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Delhi-NCR में फिर बढ़े CNG के दाम

दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। पिछले 48 घंटों में दूसरी बार सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 17 मई से लागू हो चुकी हैं, जिसके बाद राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत 80.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। इससे पहले 15 मई को भी कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र में नई दरें लागू कर दी गई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सीएनजी के दाम 90 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुके हैं। कानपुर, फतेहपुर और हमीरपुर में अब उपभोक्ताओं को 91.42 रुपये प्रति किलो तक भुगतान करना पड़ रहा है। ऊर्जा कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। वैश्विक स्तर पर चल रहे ऊर्जा संकट और आपूर्ति में कमी के कारण गैस आयात की लागत लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर संकट की स्थिति ने भी गैस सप्लाई को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बनी अस्थिरता के कारण शिपिंग लागत बढ़ी है। इसी वजह से तेल और गैस कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने बताया कि बढ़ती लागत को लंबे समय तक कंपनी अकेले नहीं उठा सकती। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण ग्राहकों पर अतिरिक्त भार डालना जरूरी हो गया है। यही कारण है कि दो दिनों के भीतर दूसरी बार कीमतों में इजाफा किया गया। सीएनजी महंगी होने से सबसे ज्यादा असर ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों पर पड़ने वाला है। दिल्ली-एनसीआर में लाखों वाहन सीएनजी पर चलते हैं, ऐसे में रोजाना यात्रा करने वालों का खर्च बढ़ जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ऑटो और टैक्सी किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आम लोगों के घरेलू बजट पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। जिन परिवारों के पास सीएनजी वाहन हैं, उन्हें अब हर महीने ईंधन पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह बढ़ोतरी लोगों की चिंता और बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले समय में सीएनजी के दाम और बढ़ सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही अपनी दैनिक जरूरतों और यात्रा खर्चों का संतुलन बनाना होगा।

48 घंटे में फिर महंगी हुई CNG

दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर सीएनजी उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लगा है। 48 घंटे के भीतर दूसरी बार सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। 17 मई से लागू नई दरों के बाद राजधानी दिल्ली में सीएनजी का भाव बढ़कर 80.09 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। इससे पहले 15 मई को भी कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर क्षेत्रों में भी सीएनजी की नई दरें लागू हो गई हैं। कई शहरों में सीएनजी की कीमत 90 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है। कानपुर, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे शहरों में उपभोक्ताओं को अब 91.42 रुपये प्रति किलो तक भुगतान करना पड़ रहा है। परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कीमतों में उछाल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण भारत में गैस आयात महंगा हो गया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर संकट की स्थिति ने गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में बाधाओं के कारण ऊर्जा कंपनियों की लागत बढ़ी है। इसका असर केवल गैस ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने कहा है कि कंपनी लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को खुद वहन नहीं कर सकती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते ग्राहकों पर कुछ अतिरिक्त बोझ डालना जरूरी हो गया है। यही कारण है कि दो दिनों के भीतर दूसरी बार सीएनजी के दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया। सीएनजी की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में वाहन सीएनजी पर चलते हैं, ऐसे में वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। आने वाले दिनों में किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा। घरेलू बजट पर भी इस बढ़ोतरी का असर साफ दिखाई देगा। जो लोग रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं या निजी सीएनजी वाहन इस्तेमाल करते हैं, उनके मासिक खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से बचत करना मुश्किल होता जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें स्थिर नहीं हुईं तो आने वाले समय में और बढ़ोतरी संभव है। सरकार और ऊर्जा कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण तुरंत राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में सीएनजी उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही अपनी यात्रा और दैनिक खर्चों की योजना बनानी होगी। लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है।

सीएनजी के फिर से बढ़ते हुए दाम

दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर सीएनजी उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। दो दिनों के भीतर दूसरी बार सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। 15 मई को 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद अब 17 मई को फिर से 1 रुपये प्रति किलो दाम बढ़ा दिए गए हैं। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में सीएनजी का भाव 80.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर शहरों में भी नई दरें लागू हो चुकी हैं। रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का कारण बन गई है। खासकर ऑटो और टैक्सी चालकों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ऊर्जा कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई संकट और ऊर्जा मांग बढ़ने के कारण आयात महंगा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। शिपिंग लागत बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है। इसी वजह से गैस वितरण कंपनियां लगातार कीमतों में इजाफा कर रही हैं। सीएनजी महंगी होने से आम लोगों का मासिक बजट भी प्रभावित हो रहा है। निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों को अब हर महीने ईंधन पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में सीएनजी के दाम और बढ़ सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही अपने दैनिक खर्चों का संतुलन बनाना होगा |

15 मई को कीमतें 2 रुपये बढ़ गई थीं

इससे पूर्व 15 मई को सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई थी। 15 मई को सुबह 6 बजे से दिल्ली में 1 किलो सीएनसी गैस की कीमत 79.09 रुपये तक पहुँच गई थी। 15 मई को सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई गई थीं. तेल कंपनियों के बढ़ते मूल्य के कारण दाम बढ़ाना कंपनियों के लिए अनिवार्य हो गया है। इंपोर्ट की बढ़ती लागत, शिपिंग खर्च और कच्चे तेल एवं LNG की बढ़ती कीमतों के कारण गैस और तेल के मूल्य में इजाफा हुआ है. भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए 50% से अधिक प्राकृतिक गैस आयात करता है। ईरान युद्ध और होर्मुज के मार्ग के बंद होने के कारण गैस आपूर्ति में रुकावट हो रही है. मांग में वृद्धि और आपूर्ति में कमी के कारण कीमतें तेजी से ऊंची हुई हैं. दिल्ली-एनसीआर में गैस सप्लाई करने वाली इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) का कहना है कि बढ़ी हुई लागत को कंपनी लंबे समय तक खुद नहीं संभाल सकती, इसलिए मजबूरी में उन्हें यह अतिरिक्त भार ग्राहकों पर डालना पड़ा है।

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