकें।